मुख्य तथ्य

  • सुधारा गया विषय सीईटी स्नातक के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड के अनुसार है: पदार्थ परिवर्तन, अम्ल-क्षार-लवण, विद्युत, ऊष्मा, कार्य और ऊर्जा, स्वास्थ्य...
  • भौतिक और रासायनिक परिवर्तन को अम्ल, क्षार और लवण से अलग पढ़ना जरूरी है, क्योंकि सीईटी में उदाहरण, सूचक, उदासीनीकरण और दैनिक जीवन के यौगिक पूछे जाते है...
  • विद्युत धारा, ऊष्मा, कार्य और ऊर्जा को मात्रकों, घरेलू सुरक्षा, बिजली खपत और सरल रूपांतरणों के साथ पढ़ना चाहिए।
  • आहार, पोषण, रक्त समूह, आरएच कारक और संक्रामक, असंक्रामक तथा पशुजन्य रोग इस खंड का जन-स्वास्थ्य आधार बनाते हैं।
  • पर्यावरण, जैव विविधता, संरक्षण, सतत विकास तथा पौधों-पशुओं का आर्थिक महत्व विज्ञान को राजस्थान की खेती और आजीविका से जोड़ता है।

मुख्य बिंदु

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    सुधारा गया विषय सीईटी स्नातक के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड के अनुसार है: पदार्थ परिवर्तन, अम्ल-क्षार-लवण, विद्युत, ऊष्मा, कार्य और ऊर्जा, स्वास्थ्य जीवविज्ञान, पर्यावरण, कृषि, सूचना-संचार प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष और राजस्थान संदर्भ।

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    भौतिक और रासायनिक परिवर्तन को अम्ल, क्षार और लवण से अलग पढ़ना जरूरी है, क्योंकि सीईटी में उदाहरण, सूचक, उदासीनीकरण और दैनिक जीवन के यौगिक पूछे जाते हैं।

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    विद्युत धारा, ऊष्मा, कार्य और ऊर्जा को मात्रकों, घरेलू सुरक्षा, बिजली खपत और सरल रूपांतरणों के साथ पढ़ना चाहिए।

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    आहार, पोषण, रक्त समूह, आरएच कारक और संक्रामक, असंक्रामक तथा पशुजन्य रोग इस खंड का जन-स्वास्थ्य आधार बनाते हैं।

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    पर्यावरण, जैव विविधता, संरक्षण, सतत विकास तथा पौधों-पशुओं का आर्थिक महत्व विज्ञान को राजस्थान की खेती और आजीविका से जोड़ता है।

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    सूचना-संचार प्रौद्योगिकी, रक्षा प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह और काजरी जोधपुर तथा रावतभाटा जैसी राजस्थान संस्थाएँ तकनीक भाग को परीक्षा-योग्य बनाती हैं।

पदार्थ परिवर्तन, अम्ल, क्षार और लवण

सीईटी स्नातक के विज्ञान खंड की शुरुआत भौतिक और रासायनिक परिवर्तन से होती है। भौतिक परिवर्तन में पदार्थ की संरचना वही रहती है: बर्फ का पिघलना, पानी का वाष्पन, काँच टूटना, नमक का पानी में घुलना और रबर का खिंचना सामान्य उदाहरण हैं। रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है: लोहे में जंग लगना, कागज जलना, दूध खट्टा होना, भोजन का पचना और दही बनना अहम उदाहरण हैं। रासायनिक परिवर्तन में अक्सर गैस निकलना, रंग बदलना, ऊष्मा या प्रकाश निकलना, अवक्षेप बनना या गंध में स्थायी बदलाव दिखता है। अम्ल पानी में हाइड्रोजन आयन देते हैं और नीले लिटमस को लाल करते हैं; आम उदाहरण हैं जठर रस का हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, नींबू का साइट्रिक अम्ल और सिरके का एसीटिक अम्ल। क्षार वे बेस हैं जो पानी में घुलते हैं; ये लाल लिटमस को नीला करते हैं। लवण प्रायः अम्ल और क्षार के उदासीनीकरण से बनते हैं। सोडियम क्लोराइड सामान्य नमक है, सोडियम बाइकार्बोनेट खाने का सोडा, सोडियम कार्बोनेट धोने का सोडा और कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड ब्लीचिंग पाउडर है। परीक्षा में उपयोग वाला कोण याद रखें: एंटासिड पेट के अतिरिक्त अम्ल को घटाते हैं, चूना सफेदी में काम आता है, क्लोरीन छोड़ने वाले यौगिक कीटाणुशोधन में सहायक हैं और मिट्टी का पीएच फसल चयन को प्रभावित करता है। राजस्थान में क्षारीय मिट्टी की जाँच, सोडिक मिट्टी सुधार में जिप्सम और सांभर क्षेत्र का नमक उत्पादन वाष्पन तथा क्रिस्टलीकरण को रोजमर्रा उदाहरण बनाते हैं।

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