राजस्थान के ऊर्जा संसाधन और बिजली क्षेत्र
मुख्य तथ्य
- राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार दिसंबर 2025 तक कुल स्थापित बिजली क्षमता 31,556.43 मेगावाट थी;
- राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति, 2024 ने 2029-30 तक 1,25,000 मेगावाट नवीकरणीय बिजली परियोजनाओं का लक्ष्य रखा: 90,000 मेगावाट सौर, 25,000 मेगावाट पवन...
- जोधपुर के भड़ला में भड़ला सौर पार्क की कुल चालू क्षमता 2,245 मेगावाट है, जो 65 मेगावाट, 680 मेगावाट, 1,000 मेगावाट और 500 मेगावाट के चार चरणों से बनी...
- मई 2017 में भड़ला चरण-III की SECI बोली में ₹2.44 प्रति यूनिट दर मिली; इसे शुल्क-इतिहास का संकेत मानें, आज की खुदरा बिजली दर नहीं।
- दिसंबर 2025 तक राजस्थान का EHV संचरण नेटवर्क 45,933.315 सर्किट किमी, 678 EHV उपकेंद्र और 1,09,071 MVA क्षमता तक पहुँच गया;
मुख्य बिंदु
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CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह विषय राजस्थान भूगोल के अंतर्गत “ऊर्जा संसाधन - नवीकरणीय और अनवीकरणीय” के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल है; इसे संसाधन-भूगोल और बिजली-श्रृंखला दोनों की तरह पढ़ें।
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राजस्थान की ऊर्जा तस्वीर मिश्रित है: पश्चिमी राजस्थान में लिग्नाइट, पेट्रोलियम और गैस, तापीय बिजलीघर, चंबल-माही से जुड़े जलविद्युत संदर्भ, रावतभाटा परमाणु ऊर्जा और बड़ा सौर-पवन नवीकरणीय आधार।
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राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार दिसंबर 2025 तक कुल स्थापित बिजली क्षमता 31,556.43 मेगावाट थी; मुख्य स्थापित-क्षमता ढाँचे में सौर 9,898 मेगावाट और पवन 4,416.12 मेगावाट है।
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राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति, 2024 ने 2029-30 तक 1,25,000 मेगावाट नवीकरणीय बिजली परियोजनाओं का लक्ष्य रखा: 90,000 मेगावाट सौर, 25,000 मेगावाट पवन और मिश्रित, तथा 10,000 मेगावाट जल, पंपित भंडारण और बैटरी भंडारण।
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जोधपुर के भड़ला में भड़ला सौर पार्क की कुल चालू क्षमता 2,245 मेगावाट है, जो 65 मेगावाट, 680 मेगावाट, 1,000 मेगावाट और 500 मेगावाट के चार चरणों से बनी है।
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मई 2017 में भड़ला चरण-III की SECI बोली में ₹2.44 प्रति यूनिट दर मिली; इसे शुल्क-इतिहास का संकेत मानें, आज की खुदरा बिजली दर नहीं।
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दिसंबर 2025 तक राजस्थान का EHV संचरण नेटवर्क 45,933.315 सर्किट किमी, 678 EHV उपकेंद्र और 1,09,071 MVA क्षमता तक पहुँच गया; इसलिए रेगिस्तानी नवीकरणीय ऊर्जा में ग्रिड निकासी मुख्य मुद्दा है।
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संस्थाएँ न मिलाएँ: RVUNL उत्पादन, RVPNL संचरण, जयपुर/अजमेर/जोधपुर डिस्कॉम वितरण, RERC नियमन और RRECL/RREC नवीकरणीय ऊर्जा की नोडल एजेंसी है।
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पाठ्यक्रम दायरा और ऊर्जा-संसाधन आधार
वर्तमान CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह विषय राजस्थान भूगोल के भीतर “ऊर्जा संसाधन - नवीकरणीय और अनवीकरणीय” के रूप में दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि बिजलीघर की इंजीनियरिंग पढ़नी है; परीक्षा यह देखती है कि राजस्थान की भौतिक भूगोल, खनिज-संपदा, जलवायु, संस्थाएँ और संचरण नेटवर्क राज्य के ऊर्जा संसाधनों को कैसे आकार देते हैं। इसलिए अच्छे उत्तर में स्रोत, क्षेत्र, परियोजना, संस्था और उपयोग को साथ जोड़ना चाहिए।
राजस्थान का ऊर्जा आधार मिश्रित है। पारंपरिक संसाधनों में लिग्नाइट, पेट्रोलियम और गैस, कोयला-आधारित तापीय उत्पादन, जलविद्युत संदर्भ और परमाणु ऊर्जा आते हैं। नवीकरणीय संसाधनों में सौर, पवन, बायोमास, कचरे से ऊर्जा, लघु जलविद्युत और सौर-पवन मिश्रित परियोजनाएँ शामिल हैं। भंडारण भी अब इसी चर्चा का हिस्सा है, क्योंकि सौर-समृद्ध राज्य को धूप या हवा बदलने पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए बैटरी भंडारण, पंपित भंडारण और लचीले संचरण की जरूरत होती है।
राजस्थान की बढ़त साफ है: तेज सौर विकिरण, अधिक धूप वाले दिन, बड़े मरुस्थलीय और अर्द्ध-शुष्क भू-भाग, तथा पश्चिमी जिलों में सौर-पवन परियोजनाओं की अनुकूलता। इसके साथ लिग्नाइट क्षेत्र, बाड़मेर बेसिन का पेट्रोलियम, तापीय बिजलीघर और रावतभाटा परमाणु ऊर्जा जैसे पारंपरिक आधार भी हैं। CET में अक्सर केवल एक प्रसिद्ध सौर पार्क नहीं, बल्कि यह पूरा मिश्रण पूछा जाता है।
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