मुख्य तथ्य

  • सब्सिडी सरकार की ऐसी सहायता है जिससे किसी जरूरी वस्तु, सेवा या आर्थिक गतिविधि की प्रभावी लागत कम हो जाती है।
  • सब्सिडी सीधे नकद सहायता, कम कीमत पर आपूर्ति, कर-छूट, ब्याज सहायता या सस्ते इनपुट के रूप में हो सकती है।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली खाद्य सुरक्षा का बड़ा साधन है, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के ढांचे के तहत पात्र राशन कार्डधारी परिवारों को उचित मू...
  • लक्षित सहायता सरकारी खर्च का बोझ घटा सकती है, लेकिन गलत पहचान होने पर पात्र लोग छूट सकते हैं;
  • ई-कॉमर्स का अर्थ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से वस्तुओं या सेवाओं की खरीद-बिक्री है, जिसे डिजिटल भुगतान, लॉजिस्टिक्स, डेटा प्रणालियां और उपभोक्ता-संर...

मुख्य बिंदु

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    सब्सिडी सरकार की ऐसी सहायता है जिससे किसी जरूरी वस्तु, सेवा या आर्थिक गतिविधि की प्रभावी लागत कम हो जाती है।

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    सब्सिडी सीधे नकद सहायता, कम कीमत पर आपूर्ति, कर-छूट, ब्याज सहायता या सस्ते इनपुट के रूप में हो सकती है।

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    सार्वजनिक वितरण प्रणाली खाद्य सुरक्षा का बड़ा साधन है, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के ढांचे के तहत पात्र राशन कार्डधारी परिवारों को उचित मूल्य दुकानों से खाद्यान्न मिलता है।

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    लक्षित सहायता सरकारी खर्च का बोझ घटा सकती है, लेकिन गलत पहचान होने पर पात्र लोग छूट सकते हैं; सार्वभौमिक सहायता सरल होती है, पर महंगी और कम केंद्रित होती है।

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    ई-कॉमर्स का अर्थ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से वस्तुओं या सेवाओं की खरीद-बिक्री है, जिसे डिजिटल भुगतान, लॉजिस्टिक्स, डेटा प्रणालियां और उपभोक्ता-संरक्षण नियम सहारा देते हैं।

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    हरित क्रांति मुख्य रूप से गेहूं और चावल जैसे खाद्यान्नों की उत्पादकता को उच्च उपज वाली किस्मों के बीज, सिंचाई, उर्वरक और बेहतर खेती पद्धतियों से बढ़ाने से जुड़ी है।

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    श्वेत क्रांति दूध और डेयरी सहकारिता से जुड़ी है, जबकि नीली क्रांति मत्स्य पालन और जलीय कृषि से जुड़ी है।

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    बहुविकल्पीय प्रश्नों में सबसे सीधा क्षेत्र-संबंध याद रखें: हरित का अर्थ फसल और खाद्यान्न, श्वेत का अर्थ दूध और डेयरी, तथा नीली का अर्थ मछली और मत्स्य पालन है।

सब्सिडी का अर्थ, उद्देश्य और रूप

सब्सिडी का सामान्य अर्थ है सरकार की आर्थिक सहायता, जिससे किसी वस्तु, सेवा या गतिविधि की लागत आम व्यक्ति, किसान, उत्पादक या सेवा लेने वाले के लिए कम हो जाती है। भारतीय अर्थव्यवस्था में यह शब्द खाद्यान्न, उर्वरक, ईंधन, कृषि ऋण, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और कल्याणकारी योजनाओं के संदर्भ में बार-बार आता है। इसका मुख्य उद्देश्य जरूरी चीजों को किफायती बनाना, कमजोर वर्गों को सुरक्षा देना, उत्पादन को प्रोत्साहन देना और सामाजिक हित वाले क्षेत्रों को सहारा देना है।

एक सरल उदाहरण खाद्य सब्सिडी है। इसमें सरकार खर्च का एक हिस्सा खुद उठाती है ताकि पात्र परिवारों को अनाज कम कीमत पर मिल सके। किसान के लिए सस्ते उर्वरक या ब्याज सहायता भी सब्सिडी का रूप हो सकते हैं। यानी सब्सिडी केवल गरीब उपभोक्ता को मिलने वाली छूट नहीं है; यह उत्पादक, किसान, विद्यार्थी, मरीज या छोटे उद्यमी तक अलग-अलग रूपों में पहुंच सकती है।

सब्सिडी कई तरीकों से दी जा सकती है। कीमत सब्सिडी में अंतिम उपभोक्ता को वस्तु कम कीमत पर मिलती है। इनपुट सब्सिडी में उत्पादन में लगने वाली चीजें, जैसे उर्वरक, बिजली, पानी या ऋण, सस्ते पड़ते हैं। ब्याज सहायता में ऋण पर ब्याज का बोझ घटता है। कर-छूट में सरकार कम कर लेकर किसी गतिविधि को बढ़ावा देती है। प्रत्यक्ष लाभ सहायता में लाभार्थी को सीधे पैसा दिया जाता है, ताकि वह अपनी जरूरत के अनुसार खर्च कर सके। कुछ मामलों में सरकारी खरीद और समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था भी उत्पादक को अप्रत्यक्ष सहारा देती है।

परीक्षा के लिए मुख्य बात यह है कि सब्सिडी हमेशा नकद भुगतान नहीं होती। कम कीमत, सस्ता इनपुट, कर-राहत, ब्याज में छूट, या सरकारी आपूर्ति भी सब्सिडी हो सकती है। हर स्थिति में सरकार किसी सामाजिक या आर्थिक उद्देश्य के लिए खर्च उठाती है या राजस्व छोड़ती है।

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