गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और समावेशी विकास
मुख्य तथ्य
- 2005: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ने काम मांगने वाले ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों के लिए एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन तक...
- 2009: तेंदुलकर समिति की पद्धति को आधिकारिक गरीबी-मापन के लिए स्वीकार किया गया और गरीबी-रेखा को व्यापक उपभोग-टोकरी से जोड़ा गया;
- 2013: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने वैधानिक खाद्यान्न अधिकार बनाए;
- 2014: रंगराजन समिति ने तेंदुलकर से ऊंची गरीबी रेखा सुझाई, पर नीति आयोग के अनुसार 1993-94, 2004-05 और 2011-12 के आधिकारिक गरीबी अनुमानों का आधार तेंदुल...
- 2015: संयुक्त राष्ट्र ने 17 सतत विकास लक्ष्यों वाला 2030 एजेंडा अपनाया, जिसमें गरीबी घटाने, सम्मानजनक काम, असमानता कम करने और संस्थागत मजबूती को जोड़ा...
मुख्य बिंदु
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2005: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ने काम मांगने वाले ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों के लिए एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन तक अकुशल शारीरिक मजदूरी-रोजगार की मांग-आधारित कानूनी गारंटी बनाई।
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2009: तेंदुलकर समिति की पद्धति को आधिकारिक गरीबी-मापन के लिए स्वीकार किया गया और गरीबी-रेखा को व्यापक उपभोग-टोकरी से जोड़ा गया; इसी पद्धति पर योजना आयोग ने 2011-12 के लिए भारत का गरीबी अनुपात 21.9% आंका।
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2013: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने वैधानिक खाद्यान्न अधिकार बनाए; प्राथमिकता परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम और अंत्योदय परिवारों को प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है।
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2014: रंगराजन समिति ने तेंदुलकर से ऊंची गरीबी रेखा सुझाई, पर नीति आयोग के अनुसार 1993-94, 2004-05 और 2011-12 के आधिकारिक गरीबी अनुमानों का आधार तेंदुलकर रेखा ही रही।
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2015: संयुक्त राष्ट्र ने 17 सतत विकास लक्ष्यों वाला 2030 एजेंडा अपनाया, जिसमें गरीबी घटाने, सम्मानजनक काम, असमानता कम करने और संस्थागत मजबूती को जोड़ा गया।
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2016: संशोधित RBI अधिनियम ने भारत के लचीले महंगाई-लक्ष्यीकरण ढांचे को वैधानिक आधार दिया; CPI महंगाई लक्ष्य 4% है और सहन-सीमा 2% से 6% है।
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2024: नीति आयोग के चर्चा-पत्र ने 2013-14 से 2022-23 के बीच 24.82 करोड़ लोगों के बहुआयामी गरीबी से बाहर आने और गरीबी अनुपात 29.17% से 11.28% होने का अनुमान दिया।
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वर्तमान NFSA वितरण: PMGKAY के तहत मुफ्त खाद्यान्न वितरण की लक्षित NFSA कवरेज 81.35 करोड़ व्यक्तियों की है और नवीनतम आधिकारिक समीक्षा में लगभग 80 करोड़ व्यक्ति मुफ्त खाद्यान्न प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए खाद्य-सुरक्षा गरीबी-निवारण का केंद्रीय सहारा बनी हुई है।
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गरीबी का अर्थ और मापन
गरीबी का सीधा अर्थ है न्यूनतम जीवन-स्तर के लिए जरूरी साधनों का अभाव। परीक्षा में इसे दो रूपों में समझना चाहिए। निरपेक्ष गरीबी में भोजन, कपड़ा, आवास, ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों के लिए एक न्यूनतम सीमा तय की जाती है। सापेक्ष गरीबी में परिवार या व्यक्ति की स्थिति समाज के सामान्य जीवन-स्तर से तुलना करके देखी जाती है। भारत में लंबे समय तक उपभोग-व्यय आधारित गरीबी रेखा का उपयोग हुआ, क्योंकि गरीब परिवारों की आय अनियमित हो सकती है, पर उनका खर्च अपेक्षाकृत दिखता है। गरीबी के कारणों में कम और अनियमित आय, भूमिहीनता, कम उत्पादकता, बीमारी, कमजोर शिक्षा, सामाजिक वंचना, क्षेत्रीय पिछड़ापन और कीमत या जलवायु के झटके शामिल हैं।
पुराने दौर में कैलोरी-मानक प्रमुख था। लकड़ावाला समिति ने राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखाओं को महत्व दिया। तेंदुलकर समिति ने दिसंबर 2009 में रिपोर्ट दी; योजना आयोग ने उस पद्धति को स्वीकार किया और 2011-12 के लिए भारत का गरीबी अनुपात 21.9% आंका। रंगराजन समिति ने 2014 में ऊंची गरीबी रेखा सुझाई, लेकिन नीति आयोग ने बाद में दर्ज किया कि 1993-94, 2004-05 और 2011-12 के आधिकारिक गरीबी अनुमानों का आधार तेंदुलकर रेखा ही रही। परीक्षा में मुख्य क्रम याद रखें: कैलोरी-मानक, लकड़ावाला, तेंदुलकर, रंगराजन और फिर नई उपभोग-सर्वेक्षण बहस।
मूल बात यह है: गरीबी केवल कम आय नहीं है; मापन-पद्धति तय करती है कि कौन गरीब गिना जाएगा और नीति किस दिशा में जाएगी। अच्छे उत्तर में गरीबी को रोजगार, खाद्य-सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और उत्पादक परिसंपत्तियों से जोड़कर लिखें, केवल नकद आय से नहीं।
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