मुख्य तथ्य

  • RSSB CET स्नातक स्तर 2026 में यह विषय भारत की अर्थव्यवस्था के अंतर्गत आता है: बजट-निर्माण, बैंकिंग, लोक वित्त, GST, राष्ट्रीय आय और वृद्धि-विकास की मू...
  • अनुच्छेद 112 के तहत भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का वार्षिक वित्तीय विवरण हर वित्तीय वर्ष के लिए संसद के सामने रखा जाता है।
  • अनुच्छेद 265 कहता है कि कोई कर विधि के प्राधिकार के बिना नहीं लगाया या वसूला जा सकता; इसलिए हर कर का कानूनी आधार जरूरी है।
  • अनुच्छेद 266 और 267 सार्वजनिक धन और सरकारी खातों के लिए संचित निधि, आकस्मिकता निधि और लोक लेखा का ढांचा बताते हैं।
  • अनुच्छेद 280 हर 5वें वर्ष या उससे पहले वित्त आयोग की व्यवस्था करता है, जो कर-बंटवारे और सहायता-अनुदान पर सिफारिश करता है।

मुख्य बिंदु

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    RSSB CET स्नातक स्तर 2026 में यह विषय भारत की अर्थव्यवस्था के अंतर्गत आता है: बजट-निर्माण, बैंकिंग, लोक वित्त, GST, राष्ट्रीय आय और वृद्धि-विकास की मूल समझ।

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    अनुच्छेद 112 के तहत भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का वार्षिक वित्तीय विवरण हर वित्तीय वर्ष के लिए संसद के सामने रखा जाता है।

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    अनुच्छेद 265 कहता है कि कोई कर विधि के प्राधिकार के बिना नहीं लगाया या वसूला जा सकता; इसलिए हर कर का कानूनी आधार जरूरी है।

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    अनुच्छेद 266 और 267 सार्वजनिक धन और सरकारी खातों के लिए संचित निधि, आकस्मिकता निधि और लोक लेखा का ढांचा बताते हैं।

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    अनुच्छेद 280 हर 5वें वर्ष या उससे पहले वित्त आयोग की व्यवस्था करता है, जो कर-बंटवारे और सहायता-अनुदान पर सिफारिश करता है।

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    पहला वित्त आयोग नवंबर 1951 में के. सी. नियोगी की अध्यक्षता में गठित हुआ था।

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    राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 राजकोषीय उत्तरदायित्व, राजकोषीय नीति विवरणों और मध्यम-अवधि राजकोषीय प्रबंधन का वैधानिक ढांचा देता है।

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    अनुच्छेद 279A ने GST परिषद बनाई; GST 1 जुलाई 2017 से इनपुट कर श्रेय वाली केंद्र-राज्य अप्रत्यक्ष कर-व्यवस्था के रूप में लागू हुआ।

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    15वें वित्त आयोग ने 2021-26 के लिए राज्यों को 41% कर-वितरण की सिफारिश की और आय-दूरी, आबादी, क्षेत्रफल, वन व पारिस्थितिकी, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन और कर-प्रयास जैसे मानक रखे।

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    16वां वित्त आयोग 31 दिसंबर 2023 को डॉ. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में गठित हुआ, जिसकी सिफारिशें 1 अप्रैल 2026 से शुरू अवधि के लिए हैं।

पाठ्यक्रम दायरा और लोक वित्त की रूपरेखा

2026 CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह विषय भारत की अर्थव्यवस्था के भीतर आता है। पाठ्यक्रम की पंक्ति का आशय है: “बजट-निर्माण, बैंकिंग, लोक वित्त, वस्तु एवं सेवा कर, राष्ट्रीय आय तथा वृद्धि और विकास की बुनियादी जानकारी।” यानी यह पाठ किसी एक साल के केंद्रीय बजट की समसामयिक सूची नहीं बनेगा; इसका काम प्राप्ति, व्यय, कर, GST संस्थाओं और राजकोषीय नीति की स्थायी समझ बनाना है।

लोक वित्त सरकार की आय, खर्च और उधारी का अध्ययन है। निजी बजट में आय, बचत और लाभ प्रमुख हो सकते हैं, लेकिन सरकार के बजट में सार्वजनिक सेवाएं, कल्याण, अवसंरचना, सुरक्षा, स्थिरता और पुनर्वितरण भी साथ चलते हैं। इसलिए लोक वित्त अर्थशास्त्र, कानून और संसद से जुड़ा विषय है: कर के लिए कानूनी अधिकार चाहिए, खर्च के लिए विधायी स्वीकृति चाहिए और उधारी भविष्य में चुकानी पड़ती है।

CET के लिए क्रम ऐसे रखें: बजट और सरकारी खाते, राजस्व-पूंजी वर्गीकरण, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, GST, घाटा और ऋण, वित्त आयोग के अंतरण और राजकोषीय नीति। अच्छे अंक एक वर्ष की बजट संख्या रटने से नहीं, मिलते-जुलते शब्दों का सही फर्क समझने से मिलेंगे।

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