मुख्य तथ्य

  • 1 अप्रैल 1935 को RBI ने RBI अधिनियम, 1934 के तहत काम शुरू किया;
  • 1 जनवरी 1949 को RBI का राष्ट्रीयकरण भारतीय रिजर्व बैंक (सार्वजनिक स्वामित्व में अंतरण) अधिनियम, 1948 के आधार पर हुआ;
  • 16 मार्च 1949 को बैंकिंग कंपनी अधिनियम, 1949 लागू हुआ, जो बाद में बैंकिंग विनियमन अधिनियम बना;
  • 19 जुलाई 1969 को 14 प्रमुख भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ;
  • 15 अप्रैल 1980 को बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और अंतरण) अधिनियम, 1980 के तहत 6 और निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    1 अप्रैल 1935 को RBI ने RBI अधिनियम, 1934 के तहत काम शुरू किया; यही भारत की केंद्रीय बैंकिंग, मुद्रा, ऋण और सार्वजनिक ऋण-प्रबंधन व्यवस्था का संस्थागत आधार बना।

  2. 2

    1 जनवरी 1949 को RBI का राष्ट्रीयकरण भारतीय रिजर्व बैंक (सार्वजनिक स्वामित्व में अंतरण) अधिनियम, 1948 के आधार पर हुआ; इससे केंद्रीय बैंक पूरी तरह भारत सरकार के स्वामित्व में आ गया।

  3. 3

    16 मार्च 1949 को बैंकिंग कंपनी अधिनियम, 1949 लागू हुआ, जो बाद में बैंकिंग विनियमन अधिनियम बना; यह बैंकों के RBI पर्यवेक्षण और नियमन का वैधानिक आधार है।

  4. 4

    19 जुलाई 1969 को 14 प्रमुख भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ; इससे सार्वजनिक क्षेत्र बैंकिंग का विस्तार हुआ और ऋण-प्रवाह विकास जरूरतों की ओर मुड़ा।

  5. 5

    15 अप्रैल 1980 को बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और अंतरण) अधिनियम, 1980 के तहत 6 और निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ।

  6. 6

    भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 ने भुगतान प्रणालियों के नियमन और पर्यवेक्षण में RBI को वैधानिक अधिकार दिया और नेटिंग तथा निपटान की अंतिमता को कानूनी आधार दिया।

  7. 7

    2016 में RBI अधिनियम की धारा 45ZB के तहत वैधानिक मौद्रिक नीति समिति का ढांचा बना; रेपो दर का निर्णय 6 सदस्यीय मतदान ढांचे से जुड़ गया।

  8. 8

    25 मार्च 2026 की अधिसूचना से मार्च 2031 तक CPI मुद्रास्फीति लक्ष्य 4% और सहनशीलता पट्टी +/-2 प्रतिशत अंक बरकरार रखी गई, जिससे लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण जारी रहा।

  9. 9

    11 अप्रैल 2016 को NPCI का UPI पायलट शुरू हुआ; इससे बैंक खाते से बैंक खाते तक मोबाइल भुगतान भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का बड़ा हिस्सा बना।

मुद्रा का अर्थ और भूमिका

मुद्रा केवल नोट और सिक्के नहीं है। अर्थव्यवस्था में मुद्रा वह साधन है जिससे वस्तुओं और सेवाओं का भुगतान, मूल्य की तुलना, बचत का संचय और भविष्य के दायित्वों का निपटान किया जाता है। CET स्नातक स्तर पर मुद्रा को चार कार्यों से समझना उपयोगी है: विनिमय का माध्यम, मूल्य-मापन की इकाई, मूल्य-संचय का साधन और स्थगित भुगतान का मानक। यदि मजदूरी, किराया, ऋण, कर और वस्तुओं की कीमत एक सामान्य इकाई में व्यक्त न हों, तो बाजार लेनदेन कठिन हो जाता है और विनिमय वस्तु-विनिमय तथा जरूरतों के दोहरे संयोग पर निर्भर रह जाता है।

आधुनिक मुद्रा के दो बड़े रूप समझें। पहला, जनता के पास मौजूद नकदी, जिसकी व्यवस्था मौद्रिक प्राधिकरण करता है। दूसरा, बैंक जमा, जो बैंकिंग प्रणाली के जरिए बनते हैं: लोग धन जमा करते हैं और बैंक उसका एक हिस्सा ऋण के रूप में आगे देते हैं। बैंक खाते का डिजिटल बैलेंस, UPI से जुड़ा खाता या कार्ड कोई अलग निजी मुद्रा नहीं है; ये बैंक मुद्रा को स्थानांतरित करने के तरीके हैं। RBI का काम रुपये में भरोसा बनाए रखना है, इसलिए वह नोट निर्गम, नकदी आपूर्ति, बैंकिंग तरलता, भुगतान प्रणाली और व्यापक ऋण-पर्यावरण से जुड़ा रहता है।

मुख्य समझ यह रखें: मुद्रा रोजमर्रा के भुगतान का साधन भी है और व्यापक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला चर भी। इसकी उपलब्धता और लागत कीमतों, मांग, ऋण, बचत और निवेश को प्रभावित करती है।

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