मुख्य तथ्य

  • राष्ट्रीय आय और वृद्धि के प्रश्नों में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद, नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद, सकल राष्ट्रीय आय, शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद, प्रति व्यक्ति आ...
  • बजट-निर्माण, लोक वित्त, वस्तु एवं सेवा कर और घाटे की अवधारणाएँ संवैधानिक निधियों, राजस्व-पूंजी वर्गीकरण, राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और प्राथमिक घाटा स...
  • बैंकिंग की बुनियाद में जमा, ऋण-सृजन, भारतीय रिज़र्व बैंक के काम, अनुसूचित बैंक, नकद आरक्षित अनुपात, वैधानिक तरलता अनुपात, रेपो व्यवस्था, गैर-निष्पादित...
  • राजकोषीय नीति कर, उधार और खर्च से काम करती है; मौद्रिक नीति मुख्यतः भारतीय रिज़र्व बैंक के तरलता, ब्याज-दर और महँगाई-नियंत्रण साधनों से काम करती है।
  • सब्सिडी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली लोक वित्त को खाद्य सुरक्षा, कल्याण-लक्ष्यीकरण, राजकोषीय बोझ और रिसाव-नियंत्रण से जोड़ती है।

मुख्य बिंदु

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    राष्ट्रीय आय और वृद्धि के प्रश्नों में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद, नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद, सकल राष्ट्रीय आय, शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद, प्रति व्यक्ति आय, सकल मूल्य वर्धन, स्थिर पूंजी निर्माण और उत्पादकता का साफ फर्क जरूरी है।

  2. 2

    बजट-निर्माण, लोक वित्त, वस्तु एवं सेवा कर और घाटे की अवधारणाएँ संवैधानिक निधियों, राजस्व-पूंजी वर्गीकरण, राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और प्राथमिक घाटा से पढ़नी चाहिए।

  3. 3

    बैंकिंग की बुनियाद में जमा, ऋण-सृजन, भारतीय रिज़र्व बैंक के काम, अनुसूचित बैंक, नकद आरक्षित अनुपात, वैधानिक तरलता अनुपात, रेपो व्यवस्था, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ, जमा बीमा और वित्तीय समावेशन आते हैं।

  4. 4

    राजकोषीय नीति कर, उधार और खर्च से काम करती है; मौद्रिक नीति मुख्यतः भारतीय रिज़र्व बैंक के तरलता, ब्याज-दर और महँगाई-नियंत्रण साधनों से काम करती है।

  5. 5

    सब्सिडी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली लोक वित्त को खाद्य सुरक्षा, कल्याण-लक्ष्यीकरण, राजकोषीय बोझ और रिसाव-नियंत्रण से जोड़ती है।

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    ऑनलाइन वाणिज्य नई अर्थव्यवस्था का हिस्सा है: डिजिटल बाजार, एकीकृत भुगतान, माल-पहुँच व्यवस्था, डेटा सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण और छोटे विक्रेताओं की पहुँच परीक्षा में महत्त्वपूर्ण हैं।

  7. 7

    कृषि, उद्योग, सेवाएँ और व्यापार केवल क्षेत्र-नाम नहीं हैं; उनकी वर्तमान स्थिति, समस्याएँ और सरकारी पहल भी साथ पढ़नी चाहिए।

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    हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और नीली क्रांति क्रमशः खाद्यान्न, दूध और मत्स्य/जलीय कृषि के उत्पादन-परिवर्तन के आधार-बिंदु हैं।

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    पंचवर्षीय योजनाएँ, योजना आयोग और नीति आयोग केंद्रीकृत योजना-आवंटन से सहकारी संघवाद और परिणाम-आधारित नीति-सहायता की ओर बदलाव दिखाते हैं।

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    1991 के बाद आर्थिक सुधार और उदारीकरण, साथ में गरीबी, बेरोजगारी, महँगाई, असमानता, क्षेत्रीय असंतुलन और टिकाऊपन, भारत की प्रमुख आर्थिक समस्याओं और नीति-उत्तर का ढाँचा बनाते हैं।

वृद्धि मापन और अर्थव्यवस्था की रैंक

आर्थिक वृद्धि की शुरुआत उत्पादन-मापन से होती है, नारे से नहीं। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद कीमतों के बदलाव को हटाकर बताता है कि उत्पादन सच में बढ़ा या नहीं; नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद उत्पादन और कीमत, दोनों को लेकर वैश्विक आकार की तुलना में काम आता है। सकल राष्ट्रीय आय विदेश से शुद्ध कारक आय जोड़ती या घटाती है, जबकि शुद्ध राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय कल्याण-क्षमता समझाते हैं। इसलिए रैंक बताते समय आधार स्पष्ट होना चाहिए: नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद पर भारत का पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होना डॉलर-आधारित नाममात्र रैंक है, जबकि क्रय-शक्ति समता में भारत पहले से ऊपर रहा है। रैंक के प्रश्नों में मुद्रा की समझ भी जरूरी है। घरेलू उत्पादन में रुपये की वृद्धि डॉलर में बदलते समय अलग दिख सकती है, क्योंकि विनिमय दर वैश्विक तुलना बदल देती है। क्रय-शक्ति समता घरेलू खरीद-क्षमता को मूल्य देकर दूसरा दृष्टिकोण देती है। इसलिए आकार, जीवन-स्तर और कल्याण की रैंक अलग-अलग गति से चलती हैं।

केंद्रीय बजट 2023-24 के बजट भाषण में कहा गया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था नौ वर्षों में 10वें से 5वें स्थान पर पहुँची और प्रति व्यक्ति आय 1.97 लाख रुपये से अधिक हो गई। इसका अर्थ यह नहीं कि हर परिवार पाँचवें स्थान जितना समृद्ध है; अर्थ यह है कि बाजार-मूल्य पर कुल उत्पादन उस रैंक तक पहुँचा। PIB की बाद की समसामयिक सामग्री ने 2025 में भारत को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताया। ऐसी रैंक हमेशा तारीख और स्रोत के साथ पढ़नी चाहिए, क्योंकि विनिमय दर, घरेलू महँगाई और अन्य अर्थव्यवस्थाओं की सापेक्ष वृद्धि डॉलर-आधारित रैंक बदल सकती है।

राजस्थान इस रैंक को राज्य-स्तर पर ठोस बनाता है। राजस्थान का भड़ला सौर पार्क 2,245 MW की कुल क्षमता के साथ उत्पादन, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में योगदान देता है। राजस्थान का यही उत्पादन भारत के सकल घरेलू उत्पाद में भी गिना जाता है, इसलिए राष्ट्रीय रैंक का प्रश्न राजस्थान के सौर पार्क, सीमेंट पट्टी और सेवा गतिविधि से भी जुड़ता है।

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