मुख्य तथ्य

  • 22 दिसंबर 1949 को राजस्थान लोक सेवा आयोग अस्तित्व में आया; अनुच्छेद 315 के तहत यह राज्य सेवाओं की भर्ती से जुड़ा संवैधानिक निकाय है और इसका वर्तमान मु...
  • 1992-93 के 73वें और 74वें संविधान संशोधनों ने पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों, राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य वित्त आयोग को आधुनिक संवैधानिक आधार दिया...
  • जुलाई 1994 में राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243ट के तहत गठित हुआ;
  • राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत शिकायत, जांच और सिफारिश से जुड़ा राज्य-स्तरीय निकाय है।
  • 18 अप्रैल 2006 को राजस्थान सूचना आयोग गठित हुआ; सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत यह द्वितीय अपील और शिकायतों पर निर्णय देता है।

मुख्य बिंदु

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    22 दिसंबर 1949 को राजस्थान लोक सेवा आयोग अस्तित्व में आया; अनुच्छेद 315 के तहत यह राज्य सेवाओं की भर्ती से जुड़ा संवैधानिक निकाय है और इसका वर्तमान मुख्यालय अजमेर में है।

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    1992-93 के 73वें और 74वें संविधान संशोधनों ने पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों, राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य वित्त आयोग को आधुनिक संवैधानिक आधार दिया।

  3. 3

    जुलाई 1994 में राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243ट के तहत गठित हुआ; अनुच्छेद 243यक नगर निकायों के चुनावों को इसी चुनाव-नियंत्रण ढांचे से जोड़ता है।

  4. 4

    राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत शिकायत, जांच और सिफारिश से जुड़ा राज्य-स्तरीय निकाय है।

  5. 5

    18 अप्रैल 2006 को राजस्थान सूचना आयोग गठित हुआ; सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत यह द्वितीय अपील और शिकायतों पर निर्णय देता है।

  6. 6

    1973 के राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम ने राज्य में लोकायुक्त संस्था बनाई; यह लोक पदाधिकारियों से जुड़ी निर्धारित शिकायतों की वैधानिक जांच का मार्ग देता है।

  7. 7

    14 नवंबर 2011 से राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी नियम लागू हुए; अधिसूचित सेवाओं में समयसीमा, अपील और देरी पर दंड का ढांचा इससे जुड़ता है।

  8. 8

    जिला प्रशासन से जुड़े वर्तमान प्रश्नों में राजस्थान के 41 जिलों और 7 संभागों का ढांचा पढ़ें, जब तक प्रश्न खास तौर पर 2023 वाले पुनर्गठन चरण के बारे में न पूछे।

  9. 9

    राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा अनुच्छेद 164(1क) के लिए महत्वपूर्ण है: मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद विधानसभा की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती, इसलिए सीमा 30 है।

  10. 10

    परीक्षा में स्रोत और काम अलग रखें: राज्यपाल-मुख्यमंत्री-मंत्रिपरिषद कार्यपालिका की कड़ी हैं, विधानसभा राज्य कानून बनाती है, उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायालय है और जिला प्रशासन शासन को मैदान में लागू करता है।

राजस्थान शासन की संस्थागत रूपरेखा

राजस्थान की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को एक जुड़ी हुई कड़ी की तरह पढ़ना चाहिए। ऊपर राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं, जबकि रोजमर्रा की वास्तविक कार्यपालिका मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के माध्यम से चलती है। राज्य सचिवालय, विभाग और निदेशालय मंत्रिमंडल के निर्णयों तथा नियमों को प्रशासनिक काम में बदलते हैं। राजस्थान विधानसभा राज्य के कानून बनाती है, प्रश्नों और बहसों के जरिए कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है और वही प्रतिनिधिक आधार देती है जिसके प्रति मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। राजस्थान उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायालय है और अपने संवैधानिक अधिकार-क्षेत्र में न्यायिक व्यवस्था की देखरेख करता है।

दूसरी परत आयोगों और निकायों की है। राजस्थान लोक सेवा आयोग भर्ती और सेवा-परामर्श से जुड़ता है; राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराता है; राज्य वित्त आयोग स्थानीय निकायों के वित्तीय बंटवारे पर सिफारिश देता है; राज्य मानवाधिकार आयोग, सूचना आयोग और लोकायुक्त अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े काम अपनी कानूनी सीमा में करते हैं। इन्हें सामान्य विभाग, अदालत या कल्याण निदेशालय मान लेना गलती है।

तीसरी परत मैदान की है। जिला प्रशासन, स्थानीय स्वशासन और पंचायती राज संस्थाएं कानून, योजनाओं और सेवाओं को रिकॉर्ड, प्रमाणपत्र, राहत, चुनाव, कानून-व्यवस्था सहयोग और स्थानीय विकास में बदलती हैं। मुख्य तरीका यही रखें: संस्था का स्रोत, काम और स्तर पहचानें।

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