संघ और राज्य की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका; संवैधानिक और सांविधिक संस्थाएँ
मुख्य तथ्य
- 2026 CET ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम में यह टॉपिक राजस्थान के विशेष संदर्भ में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के भीतर आता है।
- अनुच्छेद 52 भारत के राष्ट्रपति का पद बनाता है, अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में रखता है और अनुच्छेद 74 इस पद को प्रधानमंत्री-प्रधान...
- अनुच्छेद 75(3) संघीय मंत्रिपरिषद को लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है, इसलिए केंद्र सरकार का टिकना लोकसभा के विश्वास पर निर्भर करता है...
- अनुच्छेद 79 के अनुसार संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर बनती है;
- अनुच्छेद 153 राज्यपाल का पद देता है और अनुच्छेद 163 मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य मंत्रिपरिषद का आधार है;
मुख्य बिंदु
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2026 CET ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम में यह टॉपिक राजस्थान के विशेष संदर्भ में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के भीतर आता है। इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, संसद, सर्वोच्च न्यायालय, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य विधान सभा, उच्च न्यायालय, जिला प्रशासन और प्रमुख संस्थाएँ शामिल हैं।
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अनुच्छेद 52 भारत के राष्ट्रपति का पद बनाता है, अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में रखता है और अनुच्छेद 74 इस पद को प्रधानमंत्री-प्रधान मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से जोड़ता है।
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अनुच्छेद 75(3) संघीय मंत्रिपरिषद को लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है, इसलिए केंद्र सरकार का टिकना लोकसभा के विश्वास पर निर्भर करता है।
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अनुच्छेद 79 के अनुसार संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर बनती है; धन विधेयक अनुच्छेद 110 के तहत आता है और उस पर राज्यसभा केवल सिफारिशें कर सकती है।
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अनुच्छेद 153 राज्यपाल का पद देता है और अनुच्छेद 163 मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य मंत्रिपरिषद का आधार है; राजस्थान में यह ढांचा एकसदनीय विधान सभा के साथ चलता है।
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राजस्थान विधान सभा जयपुर में बैठती है और इसमें 200 निर्वाचित सीटें हैं; विधायी नियंत्रण प्रश्नों, बहस, समितियों, बजट मतदान और अविश्वास प्रस्ताव से चलता है।
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राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को हुआ, इसका मुख्य पीठ जोधपुर में है और अनुच्छेद 226 के तहत इसे रिट अधिकारिता मिलती है।
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73वें और 74वें संविधान संशोधनों ने पंचायतों और नगरपालिकाओं का संवैधानिक ढांचा बनाया; राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार आयोग जुलाई 1994 में अनुच्छेद 243K के तहत गठित हुआ।
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भारत निर्वाचन आयोग, CAG, वित्त आयोग, लोक सेवा आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग संवैधानिक संस्थाएँ हैं; लोकपाल, सूचना आयोग, मानवाधिकार आयोग और लोकायुक्त सांविधिक संस्थाएँ हैं, जबकि नीति आयोग कार्यपालिका से बनी नीति संस्था है।
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परीक्षा में पहले संस्था का स्रोत पहचानें: संविधान, कानून, कार्यपालिका का प्रस्ताव या सामान्य प्रशासन; अधिकतर भ्रम इन्हीं श्रेणियों को मिलाने से बनता है।
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संघीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
संघीय कार्यपालिका को राष्ट्रपति के संवैधानिक पद और प्रधानमंत्री-प्रधान मंत्रिपरिषद की वास्तविक जवाबदेही के साथ पढ़ना चाहिए। अनुच्छेद 52 कहता है कि भारत में एक राष्ट्रपति होगा और अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में रखता है। इसका अर्थ राष्ट्रपति का व्यक्तिगत शासन नहीं है। भारत में संसदीय व्यवस्था है: शक्ति औपचारिक रूप से राष्ट्रपति में होती है, लेकिन सामान्य नीति और प्रशासन उन मंत्रियों के माध्यम से चलते हैं जो संसद के प्रति जवाबदेह हैं।
अनुच्छेद 54 राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल को बताता है: संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य। इस चुनाव में दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी शामिल होते हैं। मनोनीत सदस्य इस निर्वाचक मंडल का हिस्सा नहीं होते। अनुच्छेद 55 मत-मूल्य की ऐसी पद्धति देता है जिससे राज्यों के बीच एकरूपता और संघ-राज्य संतुलन रखा जा सके।
अनुच्छेद 60 राष्ट्रपति को संविधान और कानून की रक्षा, संरक्षण और प्रतिरक्षा की शपथ से जोड़ता है। अनुच्छेद 61 संविधान के उल्लंघन पर महाभियोग का प्रावधान देता है। अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को कुछ मामलों में क्षमा, दंड-स्थगन, राहत, दंड-परिहार या दंड-परिवर्तन की शक्ति देता है, जिनमें मृत्युदंड और संघीय कानून से जुड़े अपराध शामिल हैं। अनुच्छेद 123 दोनों सदनों के सत्र में न होने और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता होने पर अध्यादेश की अनुमति देता है, पर बाद में वह संसदीय नियंत्रण के सामने आता है।
अनुच्छेद 74 प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद को राष्ट्रपति की सहायता और सलाह का आधार बनाता है। 44वें संशोधन के बाद राष्ट्रपति सलाह पर एक बार पुनर्विचार मांग सकता है; पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह बाध्यकारी रहती है। अनुच्छेद 75 नियुक्ति और जवाबदेही का ढांचा देता है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर होती है। अनुच्छेद 75(3) परीक्षा की मुख्य बात है: मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है। लोकसभा का विश्वास खो देने वाली सरकार सामान्य रूप से जारी नहीं रह सकती।
अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री को मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपति के बीच सूचना-सेतु बनाता है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के निर्णय राष्ट्रपति को बताता है, मांगी गई सूचना देता है और आवश्यक मामलों को मंत्रिपरिषद के सामने रखता है। CET के लिए बुनियादी विभाजन याद रखें: औपचारिक अधिकार राष्ट्रपति में है; राजनीतिक जवाबदेही प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद पर है; सरकार का टिकना लोकसभा के विश्वास पर निर्भर है।
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