मुख्य तथ्य

  • केवल स्नातक स्तर 2026 के राजस्थान भूगोल दायरे का उपयोग करें: प्राकृतिक संसाधन, फसलें, खनिज, सिंचाई और वन्यजीव राजस्थान भूगोल के भीतर आते हैं।
  • राजस्थान में 10 कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं; ऋतु, मिट्टी और जल-स्रोत तय करते हैं कि कोई फसल किस क्षेत्र में स्वाभाविक है।
  • 2023-24 में राजस्थान बाजरा, रेपसीड और सरसों, कुल तिलहन, मोटे अनाज और ग्वार उत्पादन में पहले स्थान पर था, लेकिन रैंक को फसल-पट्टी से जोड़ना जरूरी है।
  • ISFR 2023 राजस्थान का वनावरण 16,548.21 वर्ग किमी और झाड़ी क्षेत्र अलग से 5,476.75 वर्ग किमी दर्ज करता है;
  • राजस्थान खनिज नीति 2024 में 22 मुख्य और 36 लघु खनिज दर्ज हैं तथा सीसा, जस्ता, वोलास्टोनाइट, सेलेनाइट, कैल्साइट और जिप्सम के लिए एकमात्र उत्पादक स्थिति...

मुख्य बिंदु

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    केवल स्नातक स्तर 2026 के राजस्थान भूगोल दायरे का उपयोग करें: प्राकृतिक संसाधन, फसलें, खनिज, सिंचाई और वन्यजीव राजस्थान भूगोल के भीतर आते हैं।

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    राजस्थान में 10 कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं; ऋतु, मिट्टी और जल-स्रोत तय करते हैं कि कोई फसल किस क्षेत्र में स्वाभाविक है।

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    2023-24 में राजस्थान बाजरा, रेपसीड और सरसों, कुल तिलहन, मोटे अनाज और ग्वार उत्पादन में पहले स्थान पर था, लेकिन रैंक को फसल-पट्टी से जोड़ना जरूरी है।

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    ISFR 2023 राजस्थान का वनावरण 16,548.21 वर्ग किमी और झाड़ी क्षेत्र अलग से 5,476.75 वर्ग किमी दर्ज करता है; वनावरण, वृक्षावरण और झाड़ी क्षेत्र को न मिलाएं।

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    राजस्थान खनिज नीति 2024 में 22 मुख्य और 36 लघु खनिज दर्ज हैं तथा सीसा, जस्ता, वोलास्टोनाइट, सेलेनाइट, कैल्साइट और जिप्सम के लिए एकमात्र उत्पादक स्थिति दी गई है।

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    सिंचाई उत्तरों में परियोजनाओं को बेसिन और काम से अलग करें: IGNP, चंबल, माही, नर्मदा, बीसलपुर, परवन और लिफ्ट योजनाएं एक-दूसरे के बदले नहीं लिखे जा सकते।

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    वन्यजीव उत्तरों में संरक्षित क्षेत्र, जिला, आवास और मुख्य प्रजाति साथ लिखें: बाघ, आर्द्रभूमि पक्षी, गोडावण, काला हिरण और घड़ियाल अलग आवास मांगते हैं।

पाठ्यक्रम ढांचा: राजस्थान के प्राकृतिक संसाधन

यह विषय स्नातक स्तर के राजस्थान भूगोल खंड में आता है। 2026 के मौजूदा पाठ्यक्रम में भूगर्भिक संरचना और भौतिक प्रदेश, जलवायु दशाएं और क्षेत्र, अपवाह तंत्र, झीलें, तालाब, बांध और जल-संरक्षण विधियां, प्राकृतिक वनस्पति, वन्यजीव और अभयारण्य, मिट्टियां, प्रमुख रबी और खरीफ फसलें, जनसंख्या, प्रमुख जनजातियां, धात्विक और अधात्विक खनिज, नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा संसाधन, पर्यटन और परिवहन मांगे गए हैं। इस फ़ाइल का सीधा दायरा प्राकृतिक संसाधन, कृषि, खनिज, सिंचाई परियोजनाएं और वन्यजीव है। CET में मजबूत उत्तर राजस्थान को केवल रेगिस्तान मानकर नहीं लिखता; वह धरातल, वर्षा, मिट्टी, जल-स्रोत, वनस्पति, फसल-ऋतु, खनिज-पट्टी और संरक्षित क्षेत्र को जोड़ता है। सबसे सुरक्षित तरीका मानचित्र-तर्क है: पश्चिमी राजस्थान में शुष्क-अर्धशुष्क दशाएं, आंतरिक जलनिकास, बालू-टीले, खारी अवसाद और सूखा-सहिष्णु खेती प्रमुख हैं; अरावली और दक्षिण-पूर्वी पट्टी पुराने शैलों, खनिजीकरण, बेहतर जल वाली घाटियों और अधिक वन-खंड जोड़ती है; चंबल, बनास, माही, लूणी और नहर प्रणालियां अलग-अलग जल भूगोल बनाती हैं। यही ढांचा दो सामान्य गलतियों से बचाता है: राजस्थान की जगह भारत-स्तर के कृषि तथ्य लिखना, और परियोजना या अभयारण्य का नाम जिला तथा आवास से जोड़े बिना याद करना।

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