मुख्य तथ्य

  • राजस्थान का क्षेत्रफल 342,239 वर्ग किमी है; अरावली इसके आर्द्र पूर्व-दक्षिण-पूर्व और शुष्क पश्चिम के बीच मुख्य भौतिक विभाजक की तरह काम करती है।
  • गुरु शिखर 1,722 मीटर ऊंचा है और राजस्थान के साथ-साथ अरावली तंत्र का सर्वोच्च बिंदु माना जाता है।
  • लूनी अजमेर के पास से निकलकर राजस्थान में लगभग 495 किमी दक्षिण-पश्चिम बहती है, बालोतरा के बाद अधिक लवणीय होती जाती है और कच्छ के रण की ओर कमजोर पड़ती ह...
  • सांभर झील 23 मार्च 1990 को नामित 24,000 हेक्टेयर का रामसर स्थल है; राजस्थान की वर्तमान रामसर सूची में केवलादेव, मेनार, खीचन और सिलिसेढ़ भी आते हैं।

मुख्य बिंदु

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    राजस्थान का क्षेत्रफल 342,239 वर्ग किमी है; अरावली इसके आर्द्र पूर्व-दक्षिण-पूर्व और शुष्क पश्चिम के बीच मुख्य भौतिक विभाजक की तरह काम करती है।

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    अरावली-दिल्ली वलित पट्टी, दक्षिण-पूर्व का विंध्यन पठार, पश्चिमी मरुस्थलीय बेसिन और स्थानीय आग्नेय-रूपांतरित चट्टानें मिलकर उच्चावच, खनिज, मिट्टी और अपवाह को प्रभावित करती हैं।

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    गुरु शिखर 1,722 मीटर ऊंचा है और राजस्थान के साथ-साथ अरावली तंत्र का सर्वोच्च बिंदु माना जाता है।

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    चंबल मध्य प्रदेश में मऊ के पास विंध्यन श्रेणियों से निकलती है और राजस्थान में बारहमासी प्रवाह, बीहड़ और बांध-शृंखला का प्रमुख संदर्भ देती है।

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    बनास राजसमंद जिले में कुंभलगढ़ के पास खमनोर पहाड़ियों से निकलती है और पूरी लंबाई राजस्थान में बहकर रामेश्वर के पास चंबल से मिलती है।

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    लूनी अजमेर के पास से निकलकर राजस्थान में लगभग 495 किमी दक्षिण-पश्चिम बहती है, बालोतरा के बाद अधिक लवणीय होती जाती है और कच्छ के रण की ओर कमजोर पड़ती है।

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    सांभर झील 23 मार्च 1990 को नामित 24,000 हेक्टेयर का रामसर स्थल है; राजस्थान की वर्तमान रामसर सूची में केवलादेव, मेनार, खीचन और सिलिसेढ़ भी आते हैं।

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    जल-संरक्षण में जोहड़, टांका, खडीन, बावड़ी, नाड़ी और तालाब जैसे पारंपरिक उपायों को बांध, नहर, जलागम विकास और वर्षाजल-संग्रह के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए।

भौतिक विभाग और भूगर्भीय आधार

राजस्थान की भौतिक बनावट को चार बड़े क्षेत्रों में समझना उपयोगी है: पश्चिमी बालुई मैदान, अरावली पर्वतीय क्षेत्र, पूर्वी मैदान और दक्षिण-पूर्वी हाड़ौती पठार। राज्य का क्षेत्रफल 342,239 वर्ग किमी है, इसलिए एक ही राज्य में गर्म मरुस्थल, पुरानी पहाड़ियां, जलोढ़ मैदान, काली मिट्टी वाला पठार, लवणीय अवसाद और मीठे पानी की झीलें मिलती हैं। पश्चिमी बालुई मैदान जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू और नागौर जैसे जिलों में फैला शुष्क क्षेत्र है, जहां बालू के टीले, प्लाया झीलें, कम वर्षा और विरल वनस्पति प्रमुख संकेत हैं।

भूगर्भीय बनावट को अलग से याद करना जरूरी है। अरावली-दिल्ली वलित पट्टी बहुत पुरानी और क्षरित पर्वतीय पट्टी है, जिसमें रूपांतरित और अवसादी चट्टानें मिलती हैं। इसी से पर्वत-श्रृंखलाएं, दर्रे, खनिज क्षेत्र और छोटे जलागम बनते हैं। दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के आसपास विंध्यन पठारी ढांचा दिखता है, जबकि पश्चिमी मरुस्थल में हवा से आई रेत, जलोढ़ निक्षेप, प्लाया बेसिन और दबी हुई पुरानी चट्टानें मिलकर भू-आकृति बनाते हैं। पश्चिमी राजस्थान में मालानी आग्नेय चट्टानें और स्थानीय चट्टानी समूह खनिज, निर्माण-पत्थर, भूजल और उच्चावच से जुड़ते हैं।

अरावली शृंखला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में राज्य की रीढ़ जैसी है। माउंट आबू और 1,722 मीटर ऊंचा गुरु शिखर इसी तंत्र से जुड़े हैं। पूर्वी मैदान बनास, बाणगंगा, गंभीरी और चंबल से जुड़े जलोढ़ या अर्द्ध-जलोढ़ क्षेत्रों का समूह है, इसलिए यहां कृषि और बसावट की सघनता पश्चिम से अधिक मिलती है। दक्षिण-पूर्वी पठार को हाड़ौती क्षेत्र कहा जाता है; कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ में चंबल और उसकी सहायक नदियां घाटियां, बीहड़ और सिंचाई तंत्र बनाती हैं।

सार: राजस्थान को याद करने का पहला सूत्र है कि भूगर्भीय ढांचा, पश्चिम का मरुस्थल, बीच की अरावली, पूर्व के मैदान और दक्षिण-पूर्व का पठार मिलकर राज्य का भौतिक नक्शा बनाते हैं।

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