भारत का भूगोल: जनसंख्या संकेतक, वन्यजीव, आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन
मुख्य तथ्य
- स्नातक स्तर की CET के आधिकारिक पाठ्यक्रम में भारत की जनसंख्या को चार संकेतकों से पढ़ना है: वृद्धि, घनत्व, साक्षरता और लिंगानुपात।
- जनसंख्या वृद्धि समय के साथ संख्या में बदलाव बताती है; घनत्व प्रति इकाई क्षेत्र में लोगों की संख्या दिखाता है और समझाता है कि मैदान, तट और शहर मरुस्थल,...
- साक्षरता और लिंगानुपात सामाजिक संकेतक हैं: साक्षरता शिक्षा की पहुंच दिखाती है, जबकि लिंगानुपात जनसंख्या में महिलाओं और पुरुषों का संतुलन बताता है।
- वन्यजीव और अभयारण्य में प्राकृतिक आवास, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, कंजर्वेशन रिजर्व और कम्युनिटी रिजर्व आते हैं;
- आपदा जोखिम तब बनता है जब कोई खतरा कमजोर समाज, संपत्ति, आजीविका या व्यवस्था को प्रभावित करता है; शमन और तैयारी घटना से पहले नुकसान घटाते हैं।
मुख्य बिंदु
- 1
स्नातक स्तर की CET के आधिकारिक पाठ्यक्रम में भारत की जनसंख्या को चार संकेतकों से पढ़ना है: वृद्धि, घनत्व, साक्षरता और लिंगानुपात।
- 2
जनसंख्या वृद्धि समय के साथ संख्या में बदलाव बताती है; घनत्व प्रति इकाई क्षेत्र में लोगों की संख्या दिखाता है और समझाता है कि मैदान, तट और शहर मरुस्थल, पर्वत और कठिन भूभाग से अधिक घने क्यों होते हैं।
- 3
साक्षरता और लिंगानुपात सामाजिक संकेतक हैं: साक्षरता शिक्षा की पहुंच दिखाती है, जबकि लिंगानुपात जनसंख्या में महिलाओं और पुरुषों का संतुलन बताता है।
- 4
वन्यजीव और अभयारण्य में प्राकृतिक आवास, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, कंजर्वेशन रिजर्व और कम्युनिटी रिजर्व आते हैं; परीक्षा में कानूनी बारीकियों से अधिक उद्देश्य और प्रमाणित उदाहरण काम आते हैं।
- 5
आपदा जोखिम तब बनता है जब कोई खतरा कमजोर समाज, संपत्ति, आजीविका या व्यवस्था को प्रभावित करता है; शमन और तैयारी घटना से पहले नुकसान घटाते हैं।
- 6
बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप, भूस्खलन और लू भारत में प्रमुख आपदाएं हैं क्योंकि देश में अलग-अलग भू-आकृति, मानसून पर निर्भरता, लंबा तट और सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र हैं।
- 7
जलवायु परिवर्तन भारत में लू, मानसून की अनिश्चितता, हिमनद जोखिम, तटीय खतरे, कृषि और जल-संसाधनों पर दबाव बढ़ा सकता है।
आगे पढ़ें
जनसंख्या संकेतक: वृद्धि, घनत्व, साक्षरता और लिंगानुपात
स्नातक स्तर की CET के पाठ्यक्रम में भारत की जनसंख्या के चार संकेतक साफ लिखे हैं: वृद्धि, घनत्व, साक्षरता और लिंगानुपात। इन्हें अलग-अलग परिभाषा की तरह नहीं, बल्कि क्षेत्रों की तुलना करने वाले जुड़े हुए औजारों की तरह पढ़ें। प्रश्न अक्सर यह पूछता है कि संकेतक का अर्थ क्या है, वह क्या बताता है और भूगोल में उसका उपयोग कैसे होता है।
जनसंख्या वृद्धि का अर्थ किसी समयावधि में लोगों की संख्या का बढ़ना या घटना है। यह मुख्य रूप से जन्म, मृत्यु और प्रवास से प्रभावित होती है, लेकिन इस अध्याय में परीक्षा का केंद्र वृद्धि की धारणा है: जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, धीमी हो रही है या स्थिर हो रही है। जन्म दर अधिक हो, मृत्यु दर घटे और स्वास्थ्य सुविधाएं सुधरें तो वृद्धि बढ़ सकती है। शिक्षा, शहरीकरण, महिलाओं की भागीदारी, देर से विवाह और छोटे परिवार की सोच समय के साथ वृद्धि को धीमा कर सकती है।
जनसंख्या घनत्व का अर्थ प्रति इकाई क्षेत्र, सामान्यतः प्रति वर्ग किलोमीटर, में रहने वाले लोगों की संख्या है। यह तुलना का संकेतक है। कोई छोटा क्षेत्र बहुत घना हो सकता है, जबकि बड़ा मरुस्थलीय, वन या पर्वतीय क्षेत्र कम घना हो सकता है। घनत्व से भूमि, पानी, आवास, परिवहन, स्कूल, अस्पताल और रोजगार पर दबाव समझ में आता है।
साक्षरता का अर्थ समझ के साथ पढ़ने-लिखने की क्षमता है। इसका संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य-जागरूकता, रोजगार, महिलाओं के सशक्तीकरण और सामाजिक विकास से है। जिस क्षेत्र में साक्षरता बेहतर होती है, वहां सूचना और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच सामान्यतः मजबूत होती है, हालांकि केवल साक्षरता से अच्छी शिक्षा या रोजगार अपने आप तय नहीं हो जाते।
लिंगानुपात जनसंख्या में महिलाओं और पुरुषों की तुलना करता है। भारतीय परीक्षाओं में इसे सामान्यतः प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में लिखा जाता है। इससे लैंगिक संतुलन और भेदभाव, स्वास्थ्य पहुंच, प्रवास के असर तथा महिलाओं की स्थिति जैसे सामाजिक प्रश्न समझे जाते हैं। CET के लिए किसी बदलते आंकड़े को रटने से पहले अर्थ और उपयोग साफ रखना जरूरी है।
पूरा नोट खोलें
यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।
7 और खंड पूरे नोट में हैं
स्टडी पैक खोलें