भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधन
मुख्य तथ्य
- पाठ्यक्रम-संगति: यह विषय CET स्नातक 2026 के भारत का भूगोल भाग में प्रमुख खनिज और पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों के अंतर्गत आता है।
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 2015 में COP21 के दौरान भारत-फ्रांस पहल के रूप में शुरू हुआ, और भारत के COP26 पंचामृत ने ऊर्जा संसाधनों को 2030 के गैर-जीवाश्...
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2023 में ₹19,744 करोड़ परिव्यय और 2030 तक सालाना कम से कम 5 MMT हरित हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्य के साथ मंजूर हुआ;
मुख्य बिंदु
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पाठ्यक्रम-संगति: यह विषय CET स्नातक 2026 के भारत का भूगोल भाग में प्रमुख खनिज और पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों के अंतर्गत आता है।
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भारत में खनिज वितरण का आधार भूगर्भ है: प्रायद्वीपीय भारत की प्राचीन कठोर चट्टानी पट्टियाँ कई धात्विक और अधात्विक खनिज देती हैं, जबकि अवसादी बेसिन कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को समझाते हैं।
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छोटानागपुर-ओडिशा क्षेत्र, मध्य भारत पट्टी, कर्नाटक-गोवा पट्टी और राजस्थान-गुजरात पट्टी को अलग-अलग खदानों की सूची नहीं, बल्कि खनिज-औद्योगिक क्षेत्रों की तरह पढ़ना चाहिए।
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राजस्थान इस परीक्षा के लिए उपयोगी उदाहरण है, क्योंकि एक ही राज्य में सीसा-जस्ता, तांबा, रॉक फॉस्फेट, जिप्सम, चूना पत्थर, लिग्नाइट, पेट्रोलियम/प्राकृतिक गैस और सौर क्षमता साथ दिखती है।
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कोयला मुख्यतः गोंडवाना बेसिनों से जुड़ता है; झरिया-रानीगंज-बोकारो-दामोदर, तालचर-ईब वैली, कोरबा, सिंगरौली, वर्धा वैली और सिंगरेनी स्थिर मानचित्र-संदर्भ हैं।
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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस अवसादी बेसिनों के संसाधन हैं: दिग्बोई भारत के शुरुआती तेल इतिहास का संकेत है, मुंबई हाई बड़ा अपतटीय पड़ाव है, और कैंबे, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी तथा बाड़मेर-सांचौर महत्वपूर्ण बेसिन-संबंध हैं।
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रणनीतिक खनिज और परमाणु ऊर्जा का मानचित्र अलग पढ़ें: जादूगोड़ा और तुम्मलापल्ले यूरेनियम संदर्भ हैं, मोनाजाइट-युक्त तटीय रेत थोरियम से जुड़ती है, और NPCIL स्थलों में तारापुर, रावतभाटा, काकरापार, नरौरा, कैगा, कलपक्कम और कुडनकुलम आते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 2015 में COP21 के दौरान भारत-फ्रांस पहल के रूप में शुरू हुआ, और भारत के COP26 पंचामृत ने ऊर्जा संसाधनों को 2030 के गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य तथा 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य से जोड़ा।
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राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2023 में ₹19,744 करोड़ परिव्यय और 2030 तक सालाना कम से कम 5 MMT हरित हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्य के साथ मंजूर हुआ; राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन 2025 में महत्त्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखलाओं के लिए मंजूर हुआ।
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पाठ्यक्रम दायरा और मानचित्र-तर्क
मौजूदा CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह विषय भारत का भूगोल भाग में आता है: प्रमुख खनिज और ऊर्जा संसाधन, जिनमें पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोत शामिल हैं। इसलिए परीक्षा में खनन-इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधन-मानचित्र पूछा जाता है। हर संसाधन को चार कड़ियों से पढ़ें: भूगर्भीय आधार, उत्पादन क्षेत्र, औद्योगिक उपयोग और नीति या पर्यावरण से जुड़ा प्रभाव।
भारत में खनिज वितरण असमान है, क्योंकि भूगर्भीय संरचना असमान है। प्रायद्वीपीय भारत की प्राचीन क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानें कई धात्विक और अधात्विक खनिज देती हैं। इसलिए छोटानागपुर पठार, ओडिशा पठार, पूर्वी और मध्य भारत, कर्नाटक-गोवा पट्टी और अरावली से जुड़ी राजस्थान पट्टी खनिज प्रश्नों में बार-बार आती हैं। इसके विपरीत उत्तरी जलोढ़ मैदान कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं, पर वे मुख्य कठोर-चट्टानी धात्विक खनिज पट्टी नहीं हैं।
दूसरा नियम भंडार संसाधन और प्रवाह संसाधन को अलग करता है। कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और धात्विक खनिज भूगर्भीय समय में बने भंडार संसाधन हैं। सौर, पवन, जलविद्युत और बायोऊर्जा धूप, पवन गलियारों, नदी ढाल, जैवभार और विद्युत ग्रिड व्यवस्था पर अधिक निर्भर करते हैं। CET में अक्सर यही फर्क पूछा जाता है।
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