प्राकृतिक संसाधन, कृषि, उद्योग और परिवहन
मुख्य तथ्य
- भारत की उपयोग योग्य जल उपलब्धता लगभग 1,123 अरब घन मीटर मानी जाती है, जिसमें लगभग 690 अरब घन मीटर सतही जल और 433 अरब घन मीटर पुनर्भरण योग्य भूजल शामिल...
- 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि के तहत पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलुज—का पानी मुख्य रूप से भारत को और पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चि...
- भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारत का वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किमी है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% है;
- स्वर्णिम चतुर्भुज 5,846 किमी लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग जाल है, जो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ता है;
मुख्य बिंदु
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स्नातक स्तर सीईटी पाठ्यक्रम में यह विषय मुख्य रूप से भारत के भूगोल में आता है: प्रमुख नदियां, बांध, झीलें और महासागर; वन्यजीव और अभयारण्य; प्रमुख फसलें; खनिज; ऊर्जा संसाधन; उद्योग और औद्योगिक क्षेत्र; राष्ट्रीय राजमार्ग, परिवहन और व्यापार।
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भारत की उपयोग योग्य जल उपलब्धता लगभग 1,123 अरब घन मीटर मानी जाती है, जिसमें लगभग 690 अरब घन मीटर सतही जल और 433 अरब घन मीटर पुनर्भरण योग्य भूजल शामिल है।
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19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि के तहत पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलुज—का पानी मुख्य रूप से भारत को और पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को दिया गया है; दोनों पक्षों के कुछ तय उपयोग भी मान्य हैं।
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भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारत का वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किमी है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% है; इसे वन्यजीवों के संरक्षित क्षेत्रों के अलग जाल से न मिलाएं।
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कृषि में फसल, मौसम, मिट्टी, वर्षा या सिंचाई, क्षेत्र और बाजार को साथ जोड़कर पढ़ें; धान, गेहूं, बाजरा-ज्वार जैसे मोटे अनाज, कपास, गन्ना, जूट, चाय, कॉफी, तिलहन और दालों के उत्पादन-क्षेत्र मिट्टी, जलवायु, सिंचाई और बाजार के अनुसार अलग-अलग हैं।
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खनिज, ऊर्जा और उद्योग के उत्तर तब मजबूत होते हैं जब भंडार, बिजली, परिवहन, श्रम, बाजार और पर्यावरणीय लागत को साथ समझाया जाए।
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स्वर्णिम चतुर्भुज 5,846 किमी लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग जाल है, जो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ता है; परिवहन में सड़क, रेल, बंदरगाह, अंतर्देशीय जलमार्ग और वायु मार्ग के साथ व्यापार से उनके संबंध भी पढ़ें।
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प्राकृतिक संसाधन आधार और पाठ्यक्रम की रूपरेखा
भारत का संसाधन भूगोल विविध स्थलरूप, मानसूनी जलवायु, पुरानी प्रायद्वीपीय चट्टानों, जलोढ़ मैदानों, लंबे समुद्र तट और असमान बसावट से बनता है। स्नातक स्तर सीईटी में इस विषय को आधिकारिक भारत-भूगोल वाले बिंदुओं से जोड़े रखें: नदियां, बांध, झीलें और महासागर; वन्यजीव और अभयारण्य; फसलें; खनिज; ऊर्जा संसाधन; उद्योग और औद्योगिक क्षेत्र; राष्ट्रीय राजमार्ग, परिवहन और व्यापार। नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन जैसे सामान्य विचार तभी उपयोगी हैं जब वे इन सूचीबद्ध क्षेत्रों को समझाने में मदद करें।
इसका भौगोलिक बंटवारा साफ है। प्रायद्वीपीय भारत की पुरानी चट्टानें कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, मैंगनीज और अभ्रक का आधार देती हैं। सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान जलोढ़ मिट्टी, सघन कृषि और बड़े भूजल उपयोग से जुड़े हैं। हिमालय और उत्तर-पूर्वी पहाड़ियां नदी उद्गम, जलविद्युत, वन और जैव-विविधता देती हैं। तटीय पट्टी मत्स्य संसाधन, मैंग्रोव, बंदरगाह, अपतटीय पेट्रोलियम, व्यापार और चक्रवात जोखिम से जुड़ती है। राजस्थान में शुष्क भूमि, अरावली, चूना पत्थर, जिप्सम, रॉक फॉस्फेट, सौर ऊर्जा और नहर-सिंचित क्षेत्र साथ दिखाई देते हैं।
परीक्षा संकेत: प्राकृतिक संसाधनों पर ढीला निबंध न लिखें। हर बिंदु के साथ उसका स्थान, उपयोग, मानचित्र पर पहचान और पाठ्यक्रम की संबंधित संसाधन श्रेणी याद रखें।
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