मुख्य तथ्य

  • 1947 के बाद राष्ट्र-निर्माण का अर्थ एकता बचाए रखना, संवैधानिक लोकतंत्र चलाना, 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण, समान नागरिकता बनाना और गरीबी तथा क्षेत्र...
  • नेहरू युग को CET में संसदीय लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्ष नागरिकता, मिश्रित अर्थव्यवस्था, पंचवर्षीय योजनाओं, सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार और वैज्ञानिक सोच से...
  • भाषाई राज्य पुनर्गठन इसलिए उभरा क्योंकि भाषा प्रशासन, शिक्षा, संस्कृति और राजनीतिक पहचान से जुड़ी थी;
  • CET के लिए संविधान, पहले आम चुनाव, पंचवर्षीय योजनाएं, योजना आयोग, आंध्र राज्य और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 जैसे नामों-वर्षों और व्यापक कारण-परिणाम...

मुख्य बिंदु

  1. 1

    1947 के बाद राष्ट्र-निर्माण का अर्थ एकता बचाए रखना, संवैधानिक लोकतंत्र चलाना, 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण, समान नागरिकता बनाना और गरीबी तथा क्षेत्रीय असंतुलन कम करने के लिए योजनाबद्ध विकास का उपयोग करना था।

  2. 2

    नेहरू युग को CET में संसदीय लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्ष नागरिकता, मिश्रित अर्थव्यवस्था, पंचवर्षीय योजनाओं, सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार और वैज्ञानिक सोच से समझना चाहिए; जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे।

  3. 3

    राष्ट्रीय एकीकरण में रियासतों का विलय, एक संविधान, समान नागरिकता, चुनाव, न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएं और भाषाई-क्षेत्रीय विविधता का लोकतांत्रिक समायोजन शामिल था।

  4. 4

    भाषाई राज्य पुनर्गठन इसलिए उभरा क्योंकि भाषा प्रशासन, शिक्षा, संस्कृति और राजनीतिक पहचान से जुड़ी थी; 1953 में आंध्र राज्य बना और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 इसका मुख्य मोड़ था।

  5. 5

    संस्थान निर्माण में संसद, निर्वाचन आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, UPSC, अखिल भारतीय सेवाएं, योजना आयोग, विश्वविद्यालय, IIT, वैज्ञानिक संस्थाएं, बांध और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम महत्वपूर्ण रहे।

  6. 6

    विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास का संबंध वैज्ञानिक सोच, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान, CSIR प्रयोगशालाओं, तकनीकी शिक्षा तथा कृषि, उद्योग और आधारभूत ढांचे में विज्ञान के उपयोग से था।

  7. 7

    CET के लिए संविधान, पहले आम चुनाव, पंचवर्षीय योजनाएं, योजना आयोग, आंध्र राज्य और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 जैसे नामों-वर्षों और व्यापक कारण-परिणाम संबंधों पर ध्यान दें।

1947 के बाद राष्ट्र-निर्माण का अर्थ

भारत को 1947 में स्वतंत्रता मिली, लेकिन स्वतंत्रता के साथ विभाजन, शरणार्थी समस्या, रियासतों का प्रश्न, गरीबी, अशिक्षा और भारी सामाजिक विविधता भी सामने थी। इसलिए राष्ट्र-निर्माण का अर्थ केवल नया झंडा, नई सरकार या नई सीमा नहीं था। इसका अर्थ था एक ऐसे गणराज्य का निर्माण जो अलग-अलग भाषाओं, धर्मों, जातियों, क्षेत्रों और आर्थिक स्थितियों वाले लोगों को एक संवैधानिक ढांचे में जोड़ सके।

पहला लक्ष्य एकता था। ब्रिटिश भारत के प्रांतों और रियासतों को एक संघ में लाना जरूरी था, वरना स्वतंत्रता के बाद राजनीतिक बिखराव बढ़ सकता था। दूसरा लक्ष्य लोकतंत्र था। भारत ने शुरुआत से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया, जिससे आम नागरिक सत्ता परिवर्तन और नीति-निर्माण में भागीदार बने। तीसरा लक्ष्य विकास था। कृषि, सिंचाई, उद्योग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी रहती।

नागरिकता इस पूरी प्रक्रिया का केंद्र थी। संविधान ने नागरिकों को समान राजनीतिक पहचान दी और राज्य को अधिकारों, कानून और संस्थाओं से बांधा। योजना और सार्वजनिक निवेश के माध्यम से सीमित संसाधनों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की ओर मोड़ने की कोशिश हुई। CET के लिए राष्ट्र-निर्माण को एक संयुक्त प्रक्रिया की तरह पढ़ना चाहिए: राष्ट्रीय एकीकरण, संवैधानिक लोकतंत्र, संस्थान निर्माण और विकास।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

7 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें