गांधी युग, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय एकीकरण
मुख्य तथ्य
- 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे; उनके शुरुआती भारतीय तरीके में सत्याग्रह, अहिंसा, स्थानीय जाँच और जन-अनुशासन जुड़े।
- 1917-18 में चम्पारण, अहमदाबाद और खेड़ा ने दिखाया कि किसान-मजदूर की स्थानीय समस्या भी संगठित सार्वजनिक कार्रवाई बन सकती है।
- 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर का जलियाँवाला बाग औपनिवेशिक दमन का राष्ट्रीय प्रतीक बन गया।
- दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने असहयोग अपनाया; रॉलेट, जलियाँवाला बाग और खिलाफत की पृष्ठभूमि ने विरोध को व्यापक बनाया।
- 1930-31 में पूर्ण स्वराज, नमक यात्रा, सविनय अवज्ञा और गांधी-इर्विन समझौते ने स्वतंत्रता के लक्ष्य को जन-अवज्ञा से जोड़ा।
मुख्य बिंदु
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9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे; उनके शुरुआती भारतीय तरीके में सत्याग्रह, अहिंसा, स्थानीय जाँच और जन-अनुशासन जुड़े।
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1917-18 में चम्पारण, अहमदाबाद और खेड़ा ने दिखाया कि किसान-मजदूर की स्थानीय समस्या भी संगठित सार्वजनिक कार्रवाई बन सकती है।
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13 अप्रैल 1919 को अमृतसर का जलियाँवाला बाग औपनिवेशिक दमन का राष्ट्रीय प्रतीक बन गया।
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दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने असहयोग अपनाया; रॉलेट, जलियाँवाला बाग और खिलाफत की पृष्ठभूमि ने विरोध को व्यापक बनाया।
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1930-31 में पूर्ण स्वराज, नमक यात्रा, सविनय अवज्ञा और गांधी-इर्विन समझौते ने स्वतंत्रता के लक्ष्य को जन-अवज्ञा से जोड़ा।
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8 अगस्त 1942 को बॉम्बे में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने भारत छोड़ो का आह्वान किया; इसके बाद गिरफ्तारियाँ, भूमिगत नेटवर्क और स्थानीय उभार हुए।
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1947-56 में विभाजन, रियासतों का विलय, संविधान, शुरुआती संस्थाएँ और भाषाई पुनर्गठन स्वतंत्र भारत के राष्ट्र-निर्माण की धुरी बने।
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गांधी की वापसी और शुरुआती सत्याग्रह
गांधी 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। वे तुरंत राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष नेता की तरह नहीं आए; गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर उन्होंने देश को देखा, स्थानीय स्थितियाँ समझीं और सत्य, अहिंसा, आत्म-अनुशासन, स्थानीय पीड़ा तथा नैतिक दबाव पर आधारित भारतीय पद्धति बनाई। 1915 में अहमदाबाद के पास कोचरब में सत्याग्रह आश्रम बना और बाद में साबरमती आश्रम कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण तथा सार्वजनिक कार्रवाई का प्रसिद्ध केंद्र बना।
शुरुआती सत्याग्रह अखिल भारतीय आंदोलन नहीं थे, फिर भी उन्होंने गांधी को राष्ट्रीय पहचान दी। 1917 में चम्पारण में उन्होंने नील की खेती से पीड़ित किसानों की समस्या उठाई। 1918 में अहमदाबाद में कपड़ा मिल मजदूरों के बीच सत्याग्रह हुआ। 1918 में खेड़ा में फसल खराबी और कठिनाई के कारण लगान में राहत मुख्य माँग बनी; इसी दौर में वल्लभभाई पटेल और स्थानीय कार्यकर्ता प्रमुख आयोजक बने। इन घटनाओं से गांधी की पद्धति साफ दिखती है: तथ्य-जाँच, संवाद, अनुशासित अवज्ञा और दंड स्वीकार करने की तैयारी।
मुख्य पकड़: गांधी का उभार छोटे स्थानीय संघर्षों से हुआ, जहाँ सत्याग्रह ने सामाजिक शिकायत को अनुशासित राजनीतिक दबाव में बदला।
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