मुख्य तथ्य

  • ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 में व्यापारिक कंपनी के रूप में बनी और 18वीं शताब्दी की सैन्य व राजस्व उपलब्धियों के बाद ही क्षेत्रीय शक्ति बनी।
  • 23 जून 1757 के प्लासी युद्ध ने कंपनी को बंगाल में दरबारी षड्यंत्र और बल के सहारे राजनीतिक पैठ दी, पूरे भारत की सीधी विजय नहीं।
  • 22 अक्टूबर 1764 का बक्सर युद्ध अधिक निर्णायक था, क्योंकि मीर कासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय की संयुक्त चुनौती हारी।
  • 1765 की इलाहाबाद संधि से कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली, जिससे सेना और प्रशासन का आधार राजस्व बना।
  • 1793 के स्थायी बंदोबस्त ने बंगाल में जमींदारी राजस्व स्थायी किया; रैयतवाड़ी और महालवाड़ी में अलग राजस्व इकाइयाँ थीं।

मुख्य बिंदु

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    ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 में व्यापारिक कंपनी के रूप में बनी और 18वीं शताब्दी की सैन्य व राजस्व उपलब्धियों के बाद ही क्षेत्रीय शक्ति बनी।

  2. 2

    23 जून 1757 के प्लासी युद्ध ने कंपनी को बंगाल में दरबारी षड्यंत्र और बल के सहारे राजनीतिक पैठ दी, पूरे भारत की सीधी विजय नहीं।

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    22 अक्टूबर 1764 का बक्सर युद्ध अधिक निर्णायक था, क्योंकि मीर कासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय की संयुक्त चुनौती हारी।

  4. 4

    1765 की इलाहाबाद संधि से कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली, जिससे सेना और प्रशासन का आधार राजस्व बना।

  5. 5

    1793 के स्थायी बंदोबस्त ने बंगाल में जमींदारी राजस्व स्थायी किया; रैयतवाड़ी और महालवाड़ी में अलग राजस्व इकाइयाँ थीं।

  6. 6

    लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि ने रक्षा और विदेश नीति को अधीन किया; लॉर्ड डलहौजी की राज्य-हरण नीति ने उत्तराधिकार के आधार पर राज्य मिलाए।

  7. 7

    अवध का 1856 में विलय कथित कुशासन के आधार पर हुआ, राज्य-हरण नीति से नहीं; यह परीक्षा का सामान्य जाल है।

  8. 8

    1857 का विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुआ और दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, झाँसी, बरेली, जगदीशपुर तथा अन्य केंद्रों तक फैला।

  9. 9

    वर्तमान CET स्नातक पाठ्यक्रम के लिए राजस्थान में 1857 को नसीराबाद, नीमच, एरिनपुरा, आउवा, कोटा और रियासतों की मिली-जुली भूमिका से पढ़ना जरूरी है।

  10. 10

    भारत शासन अधिनियम, 1858 ने कंपनी शासन समाप्त कर भारत का प्रशासन भारत सचिव और इंडिया काउंसिल के माध्यम से ब्रिटिश क्राउन को सौंपा।

व्यापारिक कंपनी से राजनीतिक शक्ति तक

ब्रिटिश विस्तार भारत में सीधे साम्राज्य के रूप में शुरू नहीं हुआ था; शुरुआत व्यापारिक प्रवेश से हुई। ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 में व्यापारिक कंपनी के रूप में बनी और शुरुआती कारखाने भारतीय शक्तियों की अनुमति, तटीय व्यापार और समझौतों पर निर्भर थे। असली मोड़ 18वीं शताब्दी में आया, जब यूरोपीय प्रतिस्पर्धा, भारतीय प्रांतीय राजनीति और कंपनी की सैन्य तैयारी एक साथ जुड़ गईं। कर्नाटक युद्धों ने दक्षिण भारत में फ्रांसीसी संभावना को कमजोर किया और बंगाल ने कंपनी को स्थायी सेना व प्रशासन चलाने के लिए राजस्व आधार दिया।

23 जून 1757 का प्लासी युद्ध बंगाल में कंपनी की पहली बड़ी राजनीतिक पैठ था। रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर, राय दुर्लभ, ओमीचंद और जगत सेठ जैसे दरबारी-आर्थिक गुटों की मदद से सिराजुद्दौला को हराया। यह पूरे भारत की साधारण सैन्य विजय नहीं, बल्कि बल से समर्थित दरबारी तख्तापलट जैसा था। 22 अक्टूबर 1764 का बक्सर युद्ध अधिक निर्णायक था: कंपनी ने मीर कासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त चुनौती को हराया। 1765 की इलाहाबाद संधि के बाद शाह आलम द्वितीय ने कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी दी।

क्रम ऐसे याद रखें: प्लासी ने राजनीतिक प्रवेश दिया, बक्सर ने सैन्य विश्वसनीयता दी और दीवानी ने राजस्व-आधारित शक्ति दी।

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