मौर्य, गुप्त और उत्तर-गुप्त साम्राज्य
मुख्य तथ्य
- लगभग 321 ईसा पूर्व चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साम्राज्य की नींव रखी;
- NCERT की समयरेखा गुप्त शासन की शुरुआत लगभग 320 ईस्वी से रखती है;
- चंद्रगुप्त द्वितीय को लगभग 375-415 ईस्वी में रखा गया है; NCERT उसकी पुत्री प्रभावती गुप्ता को दक्कन के वाकाटक राजघराने और भूमि-अनुदान के प्रमाण से जोड...
- उत्तर-गुप्त स्मरण में कन्नौज के हर्षवर्धन को लगभग 606-647 ईस्वी, बौद्ध ग्रंथों की खोज में आए ह्वेनसांग और लगभग 500-600 ईस्वी में चालुक्य-पल्लव उभार को...
मुख्य बिंदु
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CET स्नातक स्तर के वर्तमान आधिकारिक दायरे में भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएं, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, स्वतंत्रता-उत्तर राष्ट्र-निर्माण और राजस्थान-सम्बन्धी ऐतिहासिक विषय शामिल हैं; मौर्य, गुप्त और उत्तर-गुप्त साम्राज्य इसी भारत-इतिहास आधार में आते हैं।
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लगभग 321 ईसा पूर्व चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साम्राज्य की नींव रखी; NCERT अशोक का शासन लगभग 272/268-231 ईसा पूर्व मानता है और अशोक के अभिलेखों को मौर्य इतिहास के सबसे मूल्यवान स्रोतों में रखता है।
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मौर्य प्रशासन को पाटलिपुत्र, तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसली और सुवर्णगिरि जैसे प्रांतीय केंद्रों, अशोक के अभिलेखों, मेगस्थनीज और अर्थशास्त्र परंपरा के साथ पढ़ना चाहिए।
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अशोक का धम्म मुख्य रूप से अभिलेखों से जाना जाता है; इसमें बड़ों का सम्मान, उदारता, सेवकों के प्रति अच्छा व्यवहार और दूसरे धर्मों-परंपराओं का सम्मान शामिल था; धम्म-महामात्र इसे फैलाने के लिए नियुक्त किए गए।
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NCERT की समयरेखा गुप्त शासन की शुरुआत लगभग 320 ईस्वी से रखती है; समुद्रगुप्त को लगभग 335-375 ईस्वी में रखा गया है और प्रयाग प्रशस्ति उसके दरबारी कवि हरिषेण ने लिखी।
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चंद्रगुप्त द्वितीय को लगभग 375-415 ईस्वी में रखा गया है; NCERT उसकी पुत्री प्रभावती गुप्ता को दक्कन के वाकाटक राजघराने और भूमि-अनुदान के प्रमाण से जोड़ता है।
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भूमि-अनुदान, ताम्रपत्र अभिलेख, स्थानीय प्रभु वर्ग और क्षेत्रीय विविधता गुप्त साम्राज्य से प्रारंभिक मध्यकालीन राजनीति की ओर संक्रमण समझने के लिए जरूरी हैं।
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उत्तर-गुप्त स्मरण में कन्नौज के हर्षवर्धन को लगभग 606-647 ईस्वी, बौद्ध ग्रंथों की खोज में आए ह्वेनसांग और लगभग 500-600 ईस्वी में चालुक्य-पल्लव उभार को शामिल करें।
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पाठ्यक्रम-दायरा और परीक्षा दृष्टि
CET स्नातक स्तर में यह विषय वर्तमान आधिकारिक पाठ्यक्रम के "भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के विशेष संदर्भ सहित भारत और राजस्थान का इतिहास" खंड में आता है। इस खंड में भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएं, राजस्थान से जुड़े ऐतिहासिक विषय, स्वतंत्रता-उत्तर राष्ट्र-निर्माण और राजस्थान का एकीकरण जैसे बिंदु शामिल हैं। मौर्य, गुप्त और उत्तर-गुप्त साम्राज्य कोई अलग वैकल्पिक विषय नहीं हैं; वे प्रारंभिक भारतीय इतिहास की वह राजनीतिक रीढ़ हैं जिससे राजस्थान के स्थल, अभिलेख, सिक्के और क्षेत्रीय शक्तियां व्यापक भारतीय मानचित्र से जुड़ती हैं।
इस विषय को स्रोतों और राजनीतिक रूपों की क्रमिक कहानी की तरह पढ़ें। मौर्य काल मगध और पाटलिपुत्र केंद्रित प्रारंभिक बड़े साम्राज्य को दिखाता है, जिसे प्रांतीय केंद्रों और अभिलेखों से समझा जाता है। गुप्त काल अलग तरह की साम्राज्य-प्रतिष्ठा दिखाता है, जिसमें विजय, संस्कृत प्रशस्तियां, वैवाहिक संबंध, भूमि-अनुदान और क्षेत्रीय प्रभु वर्ग महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उत्तर-गुप्त काल बताता है कि एक साम्राज्य कमजोर होने के बाद भारतीय इतिहास खाली नहीं हुआ; शक्ति कन्नौज, दक्कन और क्षेत्रीय राजवंशों जैसे केंद्रों में बंटती गई।
CET में विकल्प अक्सर यह जांचते हैं कि विद्यार्थी स्रोत और घटना को अलग कर पा रहा है या नहीं। अशोक के अभिलेख, मेगस्थनीज और अर्थशास्त्र परंपरा एक ही प्रकार के स्रोत नहीं हैं। प्रयाग प्रशस्ति प्रशंसा-प्रधान अभिलेख है, निष्पक्ष अभियान-डायरी नहीं। ह्वेनसांग यात्रा और बौद्ध अध्ययन से जुड़ा स्रोत है, भारतीय राजाज्ञा नहीं। हर तथ्यात्मक विकल्प को पढ़ते समय पूछें: कौन-सा काल, कौन-सा स्रोत, कौन-सा शासक और कौन-सा क्षेत्र?
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