राजस्थान में जनजातीय, किसान और प्रजा मंडल आंदोलन
मुख्य तथ्य
- RSSB CET स्नातक पाठ्यक्रम का आधार: 1857 के विद्रोह में राजस्थान का योगदान, जनजातीय और किसान आंदोलन, राजनीतिक जागृति और प्रजा मंडल आंदोलन।
- 1857 में राजस्थान एक ब्रिटिश प्रांत नहीं था; यहाँ रियासतें, जागीरें, ठिकाने, ब्रिटिश-प्रशासित अजमेर-मेरवाड़ा और छावनियाँ साथ-साथ थीं, इसलिए विद्रोह और...
- RSSB के परीक्षा-स्रोतों में राजस्थान में 1857 के विद्रोह के लिए नसीराबाद और 28 मई 1857 सबसे सुरक्षित आरंभिक आधार हैं।
- मेवाड़ भील कोर को सावधानी से पढ़ें: राजस्थान पुलिस के इतिहास में 1837 में कर्नल जेम्स आउट्रम के प्रस्ताव और 1841 तक मेवाड़ के पहाड़ी क्षेत्रों के कोर...
- मानगढ़ प्रमुख जनजातीय स्मृति-स्थल है: PIB 17 नवंबर 1913, गोविंद गुरु, मानगढ़ पहाड़ी और लगभग 1500 जनजातीय शहीदों का उल्लेख करता है;
मुख्य बिंदु
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RSSB CET स्नातक पाठ्यक्रम का आधार: 1857 के विद्रोह में राजस्थान का योगदान, जनजातीय और किसान आंदोलन, राजनीतिक जागृति और प्रजा मंडल आंदोलन।
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1857 में राजस्थान एक ब्रिटिश प्रांत नहीं था; यहाँ रियासतें, जागीरें, ठिकाने, ब्रिटिश-प्रशासित अजमेर-मेरवाड़ा और छावनियाँ साथ-साथ थीं, इसलिए विद्रोह और अंग्रेज-समर्थन दोनों दिखाई देते हैं।
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RSSB के परीक्षा-स्रोतों में राजस्थान में 1857 के विद्रोह के लिए नसीराबाद और 28 मई 1857 सबसे सुरक्षित आरंभिक आधार हैं।
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मेवाड़ भील कोर को सावधानी से पढ़ें: राजस्थान पुलिस के इतिहास में 1837 में कर्नल जेम्स आउट्रम के प्रस्ताव और 1841 तक मेवाड़ के पहाड़ी क्षेत्रों के कोर कमांडेंट के अधीन आने का उल्लेख है।
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मानगढ़ प्रमुख जनजातीय स्मृति-स्थल है: PIB 17 नवंबर 1913, गोविंद गुरु, मानगढ़ पहाड़ी और लगभग 1500 जनजातीय शहीदों का उल्लेख करता है; परीक्षा में पहले तारीख, नेता और स्थान याद रखें।
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बिजौलिया किसान आंदोलन बेगार और भारी करों के विरुद्ध किसान असंतोष से निकला; भारत सरकार के जिला अभिलेखागार में 1897 में शुरुआती संकेत और 1913 में साधु सीताराम दास के नेतृत्व, बाद में विजय सिंह पथिक के जुड़ने का उल्लेख है।
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एकी आंदोलन मोतीलाल तेजावत और सिरोही-मेवाड़ क्षेत्र की जनजातीय लामबंदी से जुड़ता है; सिरोही जिला वेबसाइट 1922 में रोहिड़ा में तेजावत द्वारा एकी आंदोलन संगठित करने का उल्लेख करता है।
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बेगूं को बिजौलिया से अलग रखें: RSSB/RSMSSB परीक्षा-स्रोत रूपाजी और कृपाजी को बेगूं किसान आंदोलन से जोड़ते हैं।
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प्रजा मंडल राजनीति ने स्थानीय शिकायतों को नागरिक स्वतंत्रता, प्रतिनिधि संस्थाओं और उत्तरदायी शासन की मांग में बदला; RSSB जयपुर, मारवाड़, बीकानेर और कोटा प्रजा मंडलों का सापेक्ष कालक्रम पूछता है।
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पाठ्यक्रम ढांचा और 1857 की शुरुआत
RSSB CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह पाठ इस बिंदु के अंतर्गत आता है: 1857 के विद्रोह में राजस्थान का योगदान; राजस्थान में जनजातीय और किसान आंदोलन; राजनीतिक जागृति और प्रजा मंडल आंदोलन। इसलिए इसे केवल नामों की सूची की तरह नहीं पढ़ना है। सही क्रम है: 1857 में सैन्य और स्थानीय प्रतिरोध, रियासती शासन में ग्रामीण-जनजातीय विरोध, और फिर प्रजा मंडल दौर में अधिकार-आधारित संगठित राजनीति।
पहले राजस्थान की राजनीतिक बनावट समझें। 1857 में राजस्थान कोई एक ब्रिटिश प्रांत नहीं था। राजपूताना में रियासतें, जागीरें, ठिकाने, ब्रिटिश-प्रशासित अजमेर-मेरवाड़ा, छावनियाँ और जनजातीय सीमांत क्षेत्र साथ-साथ थे। इसी मिश्रित ढाँचे के कारण विद्रोह असमान रहा। कहीं सैनिकों, स्थानीय सरदारों और जनता ने अंग्रेजी सत्ता का विरोध किया; कहीं कई शासकों या राज्य अधिकारियों ने अंग्रेजों का साथ दिया या खुले विद्रोह से दूरी रखी।
CET उत्तर के लिए सबसे सुरक्षित परीक्षा-आधार पहले रखें: RSSB की आधिकारिक प्रश्न-पत्र सामग्री राजस्थान में विद्रोह की शुरुआत नसीराबाद से 28 मई 1857 को मानती है। नीमच, एरिनपुरा, कोटा, आउवा, भरतपुर और धौलपुर उपयोगी आसपास के नाम हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र को एक समान विद्रोह की तरह न लिखें। कोटा इसलिए महत्वपूर्ण है कि वहाँ अंग्रेज-विरोधी उठान ने तीखा स्थानीय रूप लिया। मारवाड़ में आउवा कुशाल सिंह और अंग्रेज-समर्थित सत्ता के विरुद्ध प्रतिरोध से जुड़ता है।
दोहराई का तरीका सरल रखें: 1857 शुरुआती प्रतिरोध का ढांचा देता है; जनजातीय आंदोलन सम्मान, वन, पुलिस और सामुदायिक जीवन पर नियंत्रण के प्रश्न उठाते हैं; किसान आंदोलन लगान, लाग-बाग, बेगार और जागीरदारी दबाव से लड़ते हैं; प्रजा मंडल इन्हीं शिकायतों को नागरिक स्वतंत्रता और उत्तरदायी शासन की मांग में बदलते हैं।
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