मुख्य तथ्य

  • सिस्टम आपस में जुड़े घटकों से बनता है जो एक लक्ष्य के लिए काम करते हैं; सिस्टम भौतिक या अमूर्त, खुला या बंद और मैनुअल या कंप्यूटर आधारित हो सकता है।
  • सिस्टम एनालिस्ट मौजूदा कामकाज का अध्ययन करता है, उपयोगकर्ताओं से बात करता है, ज़रूरतें तय करता है, व्यवहार्यता जाँचता है और काम की ज़रूरत को उपयोगी डि...
  • विकास पर संसाधन लगाने से पहले तकनीकी, आर्थिक, कामकाजी और समय संबंधी व्यवहार्यता की जाँच करनी चाहिए।
  • इंटरव्यू, प्रश्नावली, अवलोकन, दस्तावेज़ अध्ययन और वर्कशॉप आम तथ्य-संग्रह (फैक्ट-फाइंडिंग) विधियाँ हैं;
  • SDLC में आमतौर पर व्यवहार्यता, ज़रूरतों का विश्लेषण, डिज़ाइन, लागू करना, टेस्टिंग, डिलीवरी और मेंटेनेंस आते हैं, हालांकि चुना गया मॉडल इन चरणों को अलग...

मुख्य बिंदु

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    सिस्टम आपस में जुड़े घटकों से बनता है जो एक लक्ष्य के लिए काम करते हैं; सिस्टम भौतिक या अमूर्त, खुला या बंद और मैनुअल या कंप्यूटर आधारित हो सकता है।

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    सिस्टम एनालिस्ट मौजूदा कामकाज का अध्ययन करता है, उपयोगकर्ताओं से बात करता है, ज़रूरतें तय करता है, व्यवहार्यता जाँचता है और काम की ज़रूरत को उपयोगी डिज़ाइन से जोड़ता है।

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    विकास पर संसाधन लगाने से पहले तकनीकी, आर्थिक, कामकाजी और समय संबंधी व्यवहार्यता की जाँच करनी चाहिए।

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    इंटरव्यू, प्रश्नावली, अवलोकन, दस्तावेज़ अध्ययन और वर्कशॉप आम तथ्य-संग्रह (फैक्ट-फाइंडिंग) विधियाँ हैं; इनसे मिली ज़रूरतें स्पष्ट, पूरी, आपस में मेल खाने वाली और जाँच योग्य होनी चाहिए।

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    SDLC में आमतौर पर व्यवहार्यता, ज़रूरतों का विश्लेषण, डिज़ाइन, लागू करना, टेस्टिंग, डिलीवरी और मेंटेनेंस आते हैं, हालांकि चुना गया मॉडल इन चरणों को अलग तरह से व्यवस्थित कर सकता है।

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    DFD डेटा का प्रवाह दिखाता है, डेटा डिक्शनरी डेटा तत्वों को परिभाषित करती है, ER मॉडल एंटिटी और उनके संबंध बताता है तथा डिसीजन टेबल शर्तों के मेल को कार्रवाई से जोड़ती है।

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    अच्छे स्ट्रक्चर्ड डिज़ाइन में ऊँचा कोहेज़न और कम कपलिंग रखी जाती है; सिस्टम लागू करते समय जाँचा हुआ इनपुट, उपयोगी आउटपुट, सही डेटा स्टोरेज, नियंत्रित कन्वर्ज़न और तय मेंटेनेंस भी ज़रूरी हैं।

सिस्टम की अवधारणा और एनालिस्ट की भूमिका

सिस्टम आपस में जुड़े घटकों का व्यवस्थित समूह है। यह इनपुट लेता है, उसे प्रोसेस करता है और किसी साझा लक्ष्य के लिए आउटपुट देता है। सिस्टम की सीमा तय करती है कि कौन-सा हिस्सा इसके भीतर है और कौन-सा बाहरी माहौल में। इंटरफ़ेस वह जगह है जहाँ दो घटक या सिस्टम आपस में जुड़ते हैं। फीडबैक से परिणाम को लक्ष्य से मिलाकर काम नियंत्रित किया जाता है। बड़े सिस्टम के भीतर मौजूद छोटा सिस्टम सबसिस्टम कहलाता है। सिस्टम भौतिक या अमूर्त, खुला या बंद, निश्चित या संभावना आधारित और मैनुअल या कंप्यूटर आधारित हो सकता है। खुला सिस्टम अपने माहौल से जानकारी या संसाधन लेता-देता है। बंद सिस्टम का बाहरी माहौल से बहुत कम लेन-देन होता है।

सिस्टम एनालिस्ट मौजूदा कामकाज समझता है और प्रस्तावित सिस्टम का लक्ष्य तय करने में मदद करता है। वह उपयोगकर्ताओं से इंटरव्यू करता है, दस्तावेज़ और काम का प्रवाह देखता है, ज़रूरतें दर्ज करता है, विकल्पों की जाँच करता है, मॉडल बनाता है और प्रबंधन, उपयोगकर्ता तथा तकनीकी टीम के बीच बात साफ रखता है। इसके लिए विश्लेषण, संवाद, समस्या समाधान और संगठन के कामकाज की समझ ज़रूरी है। एनालिस्ट समस्या और डिज़ाइन की सीमाएँ तय करता है, लेकिन उपयोगकर्ता की हर माँग को अपने-आप सही समाधान नहीं मानता।

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