मुख्य तथ्य

  • भाग 4 में नीति निदेशक तत्व शासन के मूल आधार हैं, पर वे सीधे न्यायालय से लागू नहीं होते।
  • भाग 4क में मूल कर्तव्य नागरिक आचरण के दायित्व हैं, वे अलग दंड-संहिता नहीं बनाते।
  • चंपकम, केसवानंद और मिनर्वा मिल्स भाग 3 और भाग 4 के संतुलन की श्रृंखला बनाते हैं।
  • अनुच्छेद 39ए, 48ए और 51ए(जी) राजस्थान की विधिक सहायता और पर्यावरण संदर्भ से जुड़ते हैं।
  • 86वें संशोधन ने अनुच्छेद 21ए, संशोधित अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 51ए(के) को जोड़ा।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    भाग 4 में नीति निदेशक तत्व शासन के मूल आधार हैं, पर वे सीधे न्यायालय से लागू नहीं होते।

  2. 2

    भाग 4क में मूल कर्तव्य नागरिक आचरण के दायित्व हैं, वे अलग दंड-संहिता नहीं बनाते।

  3. 3

    चंपकम, केसवानंद और मिनर्वा मिल्स भाग 3 और भाग 4 के संतुलन की श्रृंखला बनाते हैं।

  4. 4

    अनुच्छेद 39ए, 48ए और 51ए(जी) राजस्थान की विधिक सहायता और पर्यावरण संदर्भ से जुड़ते हैं।

  5. 5

    86वें संशोधन ने अनुच्छेद 21ए, संशोधित अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 51ए(के) को जोड़ा।

  6. 6

    राजस्थान के शिक्षा नियम, विशाखा और अरावली संरक्षण स्थानीय संवैधानिक उदाहरण देते हैं।

नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य संविधान में कहाँ रखे गए हैं?

नीति निदेशक तत्व संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से 51 तक रखे गए हैं, जबकि मूल कर्तव्य भाग 4-क में अनुच्छेद 51क के तहत रखे गए हैं। विधि और न्याय मंत्रालय के 1 मई 2024 तक अद्यतन संविधान-पाठ में भाग 4-क में मूल कर्तव्यों के लिए केवल एक मुख्य अनुच्छेद, अनुच्छेद 51क, दिया गया है।

संवैधानिक ढांचा

स्थान और मुख्य नियम

प्रावधानस्थानमुख्य बात
राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतभाग 4, अनुच्छेद 36 से 51किसी न्यायालय से लागू नहीं कराए जा सकते, फिर भी वे देश के शासन में मूलभूत हैं
मूल कर्तव्यभाग 4-क, अनुच्छेद 51कनागरिक आचरण और लोक-शिक्षा को आकार देते हैं
अनुच्छेद 37इस रचना का मुख्य नियमकानून बनाते समय राज्य पर नीति निदेशक सिद्धांतों को लागू करने का दायित्व है
  • इससे लक्ष्यों की संवैधानिक भाषा बनती है, निजी दावों की अलग लागू संहिता नहीं।

अनुच्छेद-मानचित्रण

अनुच्छेदविषयसंवैधानिक संकेत
अनुच्छेद 39(ख) और 39(ग)भौतिक संसाधनों तथा धन-संकेंद्रण का प्रश्नसामान्य हित की ओर मोड़ते हैं और हानिकारक संकेंद्रण के विरुद्ध आर्थिक नीति का आधार देते हैं
अनुच्छेद 39कसमान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायताविधिक सहायता क्लीनिक अनुच्छेद 39क से जुड़े हैं
अनुच्छेद 43खसहकारी समितियांअनुच्छेद-मानचित्रण की पहली परत में आता है
अनुच्छेद 48कपर्यावरणराज्य पर पर्यावरण संबंधी दायित्व रखता है
अनुच्छेद 51क(छ)नागरिक-पक्षउसी दायित्व का नागरिक-पक्ष दिखाता है
अनुच्छेद 51क(ग)संप्रभुता तथा अखंडताअनुच्छेद-मानचित्रण की पहली परत में आता है

राजस्थान में ठोस स्थितियां

  • राजस्थान में ये प्रावधान अमूर्त पाठ की तरह नहीं, ठोस स्थितियों में दिखते हैं।
  • विधिक सहायता क्लीनिक अनुच्छेद 39क से जुड़े हैं।
  • राजस्थान में शिक्षा का अधिकार लागू होने पर अनुच्छेद 21क स्कूल-शासन का रूप लेता है।
  • अरावली संरक्षण को राजस्थान के पर्यावरण दायित्व की दृष्टि से पढ़ें तो वह अनुच्छेद 48क और 51क(छ) से जुड़ता है।

2 परतें

1. पहली अनुच्छेद-मानचित्रण है: 39क विधिक सहायता के लिए, 43ख सहकारी समितियों के लिए, 48क पर्यावरण के लिए और 51क(ग) संप्रभुता तथा अखंडता के लिए।

2. दूसरी संवैधानिक पद्धति है। अदालतें सामान्यतः नीति निदेशक सिद्धांतों के पालन को अकेले उपाय के रूप में आदेशित नहीं कर सकतीं, पर वे अधिकारों की व्याख्या, कल्याणकारी कानूनों की परीक्षा और भाग 3 तथा भाग 4 के बीच सामंजस्य बनाए रखने में उनका उपयोग कर सकती हैं।

श्रेणी-स्पष्टता

  • अनुच्छेद संख्या को संस्थागत काम से जोड़कर पढ़ना चाहिए।
  • भाग 4 मुख्यतः विधायिका और कार्यपालिका से बात करता है।
  • भाग 4-क नागरिक आचरण और लोक-शिक्षा को आकार देता है।
  • यही विभाजन समझाता है कि राजस्थान का कोई विद्यालय नियम, विधिक सहायता कार्यक्रम और अरावली से जुड़ा आदेश अलग-अलग अनुच्छेदों के संवैधानिक उत्तर हो सकते हैं, भले उनका उपाय समान न हो।
  • श्रेणी-स्पष्टता अनुच्छेदों की गड़बड़ी रोकती है।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

9 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें