मेमोरी और भंडारण डिवाइस
मुख्य तथ्य
- 1945 में जॉन वॉन न्यूमन की रिपोर्ट ने संग्रहीत-प्रोग्राम कंप्यूटर की रूपरेखा दी; इसी विचार में निर्देश और डेटा दोनों मेमोरी में रखे जाते हैं।
- 1947 में Williams-Kilburn ट्यूब ने शुरुआती रैंडम-एक्सेस इलेक्ट्रॉनिक मेमोरी दिखाई; इससे मशीन संग्रहीत बिटों को तेजी से पढ़ और लिख सकती थी।
- 1956 में IBM ने RAMAC प्रणाली के साथ IBM 350 डिस्क स्टोरेज यूनिट पेश की; इससे चुंबकीय डिस्क भंडारण व्यावहारिक द्वितीयक भंडारण तकनीक बना।
- 1968 में IBM के Robert H. Dennard को एक-ट्रांजिस्टर DRAM का पेटेंट मिला; यही मेमोरी-सेल डिजाइन आज भी मुख्य मेमोरी चिपों की आधार रचना है।
- 1982 में कॉम्पैक्ट डिस्क व्यावसायिक ऑप्टिकल भंडारण माध्यम बनी; इसमें चुंबकीय हेड के बजाय लेजर से पढ़ना होता है।
मुख्य बिंदु
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1945 में जॉन वॉन न्यूमन की रिपोर्ट ने संग्रहीत-प्रोग्राम कंप्यूटर की रूपरेखा दी; इसी विचार में निर्देश और डेटा दोनों मेमोरी में रखे जाते हैं।
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1947 में Williams-Kilburn ट्यूब ने शुरुआती रैंडम-एक्सेस इलेक्ट्रॉनिक मेमोरी दिखाई; इससे मशीन संग्रहीत बिटों को तेजी से पढ़ और लिख सकती थी।
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1956 में IBM ने RAMAC प्रणाली के साथ IBM 350 डिस्क स्टोरेज यूनिट पेश की; इससे चुंबकीय डिस्क भंडारण व्यावहारिक द्वितीयक भंडारण तकनीक बना।
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1968 में IBM के Robert H. Dennard को एक-ट्रांजिस्टर DRAM का पेटेंट मिला; यही मेमोरी-सेल डिजाइन आज भी मुख्य मेमोरी चिपों की आधार रचना है।
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1982 में कॉम्पैक्ट डिस्क व्यावसायिक ऑप्टिकल भंडारण माध्यम बनी; इसमें चुंबकीय हेड के बजाय लेजर से पढ़ना होता है।
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1984 में Toshiba के फुजियो मासुओका ने फ्लैश मेमोरी प्रस्तुत की; इससे कंप्यूटर और डिवाइस को बिजली बंद होने पर भी डेटा रखने वाला सेमीकंडक्टर भंडारण मिला।
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1996 में पहला USB मानक जारी हुआ; इससे प्लग-एंड-प्ले बाहरी भंडारण डिवाइस सामान्य होने में मदद मिली।
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कंप्यूटर मेमोरी की मूल भूमिका क्या है?
कंप्यूटर मेमोरी की मूल भूमिका यह है कि वह CPU के लिए निर्देश, डेटा और बीच के परिणामों को काम करते समय पास में रखती है, ताकि प्रोग्राम केवल भंडारण में पड़ी फ़ाइल न रहकर वास्तव में चल सके। कंप्यूटर में मेमोरी वह कार्यस्थल है जहां CPU निर्देश, डेटा और बीच के परिणामों को रखकर काम करता है। कोई भी प्रोग्राम स्थायी भंडारण में पड़ा रहे तो वह केवल फ़ाइल है; CPU उसे चलाने के लिए उसके निर्देशों और आवश्यक डेटा को मुख्य मेमोरी में लाता है। इसलिए मेमोरी की गति, क्षमता और प्रकृति सीधे कंप्यूटर के प्रदर्शन को प्रभावित करती है। परीक्षा में सामान्यतः पूछा जाता है कि कौन-सी मेमोरी अस्थायी है, कौन-सी स्थायी है, कौन CPU के सबसे पास है और किसका उपयोग बड़ी मात्रा में डेटा रखने के लिए होता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के आधिकारिक शिक्षक पाठ्यक्रम में “शिक्षण में कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग” खंड के लिए 15 प्रश्न और 30 अंक रखे गए हैं, इसलिए इस अध्याय को अलग-अलग परिभाषाओं की बजाय पूरी व्यवस्था के रूप में पढ़ना चाहिए।
मेमोरी को व्यापक रूप से प्राथमिक मेमोरी और द्वितीयक भंडारण में बांटा जाता है। प्राथमिक मेमोरी CPU के सीधे उपयोग के लिए होती है; इसमें RAM, ROM, कैश और रजिस्टर जैसे स्तर आते हैं। द्वितीयक भंडारण अपेक्षाकृत धीमा लेकिन बड़ी क्षमता वाला होता है; इसमें HDD, SSD, ऑप्टिकल डिस्क, मेमोरी कार्ड और USB ड्राइव शामिल हैं। राजस्थान के किसी विद्यालय की कंप्यूटर लैब में पाठ्य सामग्री SSD या HDD में रखी हो सकती है, पर सॉफ़्टवेयर चलने के समय सक्रिय निर्देश RAM और कैश में आते हैं।
याद रखें: गति और क्षमता के बीच संतुलन ही मेमोरी व्यवस्था का मूल सिद्धांत है।
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