मुख्य तथ्य

  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ; इसका लक्ष्य नागरिकों को डिजिटल अवसंरचना, मांग पर सेवाएं और डिजिटल सशक्तिकरण देना है।
  • राजएसएसओ 1 मई 2015 को कार्यान्वित हुआ; इसका सिद्धांत एक डिजिटल पहचान से राज्य सरकार के अनेक अनुप्रयोगों तक सुरक्षित पहुंच देना है।
  • भामाशाह योजना 15 अगस्त 2014 को व्यापक रूप से फिर शुरू की गई; इसका केंद्र महिला-प्रधान परिवार पहचान, वित्तीय समावेशन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण था।
  • राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अधिनियम, 2020 जन आधार ID के आधार पर कल्याणकारी लाभों और सेवाओं की पारदर्शी लक्षित डिलीवरी का कानूनी आधार देता है।
  • जन आधार नियम 2021 को 4 अगस्त 2021 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित किया गया; इससे जन आधार व्यवस्था के प्रशासनिक नियम स्पष्ट हुए।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ; इसका लक्ष्य नागरिकों को डिजिटल अवसंरचना, मांग पर सेवाएं और डिजिटल सशक्तिकरण देना है।

  2. 2

    ई-मित्र राजस्थान की नागरिक-सेवा वितरण व्यवस्था है; इसका मूल उद्देश्य कई विभागीय सेवाओं को एक ही कियोस्क और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म से उपलब्ध कराना है।

  3. 3

    राजएसएसओ 1 मई 2015 को कार्यान्वित हुआ; इसका सिद्धांत एक डिजिटल पहचान से राज्य सरकार के अनेक अनुप्रयोगों तक सुरक्षित पहुंच देना है।

  4. 4

    भामाशाह योजना 15 अगस्त 2014 को व्यापक रूप से फिर शुरू की गई; इसका केंद्र महिला-प्रधान परिवार पहचान, वित्तीय समावेशन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण था।

  5. 5

    राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अधिनियम, 2020 जन आधार ID के आधार पर कल्याणकारी लाभों और सेवाओं की पारदर्शी लक्षित डिलीवरी का कानूनी आधार देता है।

  6. 6

    जन आधार नियम 2021 को 4 अगस्त 2021 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित किया गया; इससे जन आधार व्यवस्था के प्रशासनिक नियम स्पष्ट हुए।

  7. 7

    यूपीआई का पायलट लॉन्च NPCI ने 11 अप्रैल 2016 को RBI गवर्नर की उपस्थिति में किया; यह मोबाइल आधारित त्वरित अंतर-बैंक भुगतान व्यवस्था है।

दैनिक जीवन में IT कहाँ-कहाँ काम आती है?

दैनिक जीवन में सूचना प्रौद्योगिकी मोबाइल, कंप्यूटर, बैंकिंग, भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं और ऑनलाइन संचार को डेटा-आधारित सेवा में बदलने के लिए काम आती है। सूचना प्रौद्योगिकी का मूल काम डेटा को बनाना, संग्रहित करना, संसाधित करना, भेजना और उपयोगी सूचना में बदलना है। रोजमर्रा के जीवन में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ATM, पॉइंट ऑफ सेल मशीन, बारकोड स्कैनर, क्लाउड भंडारण, ऑनलाइन टिकट, डिजिटल कक्षा और टेलीमेडिसिन इसी IT पारितंत्र के उदाहरण हैं। जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कुल जनसंख्या 6,85,48,437 थी, इसलिए राज्य में डिजिटल सेवा-डिलीवरी का पैमाना नागरिकों की बड़ी और फैली हुई आबादी से सीधे जुड़ता है। वस्तुनिष्ठ परीक्षा में ऐसे प्रश्न प्रायः अनुप्रयोग और उद्देश्य को जोड़कर पूछे जाते हैं, जैसे ई-वाणिज्य में भुगतान गेटवे, अस्पताल में इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड, विद्यालय में लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम या कार्यालय में ई-ऑफिस।

सूचना प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों को समझते समय हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नेटवर्क, डेटाबेस और उपयोगकर्ता-इंटरफेस को अलग-अलग पहचानना जरूरी है। स्कैनर और प्रिंटर जैसे डिवाइस इनपुट-आउटपुट से जुड़े हैं; डेटाबेस नागरिक रिकॉर्ड, बिल, प्रमाण-पत्र और लेन-देन संभालता है; नेटवर्क विभागों और सेवा केंद्रों को जोड़ता है; और सुरक्षा परत पासवर्ड, OTP, एन्क्रिप्शन तथा अभिगम-नियंत्रण से बनती है। सरकारी सेवा में यही घटक मिलकर आवेदन, सत्यापन, भुगतान, स्वीकृति और प्रमाण-पत्र डाउनलोड की शृंखला बनाते हैं।

याद रखने की बात: IT अनुप्रयोग केवल कंप्यूटर चलाने का नाम नहीं, बल्कि डेटा, प्रक्रिया, नेटवर्क और सेवा-डिलीवरी को जोड़ने की व्यवस्था है।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

7 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें