इंटरनेट ऑफ थिंग्स और इसके अनुप्रयोग
मुख्य तथ्य
- IoT सेंसर, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी वाली भौतिक वस्तुओं को जोड़ता है, ताकि वे डेटा इकट्ठा और साझा कर सकें।
- एक सामान्य IoT सिस्टम में डिवाइस, सेंसर या एक्चुएटर, गेटवे या नेटवर्क, एज या क्लाउड प्रोसेसिंग और उपयोगकर्ता ऐप जुड़े होते हैं।
- डेटा का सामान्य प्रवाह माप लेने, उसे भेजने, प्रोसेस करने, निर्णय लेने और ज़रूरत पड़ने पर एक्चुएटर से काम कराने तक चलता है।
- वाई-फाई, ब्लूटूथ, ज़िगबी, मोबाइल नेटवर्क और लोरा-वैन अलग संचार ज़रूरतें पूरी करते हैं, जबकि प्रोटोकॉल डेटा के आदान-प्रदान के नियम तय करते हैं।
- स्मार्ट होम, स्वास्थ्य निगरानी, कृषि, उद्योग और स्मार्ट शहर IoT के सामान्य उपयोग क्षेत्र हैं।
मुख्य बिंदु
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IoT सेंसर, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी वाली भौतिक वस्तुओं को जोड़ता है, ताकि वे डेटा इकट्ठा और साझा कर सकें।
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एक सामान्य IoT सिस्टम में डिवाइस, सेंसर या एक्चुएटर, गेटवे या नेटवर्क, एज या क्लाउड प्रोसेसिंग और उपयोगकर्ता ऐप जुड़े होते हैं।
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डेटा का सामान्य प्रवाह माप लेने, उसे भेजने, प्रोसेस करने, निर्णय लेने और ज़रूरत पड़ने पर एक्चुएटर से काम कराने तक चलता है।
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वाई-फाई, ब्लूटूथ, ज़िगबी, मोबाइल नेटवर्क और लोरा-वैन अलग संचार ज़रूरतें पूरी करते हैं, जबकि प्रोटोकॉल डेटा के आदान-प्रदान के नियम तय करते हैं।
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स्मार्ट होम, स्वास्थ्य निगरानी, कृषि, उद्योग और स्मार्ट शहर IoT के सामान्य उपयोग क्षेत्र हैं।
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सुरक्षा की कमजोरियाँ, लगातार डेटा संग्रह, अलग-अलग मानक, सीमित बिजली और अविश्वसनीय कनेक्शन IoT की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
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इंटरनेट संचार का ढाँचा है; M2M मशीनों के सीधे आदान-प्रदान पर केंद्रित है, जबकि IoT जुड़े डिवाइसों के साथ प्रोसेसिंग और ऐप को भी जोड़ता है।
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IoT का अर्थ और विशेषताएँ
इंटरनेट ऑफ थिंग्स ऐसी भौतिक वस्तुओं का नेटवर्क है जिनमें सेंसर, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी होती है। ये वस्तुएँ अपनी स्थिति या आसपास के माहौल से डेटा इकट्ठा करके नेटवर्क के ज़रिए साझा करती हैं। कोई जुड़ा हुआ डिवाइस तापमान, गति, स्थान या दूसरी मापी गई स्थिति की जानकारी दे सकता है। केवल इंटरनेट से जुड़ जाना किसी वस्तु को पूरा IoT सिस्टम नहीं बनाता। इसमें माप लेना, संचार करना, डेटा प्रोसेस करना और किसी उपयोगी काम में उसका इस्तेमाल करना शामिल होता है। इसकी सामान्य विशेषताएँ अपने-आप डेटा संग्रह, डिवाइस की पहचान, कनेक्टिविटी, दूर से निगरानी और ज़रूरत के अनुसार प्रतिक्रिया हैं। कई डिवाइस सीमित बिजली पर और लगातार मानवीय देखरेख के बिना काम करते हैं। IPv6 की 128-बिट पता व्यवस्था बड़ी संख्या में जुड़े डिवाइसों वाले नेटवर्क के लिए उपयोगी है।
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