इनपुट/आउटपुट डिवाइस और कंप्यूटर हार्डवेयर
मुख्य तथ्य
- 1830 के दशक में चार्ल्स बैबेज ने एनालिटिकल इंजन की रूपरेखा बनाई;
- 1890 की संयुक्त राज्य अमेरिका जनगणना में हर्मन होलेरिथ ने पंच्ड-कार्ड टेबुलेटिंग मशीनों का उपयोग किया;
- 1961 में IBM ने सेलेक्ट्रिक टाइपराइटर पेश किया; उसके कीबोर्ड लेआउट और इलेक्ट्रिक टाइपिंग तंत्र ने बाद के कंप्यूटर इनपुट टर्मिनल को प्रभावित किया।
- 1968 में डगलस एंगेलबार्ट ने कंप्यूटर माउस, हाइपरटेक्स्ट और इंटरैक्टिव कंप्यूटिंग का सार्वजनिक प्रदर्शन किया;
- 1878 में क्रिस्टोफर लैथम शोल्स ने QWERTY कीबोर्ड लेआउट का पेटेंट कराया; यह आज भी अंग्रेज़ी कंप्यूटर कीबोर्ड का सामान्य लेआउट है।
मुख्य बिंदु
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1830 के दशक में चार्ल्स बैबेज ने एनालिटिकल इंजन की रूपरेखा बनाई; उसके अलग स्टोर, मिल, इनपुट और आउटपुट के विचार आधुनिक कंप्यूटर हार्डवेयर समझाने का मानक आधार बने।
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1890 की संयुक्त राज्य अमेरिका जनगणना में हर्मन होलेरिथ ने पंच्ड-कार्ड टेबुलेटिंग मशीनों का उपयोग किया; यह शुरुआती इनपुट, स्टोरेज और मशीन-पठनीय डेटा प्रोसेसिंग का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
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1961 में IBM ने सेलेक्ट्रिक टाइपराइटर पेश किया; उसके कीबोर्ड लेआउट और इलेक्ट्रिक टाइपिंग तंत्र ने बाद के कंप्यूटर इनपुट टर्मिनल को प्रभावित किया।
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1968 में डगलस एंगेलबार्ट ने कंप्यूटर माउस, हाइपरटेक्स्ट और इंटरैक्टिव कंप्यूटिंग का सार्वजनिक प्रदर्शन किया; यह घटना मदर ऑफ ऑल डेमोज़ के रूप में याद की जाती है।
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1878 में क्रिस्टोफर लैथम शोल्स ने QWERTY कीबोर्ड लेआउट का पेटेंट कराया; यह आज भी अंग्रेज़ी कंप्यूटर कीबोर्ड का सामान्य लेआउट है।
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1996 में यूनिवर्सल सीरियल बस मानक पेश हुआ; USB कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, स्कैनर, स्टोरेज ड्राइव और कई अन्य पेरिफेरल का सामान्य इंटरफ़ेस बना।
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1999 में ब्लूटूथ 1.0 विनिर्देश आया; यह कीबोर्ड, माउस, स्पीकर और हेडसेट जैसे कम-दूरी वायरलेस इनपुट और आउटपुट डिवाइस के लिए महत्वपूर्ण है।
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इनपुट और आउटपुट डिवाइस में मूल फर्क क्या है?
इनपुट डिवाइस डेटा को कंप्यूटर के अंदर भेजते हैं, आउटपुट डिवाइस प्रोसेसिंग के बाद सूचना बाहर दिखाते या सुनाते हैं, और कुछ डिवाइस दोनों दिशाओं में काम करते हैं। कंप्यूटर हार्डवेयर में डिवाइस को उसके काम, डेटा की दिशा और कनेक्शन विधि से पहचाना जाता है। इनपुट डिवाइस वे हैं जिनसे उपयोगकर्ता या बाहरी वातावरण से डेटा कंप्यूटर में जाता है, जैसे कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, माइक्रोफ़ोन और कैमरा। आउटपुट डिवाइस वे हैं जिनसे प्रोसेसिंग के बाद सूचना उपयोगकर्ता तक आती है, जैसे मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर और प्रोजेक्टर। कुछ डिवाइस दोनों दिशाओं में काम करते हैं; टचस्क्रीन इनपुट भी लेती है और दृश्य आउटपुट भी दिखाती है, इसलिए इसे संयुक्त इनपुट-आउटपुट डिवाइस कहा जा सकता है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के आधिकारिक बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक परीक्षा-योजना दस्तावेज़ में कंप्यूटर विषय का दूसरा प्रश्नपत्र 100 अंकों का रखा गया है, इसलिए इनपुट-आउटपुट डिवाइस की मूल पहचान परीक्षा में सीधे काम आती है।
उद्देश्यात्मक परीक्षा में प्रश्न अक्सर परिभाषा से अधिक वर्गीकरण पर टिकते हैं। उदाहरण के लिए, स्कैनर कागज़ी चित्र या पाठ को डिजिटल छवि में बदलता है, पर OCR उसी छवि के अक्षरों को संपादन-योग्य पाठ में बदलने की तकनीक है। इसी तरह प्रिंटर आउटपुट डिवाइस है, पर मल्टीफ़ंक्शन प्रिंटर में स्कैनर और कॉपी फ़ंक्शन भी जुड़ सकते हैं। कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर के लिए यह अंतर कक्षा में बच्चों को हार्डवेयर की ठोस पहचान कराने में भी उपयोगी है।
याद रखने की बात: डिवाइस का नाम रटने से अधिक जरूरी है कि वह डेटा को अंदर भेजता है, बाहर दिखाता है या दोनों काम करता है।
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