भारत का भौतिक स्वरूप, जलवायु, अपवाह तंत्र और प्राकृतिक संसाधन
मुख्य तथ्य
- भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है, इसलिए पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीपों को अलग भौतिक इकाइयों के रूप में पढ़ना जरूरी है।
- भारतीय हिमालयी क्षेत्र लगभग 2,500 किमी तक फैला है; हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक इसकी मुख्य समानांतर पट्टियां मानी जाती हैं।
- गंगा बेसिन का भारत में जलग्रहण क्षेत्र 8,61,452 वर्ग किमी है; भाबर, तराई, बांगर और खादर इसी नदी-अवसाद और बाढ़भूमि व्यवस्था से जुड़े हैं।
- नर्मदा बेसिन का क्षेत्रफल 98,796 वर्ग किमी है; विंध्य-सतपुड़ा के बीच इसका पश्चिमवाहिनी रिफ्ट-घाटी मार्ग प्रायद्वीपीय पठार को समझने में उपयोगी है।
- पश्चिमी घाट ताप्ती नदी से कन्याकुमारी तक लगभग 1,500 किमी लंबा ऊंचा और अधिक सतत कगार है, जबकि पूर्वी घाट बड़ी पूर्ववाहिनी नदियों से टूटे हैं।
मुख्य बिंदु
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भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है, इसलिए पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीपों को अलग भौतिक इकाइयों के रूप में पढ़ना जरूरी है।
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भारतीय हिमालयी क्षेत्र लगभग 2,500 किमी तक फैला है; हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक इसकी मुख्य समानांतर पट्टियां मानी जाती हैं।
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गंगा बेसिन का भारत में जलग्रहण क्षेत्र 8,61,452 वर्ग किमी है; भाबर, तराई, बांगर और खादर इसी नदी-अवसाद और बाढ़भूमि व्यवस्था से जुड़े हैं।
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नर्मदा बेसिन का क्षेत्रफल 98,796 वर्ग किमी है; विंध्य-सतपुड़ा के बीच इसका पश्चिमवाहिनी रिफ्ट-घाटी मार्ग प्रायद्वीपीय पठार को समझने में उपयोगी है।
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पश्चिमी घाट ताप्ती नदी से कन्याकुमारी तक लगभग 1,500 किमी लंबा ऊंचा और अधिक सतत कगार है, जबकि पूर्वी घाट बड़ी पूर्ववाहिनी नदियों से टूटे हैं।
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राजस्थान का थार मरुस्थल अरावली के पश्चिम में गर्म शुष्क क्षेत्र है; लूणी, अंतर्देशीय अपवाह, टीले और लवणीय अवसाद इसके प्रमुख संकेत हैं।
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भारत की संशोधित तटरेखा 11,098.81 किमी है; पश्चिमी तट संकरा और पूर्वी तट अधिक चौड़ा तथा डेल्टाई स्वरूप वाला है।
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केंद्रीय जल आयोग ने देश को 22 नदी-बेसिनों में बांटा है, इसलिए राहत और अपवाह को साथ पढ़ना वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए उपयोगी है।
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भारत की प्रमुख भौतिक इकाइयाँ कौन-कौन सी हैं?
भारत की प्रमुख भौतिक इकाइयाँ उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप हैं। राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है, इसलिए इतने बड़े भूभाग में राहत, चट्टान, मिट्टी, अपवाह और जलवायु स्वाभाविक रूप से अलग-अलग ढंग से काम करते हैं। भारत का भौतिक स्वरूप एक समान नहीं है। इसे सामान्यतः छह बड़े भागों में पढ़ा जाता है: उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप। इतने बड़े क्षेत्र में राहत, चट्टान, मिट्टी, अपवाह और जलवायु अलग-अलग ढंग से काम करते हैं। इसलिए परीक्षा में केवल स्थान-नाम याद रखना काफी नहीं होता; यह भी समझना होता है कि कौन-सी इकाई पर्वतीय है, कौन-सी जलोढ़ मैदान है और कौन-सी पुरानी कठोर चट्टानों वाला पठारी भाग है।
उत्तरी पर्वत युवा, ऊंचे और विवर्तनिक रूप से सक्रिय हैं। इनके दक्षिण में सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का विस्तृत जलोढ़ मैदान है, जो नदियों के अवसाद से बना है। प्रायद्वीपीय पठार भारत का पुराना, कठोर और अपेक्षाकृत स्थिर भाग है। पश्चिम में भारतीय मरुस्थल पवन-कार्य, जल-अभाव और लवणीय अवसाद दिखाता है। तटीय मैदान समुद्री किनारों और नदी-डेल्टा से जुड़े हैं, जबकि अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप अलग-अलग द्वीपीय उत्पत्ति रखते हैं।
याद रखने योग्य बात: भौतिक भारत को पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल, तट और द्वीपों की छह आधारभूत इकाइयों में व्यवस्थित करें। इस ढाँचे में हर इकाई को उसकी प्रक्रिया से जोड़ें: पर्वतों में उठान और वलन, मैदानों में नदी-अवसाद, पठारों में पुरानी कठोर चट्टानें, मरुस्थल में पवन और जल-अभाव, तटों में समुद्री क्रिया और डेल्टा, तथा द्वीपों में समुद्रतलीय या प्रवाल मूल।
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