मूल अवधारणाएँ — राष्ट्रीय आय, वृद्धि, बैंकिंग और सार्वजनिक वित्त
मुख्य तथ्य
- बजट 2023-24 के भाषण में भारतीय अर्थव्यवस्था के 9 वर्षों में 10वें से 5वें स्थान पर पहुँचने और प्रति व्यक्ति आय दोगुनी से अधिक होकर 1.97 लाख रुपये होने...
- वित्त वर्ष 2024-25 के प्रथम अग्रिम अनुमान में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 6.4% और नाममात्र वृद्धि 9.7% आँकी गई।
- पंचवर्षीय योजनाएँ 1951 से 2017 तक भारत की योजना-आधारित विकास नीति का प्रमुख ढांचा रहीं, जबकि नीति आयोग 1 जनवरी 2015 को बना।
- भारत एसडीजी सूचकांक 2023-24 में भारत का संयुक्त अंक 2020-21 के 66 से बढ़कर 71 हुआ।
- भारत ने कॉप-26 में 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा।
मुख्य बिंदु
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आर्थिक वृद्धि को वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद, नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद, सकल राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, स्थिर पूंजी निर्माण और उत्पादकता जैसे मापों से पढ़ा जाता है।
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बजट 2023-24 के भाषण में भारतीय अर्थव्यवस्था के 9 वर्षों में 10वें से 5वें स्थान पर पहुँचने और प्रति व्यक्ति आय दोगुनी से अधिक होकर 1.97 लाख रुपये होने का उल्लेख था।
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वित्त वर्ष 2024-25 के प्रथम अग्रिम अनुमान में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 6.4% और नाममात्र वृद्धि 9.7% आँकी गई।
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पंचवर्षीय योजनाएँ 1951 से 2017 तक भारत की योजना-आधारित विकास नीति का प्रमुख ढांचा रहीं, जबकि नीति आयोग 1 जनवरी 2015 को बना।
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भारत एसडीजी सूचकांक 2023-24 में भारत का संयुक्त अंक 2020-21 के 66 से बढ़कर 71 हुआ।
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भारत ने कॉप-26 में 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा।
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मेक इन इंडिया 25 सितंबर 2014 की विनिर्माण-केंद्रित पहल है, जबकि आत्मनिर्भर भारत अभियान 12 मई 2020 को कोविड झटके के दौरान घोषित व्यापक ढांचा था।
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राष्ट्रीय आय और वृद्धि को मापने के मूल तरीके क्या हैं?
राष्ट्रीय आय और वृद्धि को मापने के मूल तरीके वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद, नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद, सकल राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, स्थिर पूंजी निर्माण और उत्पादकता हैं, क्योंकि हर माप अर्थव्यवस्था के अलग पहलू को पकड़ता है। राष्ट्रीय आय और आर्थिक वृद्धि के प्रश्नों में सबसे पहले मापों का अंतर समझना जरूरी है। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद कीमतों के असर को हटाकर उत्पादन की मात्रा बताता है। नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद उत्पादन और कीमत, दोनों को साथ लेकर बाजार-मूल्य पर अर्थव्यवस्था का आकार दिखाता है। सकल राष्ट्रीय आय में विदेश से शुद्ध कारक आय जुड़ती या घटती है, इसलिए यह केवल देश के भीतर बने उत्पादन से थोड़ा अलग संकेत देता है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की राष्ट्रीय आय विज्ञप्ति के अनुसार चालू कीमतों पर शुद्ध राष्ट्रीय आय 2024-25 में 271.44 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि 2023-24 में 246.25 लाख करोड़ रुपये थी।
प्रति व्यक्ति आय कुल आय को आबादी से जोड़कर औसत क्षमता दिखाती है, पर यह हर परिवार की वास्तविक आय नहीं बताती। स्थिर पूंजी निर्माण निवेश और उत्पादन क्षमता से जुड़ा है। उत्पादकता बताती है कि श्रम, पूंजी और तकनीक से उत्पादन कितनी कुशलता से बन रहा है। परीक्षा में इन मापों को मिलाना बड़ी गलती है, क्योंकि प्रत्येक माप अलग सवाल का जवाब देता है।
याद रखने योग्य बात: वास्तविक आँकड़ा उत्पादन की मात्रा के लिए, नाममात्र आँकड़ा बाजार-आकार के लिए और प्रति व्यक्ति आय औसत कल्याण-क्षमता के लिए पढ़ें।
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