फ़ाइल प्रबंधन और आँकड़ा प्रसंस्करण
मुख्य तथ्य
- 1956: IBM ने IBM 305 RAMAC पेश किया, जो ऑनलाइन फ़ाइल स्टोरेज के लिए मैग्नेटिक डिस्क ड्राइव प्रयोग करने वाला पहला व्यावसायिक कंप्यूटर माना जाता है।
- 1980: Microsoft ने Xenix की घोषणा की, जिससे 16-बिट माइक्रोप्रोसेसर वातावरण में Unix-जैसे फ़ाइल-प्रबंधन विचारों की शुरुआती उपस्थिति दिखी।
- 1983: Microsoft MS-DOS 2.0 में सबडायरेक्टरी सुविधा आई, जिससे निजी कंप्यूटरों पर फ़ोल्डर-आधारित फ़ाइल संगठन सामान्य कौशल बना।
- 1989: Phil Katz ने PKWARE के साथ ZIP फ़ाइल फ़ॉर्मेट बनाया, जिससे संपीड़ित संग्रह फ़ाइलें स्टोरेज और ट्रांसफ़र में सामान्य हुईं।
- 1991: Unicode Consortium ने Unicode 1.0 प्रकाशित किया, जिससे कंप्यूटरों को अनेक लेखन प्रणालियों के अक्षर दिखाने का मानक तरीका मिला।
मुख्य बिंदु
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1956: IBM ने IBM 305 RAMAC पेश किया, जो ऑनलाइन फ़ाइल स्टोरेज के लिए मैग्नेटिक डिस्क ड्राइव प्रयोग करने वाला पहला व्यावसायिक कंप्यूटर माना जाता है।
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1980: Microsoft ने Xenix की घोषणा की, जिससे 16-बिट माइक्रोप्रोसेसर वातावरण में Unix-जैसे फ़ाइल-प्रबंधन विचारों की शुरुआती उपस्थिति दिखी।
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1983: Microsoft MS-DOS 2.0 में सबडायरेक्टरी सुविधा आई, जिससे निजी कंप्यूटरों पर फ़ोल्डर-आधारित फ़ाइल संगठन सामान्य कौशल बना।
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1989: Phil Katz ने PKWARE के साथ ZIP फ़ाइल फ़ॉर्मेट बनाया, जिससे संपीड़ित संग्रह फ़ाइलें स्टोरेज और ट्रांसफ़र में सामान्य हुईं।
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1991: Unicode Consortium ने Unicode 1.0 प्रकाशित किया, जिससे कंप्यूटरों को अनेक लेखन प्रणालियों के अक्षर दिखाने का मानक तरीका मिला।
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1993: Microsoft ने Windows NT 3.1 के साथ NTFS पेश किया, जिसने Windows सिस्टमों को जर्नलिंग फ़ाइल सिस्टम, अनुमति और बड़ी फ़ाइलों का समर्थन दिया।
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1996: Windows 95 OSR2 के साथ FAT32 समर्थन उपलब्ध हुआ, जिससे FAT स्टोरेज बड़े डिस्कों तक बढ़ा और रिमूवेबल मीडिया पर सामान्य हुआ।
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डेटा, सूचना और आँकड़ों में बुनियादी फर्क क्या है?
डेटा कच्चे तथ्य होते हैं, सूचना उन्हीं तथ्यों को छाँटकर और अर्थ देकर बनाया गया उपयोगी परिणाम होती है, और आँकड़े सामान्य प्रयोग में डेटा के लिए बोले जाते हैं पर परीक्षा में कच्चे माल और निर्णय-योग्य सूचना का फर्क समझना जरूरी है। कंप्यूटर विज्ञान में डेटा का अर्थ कच्चे तथ्यों से है। किसी कक्षा में विद्यार्थियों के अंक, प्रवेश संख्या, जन्मतिथि, उपस्थिति, मोबाइल नंबर, फ़ोटो, ऑडियो रिकॉर्ड या सेंसर से आया तापमान अपने मूल रूप में डेटा हैं। डेटा अकेला हो तो वह हमेशा निर्णय योग्य नहीं होता। जब उसे छाँटकर, जोड़कर, तुलना करके या सारणी में रखकर अर्थ दिया जाता है, तब वह सूचना बनता है। उदाहरण के लिए, 45, 67 और 82 केवल अंक हैं, पर इन्हीं से “कक्षा का औसत 64.67 है” सूचना बनती है। जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की साक्षरता दर 66.11% थी, इसलिए ऐसे कच्चे जनगणना डेटा को पढ़कर राज्य की शैक्षिक स्थिति पर उपयोगी सूचना बनाई जाती है।
आँकड़ा शब्द सामान्य हिंदी प्रयोग में डेटा के लिए भी आता है, पर परीक्षा में यह ध्यान रखना चाहिए कि डेटा कच्चा माल है और सूचना उसका उपयोगी परिणाम है। डेटा संख्यात्मक भी हो सकता है और असंख्यात्मक भी। नाम, पता और विषय-चयन असंख्यात्मक डेटा हैं, जबकि अंक, आयु और शुल्क राशि संख्यात्मक डेटा हैं। राजस्थान के किसी विद्यालय में कंप्यूटर लैब की मशीनों की सूची डेटा है; कितनी मशीनें कार्यशील हैं, यह प्रसंस्करण के बाद बनी सूचना है।
याद रखें: डेटा तथ्य देता है, सूचना अर्थ देती है और निर्णय सूचना के आधार पर लिया जाता है।
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