डीबीएमएस की मूल बातें
मुख्य तथ्य
- 1970 में आईबीएम के ई. एफ. कॉड ने रिलेशनल मॉडल प्रकाशित किया। इसमें डेटा को रिलेशन के रूप में व्यवस्थित किया गया और यही मॉडल रिलेशनल डेटाबेस का सैद्धां...
- 1974 में आईबीएम के शोधकर्ताओं डोनाल्ड डी. चैंबरलिन और रेमंड एफ. बॉयस ने सीक्वल का वर्णन किया। यही क्वेरी भाषा आगे चलकर एसक्यूएल बनी।
- 1979 में रिलेशनल सॉफ्टवेयर इंक., जिसे अब ऑरेकल के नाम से जाना जाता है, ने एसक्यूएल का पहला व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कार्यान्वयन पेश किया।
- 1986 में एसक्यूएल को एएनएसआई मानक का दर्जा मिला। इससे स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज रिलेशनल डेटाबेस की संरचना तय करने और उनमें क्वेरी करने की सामान्य भा...
- 1992 में एसक्यूएल-92 ने एसक्यूएल मानक का विस्तार किया और उसे अधिक स्पष्ट बनाया।
मुख्य बिंदु
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1970 में आईबीएम के ई. एफ. कॉड ने रिलेशनल मॉडल प्रकाशित किया। इसमें डेटा को रिलेशन के रूप में व्यवस्थित किया गया और यही मॉडल रिलेशनल डेटाबेस का सैद्धांतिक आधार बना।
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1974 में आईबीएम के शोधकर्ताओं डोनाल्ड डी. चैंबरलिन और रेमंड एफ. बॉयस ने सीक्वल का वर्णन किया। यही क्वेरी भाषा आगे चलकर एसक्यूएल बनी।
- 3
1979 में रिलेशनल सॉफ्टवेयर इंक., जिसे अब ऑरेकल के नाम से जाना जाता है, ने एसक्यूएल का पहला व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कार्यान्वयन पेश किया। इससे रिलेशनल डेटाबेस प्रणालियाँ शोध से व्यावसायिक उपयोग की ओर बढ़ीं।
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1986 में एसक्यूएल को एएनएसआई मानक का दर्जा मिला। इससे स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज रिलेशनल डेटाबेस की संरचना तय करने और उनमें क्वेरी करने की सामान्य भाषा बनी।
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1992 में एसक्यूएल-92 ने एसक्यूएल मानक का विस्तार किया और उसे अधिक स्पष्ट बनाया। आज पढ़ाए जाने वाले कई बुनियादी एसक्यूएल कमांड अब भी उसके मूल ढाँचे का पालन करते हैं।
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1995 में मायएसक्यूएल का पहला संस्करण जारी हुआ और बाद में वेब अनुप्रयोगों में इसका व्यापक उपयोग होने लगा।
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1996 में पोस्टग्रेस95 का नाम बदलकर पोस्टग्रेएसक्यूएल रखा गया, ताकि उसकी एसक्यूएल क्षमता और मूल पोस्टग्रेस परियोजना से संबंध स्पष्ट हो।
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डेटा, सूचना और डेटाबेस की आवश्यकता
डेटा का अर्थ कच्चे तथ्य, चिह्न या अवलोकन हैं। रोल नंबर, नाम, जन्म-तिथि, अंक, विषय कोड, मोबाइल नंबर या शुल्क राशि को केवल दर्ज किया जाए, तो वह डेटा है। सूचना वह संसाधित डेटा है जिसका उपयोगकर्ता के लिए कोई अर्थ हो। अंकों की सूची तब सूचना बनती है जब उससे उत्तीर्ण अभ्यर्थी, औसत अंक, सर्वाधिक अंक या जिलेवार उपस्थिति पता चले। एक ही डेटा संदर्भ, सटीकता और व्यवस्था के अनुसार उपयोगी या अनुपयोगी हो सकता है।
कंप्यूटर प्रणालियों को डेटाबेस की आवश्यकता होती है क्योंकि वास्तविक काम में डेटा को बार-बार सहेजना, खोजना, सुधारना और उसकी रिपोर्ट बनाना पड़ता है। रिकॉर्ड अधिक हों और नियमित रूप से बदलते हों, तो विद्यालय, कोचिंग केंद्र, भर्ती बोर्ड, अस्पताल या बैंक बिखरी हुई फ़ाइलों पर निर्भर नहीं रह सकते। डेटाबेस संबंधित डेटा को व्यवस्थित रूप में एक साथ रखता है, ताकि उपयोगकर्ता उसे तेज़ी और एकरूपता से प्राप्त कर सकें। राजस्थान के किसी भर्ती कार्यालय में अभ्यर्थियों का विवरण, परीक्षा केंद्र, प्रवेश-पत्र के रिकॉर्ड और अंक अलग-अलग फ़ाइलों में एक ही सूचना बार-बार लिखे बिना आपस में जुड़े रहने चाहिए।
डेटाबेस केवल एक बड़ी फ़ाइल नहीं है। यह संबंधित डेटा का ऐसा संरचित संग्रह है जिसे देखने, संभालने और बदलने के लिए बनाया जाता है। स्प्रेडशीट में अंकों का साधारण रजिस्टर छोटी डेटा टेबल की तरह काम कर सकता है, लेकिन औपचारिक डेटाबेस संबंधों, डेटा प्रकारों, सुरक्षा, समवर्ती उपयोग और रिकवरी पर अधिक मजबूत नियंत्रण देता है।
परीक्षा के लिए याद रखेंः डेटा कच्चा तथ्य है, सूचना अर्थपूर्ण संसाधित डेटा है और डेटाबेस संबंधित डेटा का व्यवस्थित संग्रह है।
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