मुख्य तथ्य

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 भारत में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल हस्ताक्षर और कई कंप्यूटर-संबंधी अपराधों का मुख्य कानून है।
  • Morris वॉर्म घटना के बाद 1988 में CERT Coordination Center बना, ताकि सुरक्षा घटनाओं पर समन्वित प्रतिक्रिया मजबूत हो।
  • 2004 में CERT-In भारत की राष्ट्रीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया संस्था के रूप में बनी, जो साइबर घटना-समन्वय और सलाह जारी करती है।
  • 1986 का Brain वायरस IBM PC-संगत कंप्यूटरों का पहला वायरस माना जाता है और फ़्लॉपी डिस्क से फैलता था।
  • 1988 का Morris वॉर्म शुरुआती बड़े इंटरनेट वॉर्मों में गिना जाता है और इसने दिखाया कि अपने-आप फैलने वाला कोड जुड़े सिस्टमों को बाधित कर सकता है।

मुख्य बिंदु

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    सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 भारत में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल हस्ताक्षर और कई कंप्यूटर-संबंधी अपराधों का मुख्य कानून है।

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    Morris वॉर्म घटना के बाद 1988 में CERT Coordination Center बना, ताकि सुरक्षा घटनाओं पर समन्वित प्रतिक्रिया मजबूत हो।

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    2004 में CERT-In भारत की राष्ट्रीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया संस्था के रूप में बनी, जो साइबर घटना-समन्वय और सलाह जारी करती है।

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    1986 का Brain वायरस IBM PC-संगत कंप्यूटरों का पहला वायरस माना जाता है और फ़्लॉपी डिस्क से फैलता था।

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    1988 का Morris वॉर्म शुरुआती बड़े इंटरनेट वॉर्मों में गिना जाता है और इसने दिखाया कि अपने-आप फैलने वाला कोड जुड़े सिस्टमों को बाधित कर सकता है।

  6. 6

    2000 का ILOVEYOU प्रकोप ईमेल अटैचमेंट से फैला और मैलवेयर-नियंत्रण में सोशल इंजीनियरिंग को बड़ा परीक्षा-विषय बना गया।

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    2017 के WannaCry रैनसमवेयर हमले ने अपडेट न किए गए Windows सिस्टमों का फायदा उठाया और अपडेट तथा बैकअप की अहमियत स्पष्ट की।

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    ISO/IEC 27001 संगठित जोखिम-नियंत्रण पर आधारित सूचना-सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक है।

कंप्यूटर सुरक्षा का मूल मतलब क्या है?

कंप्यूटर सुरक्षा का मूल मतलब कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क, सॉफ़्टवेयर, फ़ाइलों और डेटा को अनधिकृत पहुंच, बदलाव, नष्ट होने, चोरी और दुरुपयोग से बचाना है। किसी स्कूल, कार्यालय या घर के कंप्यूटर में केवल मशीन सुरक्षित होना काफी नहीं है; उपयोगकर्ता की आदतें, पासवर्ड, अपडेट, बैकअप और नेटवर्क-कनेक्शन भी सुरक्षा का हिस्सा होते हैं। वस्तुनिष्ठ परीक्षा में सुरक्षा को अक्सर गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता के त्रिकोण से समझाया जाता है। गोपनीयता का अर्थ है कि डेटा केवल अधिकृत व्यक्ति देख सके। अखंडता का अर्थ है कि डेटा बिना अनुमति बदला न जाए। उपलब्धता का अर्थ है कि जरूरत पड़ने पर सिस्टम और डेटा उपयोग के लिए मौजूद रहें। प्रेस सूचना ब्यूरो के 2026 CERT-In पृष्ठभूमि-लेख के अनुसार केंद्रीय बजट 2025-26 में साइबर सुरक्षा के लिए ₹782 करोड़ रखे गए थे, इसलिए यह विषय केवल कंप्यूटर-लैब की सावधानी नहीं बल्कि राष्ट्रीय डिजिटल ढांचे की जरूरत भी है।

सुरक्षा खतरे बाहरी और अंदरूनी दोनों हो सकते हैं। बाहरी खतरे में मैलवेयर, फिशिंग, असुरक्षित वेबसाइट, नकली ईमेल, संक्रमित पेन ड्राइव और कमजोर वाई-फ़ाई शामिल हैं। अंदरूनी खतरे में कमजोर पासवर्ड, साझा खाते, बिना लॉक छोड़ा गया कंप्यूटर, गलत अनुमति, पुराना सॉफ़्टवेयर और लापरवाह फ़ाइल-साझाकरण आते हैं। राजस्थान के किसी विद्यालय की कंप्यूटर लैब में एक संक्रमित USB ड्राइव कई कंप्यूटरों में वायरस फैला सकती है, इसलिए सुरक्षा केवल इंटरनेट से जुड़ी समस्या नहीं है।

याद रखें: कंप्यूटर सुरक्षा का लक्ष्य डेटा को सही व्यक्ति के लिए सुरक्षित, सही और उपलब्ध रखना है।

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