आधारभूत प्रोग्रामिंग अवधारणाएँ
मुख्य तथ्य
- एडा लवलेस को 19वीं शताब्दी में एनालिटिकल इंजन के लिए लिखे गए निर्देशों के कारण प्रारंभिक प्रोग्रामिंग विचार से जोड़ा जाता है।
- 1957 में फ़ोरट्रान का व्यापक उपयोग वैज्ञानिक और संख्यात्मक गणना के लिए उच्च-स्तरीय भाषा के रूप में शुरू हुआ।
- 1971-73 के दौरान डेनिस रिची ने सी भाषा विकसित की; प्रणाली प्रोग्रामिंग और ऑपरेटिंग सिस्टम विकास में इसका ऐतिहासिक महत्त्व है।
मुख्य बिंदु
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चार्ल्स बैबेज को आधुनिक कंप्यूटर की आधार-कल्पना से जोड़ा जाता है, क्योंकि उनके एनालिटिकल इंजन में गणना, स्मृति और नियंत्रण जैसी मूल धारणाएँ दिखती हैं।
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एडा लवलेस को 19वीं शताब्दी में एनालिटिकल इंजन के लिए लिखे गए निर्देशों के कारण प्रारंभिक प्रोग्रामिंग विचार से जोड़ा जाता है।
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जॉन वॉन न्यूमन की संग्रहित-प्रोग्राम अवधारणा में निर्देश और डेटा एक ही मेमोरी में रखे जाते हैं; आधुनिक कंप्यूटर संगठन इसी सोच से प्रभावित है।
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1957 में फ़ोरट्रान का व्यापक उपयोग वैज्ञानिक और संख्यात्मक गणना के लिए उच्च-स्तरीय भाषा के रूप में शुरू हुआ।
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1971-73 के दौरान डेनिस रिची ने सी भाषा विकसित की; प्रणाली प्रोग्रामिंग और ऑपरेटिंग सिस्टम विकास में इसका ऐतिहासिक महत्त्व है।
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कंपाइलर पूरे स्रोत प्रोग्राम को मशीन भाषा में बदलता है, जबकि इंटरप्रेटर निर्देशों को क्रमशः पढ़कर चलाता है।
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एल्गोरिद्म सीमित, स्पष्ट और क्रमबद्ध चरणों का समूह है; फ़्लोचार्ट उन्हीं चरणों को मानक प्रतीकों से दृश्य रूप में दिखाता है।
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प्रोग्राम और प्रोग्रामिंग में मूल अंतर क्या है?
प्रोग्राम किसी समस्या को हल कराने के लिए लिखे गए निर्देशों का व्यवस्थित समूह है, जबकि प्रोग्रामिंग उन निर्देशों को सही क्रम, सही भाषा और सही तर्क के साथ बनाने, जाँचने और सुधारने की पूरी प्रक्रिया है। कंप्यूटर अपने-आप निर्णय लेने वाला मनुष्य नहीं है; वह दिए गए निर्देशों को बहुत तेज़ी से और सटीक क्रम में चलाने वाली मशीन है। किसी समस्या को हल कराने के लिए जो निर्देश लिखे जाते हैं, उन्हें प्रोग्राम कहा जाता है। उन निर्देशों को सही क्रम, सही भाषा और सही तर्क के साथ लिखने की प्रक्रिया प्रोग्रामिंग है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के आधिकारिक बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक पाठ्यक्रम में विषय-पत्र में 100 प्रश्न बताए गए हैं, इसलिए ऐसे मूल अंतर परीक्षा में सीधे पूछे जा सकते हैं। RSSB बेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर जैसे वस्तुनिष्ठ पेपर में प्रश्न अक्सर इसी मूल अंतर पर आते हैं: डेटा क्या है, निर्देश क्या है, प्रोग्राम क्या है और आउटपुट कैसे बनता है।
प्रोग्रामिंग में समस्या को पहले समझा जाता है, फिर इनपुट, प्रोसेसिंग और आउटपुट तय किए जाते हैं। उदाहरण के लिए विद्यालय की उपस्थिति निकालने में इनपुट विद्यार्थी की उपस्थिति संख्या और कुल कार्य-दिवस होंगे, प्रोसेसिंग प्रतिशत निकालना होगा और आउटपुट उपस्थिति प्रतिशत होगा। इस तरह प्रोग्रामिंग केवल कोड लिखना नहीं, बल्कि समस्या को कंप्यूटर के लिए साफ़ चरणों में बदलना है।
याद रखने योग्य बात: प्रोग्राम निर्देशों का व्यवस्थित समूह है, जबकि प्रोग्रामिंग उन निर्देशों को बनाने, जाँचने और सुधारने की पूरी प्रक्रिया है।
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