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REET लेवल 2 अध्ययन सामग्री

संस्कृत समास

राजस्थान बोर्ड रीट संस्कृत समास के पाँच नाम देती है; मुख्य परिवार चार हैं (तत्पुरुष में कर्मधारय व द्विगु)।

मुख्य बिंदु

  • राजस्थान बोर्ड रीट संस्कृत समास के पाँच नाम देती है; मुख्य परिवार चार हैं (तत्पुरुष में कर्मधारय व द्विगु)।
  • समास दो पदों को एक शब्द बनाता है और विभक्ति-सम्बन्ध छोड़ता है; विग्रह उसका उलटा विस्तार है।
  • प्रधान से पहचान: पहला पद (अव्यय) अव्ययीभाव; अन्तिम पद तत्पुरुष; बाहरी अर्थ बहुव्रीहि; दोनों समान द्वन्द्व।
  • कर्मधारय समान विभक्ति विशेषण-विशेष्य ("महापुरुषः"); द्विगु का पहला पद संख्या ("त्रिभुवनम्")।
  • बहुव्रीहि विग्रह में "यस्य" चाहिए; यही परीक्षण इसे कर्मधारय से अलग करता है।
  • सन्धि ध्वनि-स्थल का परिवर्तन; समास अर्थ-संक्षेपण; "हिमालयः" में दोनों साथ हो सकते हैं।
  • प्रमुख उदाहरण: "यथाशक्ति", "राजपुरुषः", "पीताम्बरः", "दशाननः", "रामलक्ष्मणौ", "मातापितरौ"।
  • रीट रूप: प्रकार बताना, विग्रह चुनना, विग्रह से समास, सुमेलन, समास-सन्धि अभिकथन-कारण।
  • सामान्य फंदे: बहुव्रीहि को कर्मधारय, द्विगु को कर्मधारय, तत्पुरुष विग्रह में गलत विभक्ति।
  • निर्माण से पहले पहचान; कक्षा 6 से 8 हेतु प्रतिवर्त बैठाएँ — विग्रह लिखो, प्रधान बताओ।

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पाठ्यक्रम सीमा

राजस्थान बोर्ड की रीट स्तर 2 संस्कृत (वैकल्पिक भाषा 2) सूची समास को मुख्य व्याकरण-अंगों में रखती है और पाँच नाम देती है: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि और द्वन्द्व। कर्मधारय और द्विगु तत्पुरुष के ही प्रकार हैं, इसलिए मुख्य परिवार चार हैं। सूची पहचान और विग्रह माँगती है, सम्पूर्ण पाणिनीय सूत्र-तंत्र नहीं। समास का अर्थ है दो या अधिक विभक्ति-युक्त पदों का एक संक्षिप्त पद में मेल; विग्रह उसका उलटा है, जिसमें...

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