REET लेवल 2 अध्ययन सामग्री
संस्कृत अलंकार एवं छंद
राजस्थान बोर्ड रीट संस्कृत केवल अलंकार-छंद की परिभाषा एवं उदाहरण माँगती है, पूर्ण काव्य-सिद्धान्त नहीं।
मुख्य बिंदु
- राजस्थान बोर्ड रीट संस्कृत केवल अलंकार-छंद की परिभाषा एवं उदाहरण माँगती है, पूर्ण काव्य-सिद्धान्त नहीं।
- शब्दालंकार (अनुप्रास, यमक, श्लेष) पर्यायवाची बदलने पर चमत्कार खोते हैं; अर्थालंकार बनाए रखते हैं।
- उपमा में "इव/यथा" वाचक रहता; रूपक छोड़ता; उत्प्रेक्षा "मन्ये/शङ्के" से बदलती है।
- अतिशयोक्ति स्वाभाविक सीमा से बढ़ाती है; दृष्टान्त कथन और समानान्तर उदाहरण बिम्बित करता है।
- लघु एक मात्रा, गुरु दो; संयुक्ताक्षर, अनुस्वार या विसर्ग से पूर्व ह्रस्व स्वर गुरु हो जाता है।
- मात्रिक छंद कुल मात्रा गिनता है; वर्णिक अर्थात् वृत्त आठ त्र्यक्षर गणों से अक्षर निश्चित करता है।
- आठ गण हैं य म त र ज भ न स, सूत्र "यमाताराजभानसलगम्" से याद रहते हैं।
- प्रमुख वृत्त: अनुष्टुप् बत्तीस अक्षर; इन्द्रवज्रा ग्यारह "त-त-ज-ग-ग"; मन्दाक्रान्ता सत्रह।
- सामान्य फंदे: रूपक को उपमा, अनुप्रास को यमक, और संयुक्ताक्षर से पूर्व गुरु चूकना।
- नाम से पहले पहचान सिखाएँ, वायगोत्स्की, ब्रूनर, पियाजे, कृशेन पर आधारित कक्षा 6 से 8 हेतु।
आगे पढ़ें
पूरा REET नोट खोलें
सार्वजनिक प्रीव्यू पाठ्यक्रम दृष्टि, कक्षा उपयोग, मुख्य बिंदु और स्रोत पथ दिखाता है। REET अध्ययन पैक पूरा नोट और संबंधित अभ्यास खोलता है।
अध्ययन सामग्री
पाठ्यक्रम सीमा
राजस्थान बोर्ड की रीट स्तर 2 संस्कृत (वैकल्पिक भाषा 2) सूची अलंकार और छंद को एक उच्च-बारंबारता इकाई के रूप में साथ रखती है और केवल दो बातें माँगती है: परिभाषा और उदाहरण। यह काव्यप्रकाश या साहित्यदर्पण का सम्पूर्ण ध्वनि-रस सिद्धान्त नहीं माँगती, न ही वृत्तरत्नाकर की पूरी छंद-तालिका। अतः सीमा यही है: कक्षा 6 से 8 का शिक्षक प्रत्येक नामित अलंकार और छंद की परिभाषा दे सके, उसे छोटे श्लोक में पहचान सके, और एक स्पष्ट शास्त्रीय...
