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REET लेवल 1 अध्ययन सामग्री

समास, उपसर्ग, प्रत्यय (संस्कृत) — REET स्तर 1 के लिए प्राथमिक पहचान

REET स्तर 1 की प्राथमिक कक्षाओं में समास, उपसर्ग और प्रत्यय केवल पहचान-स्तर पर पढ़ाए जाते हैं। समास का अर्थ है दो या अधिक पूरे शब्दों को जोड़कर एक समस्त शब्द बनाना; बच्चों को इसके चार मूल भेद — तत्पुरुष, द्वंद्व, कर्मधारय और बहुव्रीहि — पहचानने हैं। उपसर्ग वह छोटा शब्दांश है जो धातु से पूर्व लगकर अर्थ बदलता है; प्राथमिक सूची में लगभग 8 से 10 अधिक-प्रयुक्त उपसर्ग आते हैं, जैसे प्र, अनु, वि, सम्, उप, अधि, अति, परि और निर्। प्रत्यय वह अंश है जो धातु या शब्द के बाद लगता है; विद्यार्थियों को केवल कृत् प्रत्यय (धातु के बाद) और तद्धित प्रत्यय (संज्ञा या विशेषण के बाद) में अंतर पहचानना है। कक्षा 1 से 5 तक औपचारिक वर्गीकरण या सूत्र-उद्धरण की अपेक्षा नहीं की जाती।

मुख्य बिंदु

  • REET स्तर 1 (कक्षा 1 से 5) में संस्कृत समास, उपसर्ग और प्रत्यय केवल पहचान-स्तर पर पढ़ाए जाते हैं; सूत्र या पूर्ण व्युत्पत्ति की अपेक्षा नहीं है।
  • समास दो या अधिक पूरे शब्दों को जोड़कर एक समस्त शब्द बनाता है; प्राथमिक स्तर के चार भेद हैं — तत्पुरुष, द्वंद्व, कर्मधारय और बहुव्रीहि।
  • उपसर्ग धातु से पूर्व लगकर उसका अर्थ बदलता है; प्राथमिक सीमा सर्वाधिक प्रयुक्त 8 से 10 उपसर्गों तक है, जैसे प्र, अनु, वि, सम्, उप।
  • प्रत्यय धातु या शब्द के बाद लगता है; प्राथमिक भेद यही है कि कृत् प्रत्यय धातु के बाद और तद्धित प्रत्यय संज्ञा या विशेषण के बाद लगता है।
  • विद्यार्थी के लिए स्थान-नियम तय है — उपसर्ग धातु से पहले, प्रत्यय धातु के बाद; इन दो स्थानों को आपस में बदलना प्राथमिक स्तर की सबसे प्रचलित त्रुटि है।

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सार्वजनिक प्रीव्यू पाठ्यक्रम दृष्टि, कक्षा उपयोग, मुख्य बिंदु और स्रोत पथ दिखाता है। REET अध्ययन पैक पूरा नोट और संबंधित अभ्यास खोलता है।

अध्ययन सामग्री

मुख्य बिंदु

REET स्तर 1 की प्राथमिक कक्षाओं में समास, उपसर्ग और प्रत्यय केवल पहचान-स्तर पर पढ़ाए जाते हैं। समास का अर्थ है दो या अधिक पूरे शब्दों को जोड़कर एक समस्त शब्द बनाना; बच्चों को इसके चार मूल भेद — तत्पुरुष, द्वंद्व, कर्मधारय और बहुव्रीहि — पहचानने हैं। उपसर्ग वह छोटा शब्दांश है जो धातु से पूर्व लगकर अर्थ बदलता है; प्राथमिक सूची में लगभग 8 से 10 अधिक-प्रयुक्त उपसर्ग आते हैं, जैसे प्र, अनु, वि, सम्, उप, अधि, अति, परि और निर्।...

कक्षा में उपयोग

  • शिक्षार्थी स्तर: कक्षा 1 से 5
  • सामान्य भ्रम: प्राथमिक स्तर पर बच्चे प्रायः समझते हैं कि हर लम्बा संस्कृत शब्द समास है, और कभी-कभी शब्द के आरम्भ में लगे किसी भी छोटे अंश को उपसर्ग कह देते हैं, जिससे संज्ञा-आधार और उपसर्ग आपस में मिल जाते हैं।
  • शिक्षक कार्य: शिक्षक शब्द को रंगीन "/" से लिखकर जोड़ का स्थान दिखाता है, शब्द-निर्माण का नाम तभी बताता है जब जोड़ स्पष्ट दिख जाए, और समास-निर्मित शब्द को प्रत्यय-निर्मित शब्द के साथ-साथ रखकर अंतर दिखाता है।
  • अधिगम गतिविधि: एक सरल तीन-स्तंभ दीवार-पट्ट (समास, उपसर्ग, प्रत्यय) जिसमें प्रत्येक स्तंभ में तीन से पाँच प्राथमिक उदाहरण हों, बच्चे को दैनिक संदर्भ देता है; मौखिक अभ्यास के लिए शब्द + जोड़ + प्रकार वाले फ्लैश-कार्ड भी जोड़े जा सकते हैं।
  • आकलन जांच: कालांश के अंत में शिक्षक दो नए छोटे संस्कृत शब्द दिखाकर बच्चे से कहता है कि वह दीवार-पट्ट के उस स्तंभ की ओर इशारा करे जिसमें शब्द जाता है; इस स्तर पर सही इशारा ही पर्याप्त है।

सामान्य प्रश्न जाल

  • पाठक जैसा लम्बा शब्द समास के विकल्प के रूप में रखा जाता है; जाल यह धारणा है कि लम्बा संस्कृत शब्द सदा समास होता है।
  • एक विकल्प पीताम्बर को कर्मधारय बताता है; जाल आरम्भ में लगे रंग-वाचक पद का उपयोग करता है, परन्तु पीताम्बर वस्तुतः समस्त शब्द से बाहर किसी व्यक्ति की ओर संकेत करता है।
  • एक विकल्प बालक को उपसर्ग-निर्मित मान लेता है; जाल इस भूल पर टिका है कि बाल संज्ञा-आधार है और क प्रत्यय है।
  • कथन-कारण प्रश्न में स्थान-नियम बदला जाता है, और कहा जाता है कि उपसर्ग धातु के बाद लगता है; जाल प्रत्यय की वास्तविक स्थिति की नक़ल करता है।
  • मिलान-सूची में राजपुत्र को बहुव्रीहि के नीचे रख दिया जाता है; जाल विभक्ति-संबंध की उस झलक को छिपाता है जो तत्पुरुष का संकेत है।

प्राथमिक स्तर पर इस विषय का महत्व

REET स्तर 1 के पेपर में कक्षा 1 से 5 के संस्कृत शिक्षक के लिए समास, उपसर्ग और प्रत्यय अभी पूर्ण व्याकरण-इकाइयाँ नहीं हैं। पाठ्यक्रम में ये केवल पहचान-स्तर के विषय के रूप में आते हैं। बच्चे से अपेक्षित है कि वह संस्कृत के किसी छोटे शब्द को देखकर बता सके कि शब्द-निर्माण किस प्रकार का है और किसी परिचित उदाहरण से उसका मेल कर सके। शिक्षक न तो लम्बे पाणिनि-सूत्र पढ़ाता है, न ही प्रत्येक समस्त शब्द का विग्रह करवाता है, और न ही...

  • तत्पुरुष — दूसरा पद प्रधान होता है और पहला पद किसी विभक्ति-संबंध को छिपाए रखता है। उदाहरण: राजपुत्र = राजा का पुत्र। दोनों पदों के बीच "का" या "से" का संबंध रहता है। - द्वंद्व — "और" से जुड़े दो समान दर्जे के पद। उदाहरण: माता-पिता; रामलक्ष्मणौ = राम और लक्ष्मण। दोनों पद बराबर भार रखते हैं। - कर्मधारय — पहला पद विशेषण बनकर दूसरे पद की विशेषता बताता है। उदाहरण: नीलकमल = नीला कमल; महाराजा = महान् राजा। - बहुव्रीहि — समस्त शब्द अपने सदस्यों से बाहर किसी तीसरी वस्तु पर संकेत करता है। उदाहरण: पीताम्बर = पीला वस्त्र पहनने वाला (विष्णु); शब्द वस्त्र के विषय में नहीं, उस व्यक्ति के विषय में है जो वस्त्र पहनता है। प्राथमिक पहचान के लिए बच्चे से न विभक्ति लिखने की अपेक्षा है और न सूत्र उद्धृत करने की। बच्चा राजपुत्र देखकर कह दे कि "यह दो शब्दों का मेल है; यह राजा के पुत्र की बात कहता है" — यही पर्याप्त है। ## उपसर्ग — अर्थ बदलने वाले पूर्व-अंश
  • कृत् प्रत्यय — सीधे धातु के बाद लगने वाला प्रत्यय। उदाहरण: पठ् + अक → पाठक (पढ़ने वाला); लिख् + अक → लेखक (लिखने वाला); गम् + अन → गमन (जाना)। - तद्धित प्रत्यय — संज्ञा या विशेषण के बाद लगने वाला प्रत्यय। उदाहरण: मधुर + ता → मधुरता; लघु + त्व → लघुत्व; ग्राम + इक → ग्रामिक। इस स्तर पर बच्चे के लिए नियम छोटा है: यदि प्रत्यय धातु के बाद लगा है, तो वह कृत् है; यदि वह संज्ञा या विशेषण के बाद लगा है, तो वह तद्धित है। ## कक्षा 1 से 5 के लिए उपयोगी कक्षा-प्रवाह
  • बच्चे प्रायः समझते हैं कि हर लम्बा संस्कृत शब्द समास है। उन्हें पाठक दिखाएँ — लम्बा है किन्तु प्रत्यय से बना है, दो शब्दों के मेल से नहीं। - बच्चे कई बार शब्द के आरम्भ में लगे किसी भी छोटे अंश को उपसर्ग कह देते हैं। उन्हें बालक दिखाएँ और समझाएँ कि बाल संज्ञा-आधार है और क प्रत्यय है; यहाँ कोई उपसर्ग नहीं है। - कर्मधारय और बहुव्रीहि में बच्चों को भ्रम होता है क्योंकि दोनों में आरम्भ पर रंग या गुण-वाचक पद रहता है। शिक्षक यह पूछकर परखे — "समस्त शब्द किसकी ओर संकेत करता है?" यदि वह दोनों सदस्यों में से किसी एक की ओर जाता है (नीलकमल अब भी एक कमल ही है), तो वह कर्मधारय है; यदि वह बाहर जाता है (पीताम्बर वस्त्र पर नहीं, व्यक्ति पर संकेत करता है), तो वह बहुव्रीहि है। प्राथमिक स्तर पर ये सुधार बोलकर, मित्रवत और छोटे रखे जाते हैं। बच्चा पहले से अधिक स्पष्ट अनुमान लेकर लौटे — लम्बा नियम लेकर नहीं। ## REET स्तर 1 के प्रश्न प्रायः कैसे आते हैं

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