REET लेवल 1 अध्ययन सामग्री
गणित में मूल्यांकन एवं उपचारात्मक शिक्षण — REET स्तर 1
REET स्तर 1 गणित में मूल्यांकन एवं उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ है कक्षा 1 से 5 के बच्चों के अंकगणित तथा प्रारंभिक संख्या-बोध के अधिगम का दैनिक, बाल-मित्र आकलन और उसके बाद त्रुटि-केंद्रित लक्षित शिक्षण। NCF 2005 तथा RTE अधिनियम 2009 के अंतर्गत सतत व्यापक मूल्यांकन (CCE) से अपेक्षित है कि शिक्षिका वर्षभर अवलोकन, मौखिक कार्य, कार्यपत्रक, परियोजना तथा विद्यार्थी-डायरी का उपयोग करे। स्थान-मान की भूल, घटाव में गलत उधार, जोड़ में हासिल छोड़ देना जैसी सामान्य अंकगणितीय त्रुटियाँ व्यवस्थित संकेत मानी जाती हैं, असावधानी नहीं; उनके बाद ठोस सामग्री, लघु-समूह सहायता तथा पुन: आकलन के साथ नए सिरे से शिक्षण किया जाता है।
मुख्य बिंदु
- प्राथमिक गणित में सतत और व्यापक मूल्यांकन बाल-मित्र होता है: यह पूरे वर्ष चलता है और एक बड़ी परीक्षा के बजाय अनेक छोटे उपकरणों का उपयोग करता है।
- रचनात्मक आकलन अधिगम के दौरान सहारा देता है; योगात्मक आकलन इकाई, सत्र या वर्षांत में अधिगम को प्रमाणित करता है।
- स्थान-मान भ्रम, गलत उधार, हासिल छोड़ना और संख्या-नाम बेमेल जैसी सामान्य अंकगणितीय त्रुटियाँ छूटी हुई अवधारणाओं के व्यवस्थित संकेत हैं।
- उपचारात्मक चक्र अवलोकन तथा त्रुटि-विश्लेषण से शुरू होता है, ठोस सामग्री से नियोजित पुनः शिक्षण तक जाता है और अंत में पुनः आकलन तथा अभिलेख तक पहुँचता है।
- राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए सतत और व्यापक मूल्यांकन की अपेक्षा करते हैं; 2019 संशोधन के बाद कक्षा 5 और 8 में नियमित परीक्षा, अतिरिक्त शिक्षण और पुनः परीक्षा के प्रावधान हैं, इसलिए आकलन और उपचार अनिवार्य बने रहते हैं।
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अध्ययन सामग्री
मुख्य बिंदु
REET स्तर 1 गणित में मूल्यांकन एवं उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ है कक्षा 1 से 5 के बच्चों के अंकगणित तथा प्रारंभिक संख्या-बोध के अधिगम का दैनिक, बाल-मित्र आकलन और उसके बाद त्रुटि-केंद्रित लक्षित शिक्षण। NCF 2005 तथा RTE अधिनियम 2009 के अंतर्गत सतत व्यापक मूल्यांकन (CCE) से अपेक्षित है कि शिक्षिका वर्षभर अवलोकन, मौखिक कार्य, कार्यपत्रक, परियोजना तथा विद्यार्थी-डायरी का उपयोग करे। स्थान-मान की भूल, घटाव में गलत उधार, जोड़ में...
कक्षा में उपयोग
- शिक्षार्थी स्तर: कक्षा 1 से 5
- सामान्य भ्रम: बच्चे सोचते हैं कि अंकगणित की हर गलती लापरवाही है और हर गलत उत्तर का अर्थ है कि वे गणित में कमज़ोर हैं।
- शिक्षक कार्य: प्रत्येक दोहराई गई गलती को संकेत मानें। शांति से बच्चे को उसकी त्रुटि का प्रतिमान दिखाएँ और ठीक-ठीक बताएँ कि किस चरण को नए सिरे से अभ्यास चाहिए।
- अधिगम गतिविधि: बंडल-तीलियों तथा इकाइयों वाली स्थान-मान चटाई का उपयोग करें। उसी सवाल को सामग्री के साथ दोबारा करें ताकि बच्चा हासिल या उधार को लिखने से पहले प्रत्यक्ष होते देखे।
- आकलन जांच: अगले दिन उसी प्रकार के दो नए सवाल दें और बच्चे से चरण ऊँची आवाज़ में समझाने को कहें; देखें कि पहले वाला त्रुटि-प्रतिमान बदला है या नहीं।
सामान्य प्रश्न जाल
- CCE को पूरे वर्ष चलने वाली बहु-उपकरण प्रक्रिया मानने के बजाय एक आवधिक परीक्षा मान लेना।
- RTE अधिनियम 2009 के अनुत्तीर्ण-रहित प्रावधान का अर्थ यह समझ लेना कि शिक्षिका को प्राथमिक बच्चों का आकलन ही नहीं करना है।
- अंकगणित की हर त्रुटि को लापरवाही मानना, उसे स्थान-मान, समूहन या बोध-संबंधी त्रुटि के रूप में निदान न करना।
- बच्चों के बीच तुलना या दंड को उपचारात्मक उत्तर मान लेना, जो CCE की बाल-मित्र भावना के विरुद्ध है।
- निदानात्मक परीक्षण तथा योगात्मक परीक्षण को मिला देना और एक ही लंबी परीक्षा को दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोग करना।
यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है
राजस्थान के प्राथमिक शिक्षक के लिए मूल्यांकन एवं उपचारात्मक शिक्षण REET स्तर 1 गणित पाठ्यक्रम का सबसे व्यावहारिक भाग है। शिक्षक संख्या-बोध, स्थान-मान, समूहन के साथ जोड़ तथा घटाव, भिन्न, मापन और सरल आँकड़ा-व्यवहार पढ़ाते समय यह जाँचे बिना आगे नहीं बढ़ सकता कि प्रत्येक बच्चे ने वास्तव में क्या समझा है। REET स्तर 1 का प्रश्न-पत्र इसी वास्तविक शिक्षक-कार्य की परीक्षा लेता है। उससे अपेक्षा होती है कि अभ्यर्थी जान सके कि कक्षा 1 से...
