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अध्ययन सामग्री

REET लेवल 1 अध्ययन सामग्री

हिन्दी में आकलन, सतत व्यापक मूल्यांकन एवं उपचारात्मक शिक्षण

प्राथमिक स्तर पर हिन्दी में आकलन, सतत व्यापक मूल्यांकन तथा उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ है — विद्यालय-आधारित, निरंतर, व्यापक चक्र जिसमें शिक्षक सत्रभर सुनना, बोलना, पढ़ना तथा लिखना — चारों कौशलों के साक्ष्य संग्रह करता है, उन विशिष्ट बिंदुओं को पहचानता है जहाँ विद्यार्थी टूटता है, और आगे बढ़ने से पूर्व लघु, केंद्रित उपचारात्मक चक्र चलाता है। यह पद्धति RTE 2009 तथा NCF 2005 पर आधारित है, सरल उपकरणों — उपाख्यानिक अभिलेख, विद्यार्थी पोर्टफोलियो, जाँच-सूचियाँ तथा सहपाठी-व-स्वयं-समीक्षा — का प्रयोग करती है, तथा एकल सत्रांत परीक्षा या सार्वजनिक क्रम-निर्धारण को स्पष्टतः टालती है। आकलन-साक्ष्य सीधे अगली शिक्षण-योजना तथा कक्षा 1 से 5 के विद्यार्थियों के लिए आवश्यक उपचार को संचालित करता है।

मुख्य बिंदु

  • प्राथमिक हिन्दी में CCE के चार रूप हैं — सतत, व्यापक, संरचनात्मक, विद्यालय-आधारित — RTE 2009 के अंतर्गत।
  • चार नामित प्राथमिक हिन्दी कठिनाइयाँ हैं — वर्ण-पहचान, मात्रा-त्रुटि, धीमी वाचन-गति तथा कमज़ोर शब्दावली-स्मरण।
  • नैदानिक-उपचारात्मक चक्र चार-चरणीय है — ध्यान, निदान, लघु उपचारात्मक चक्र, पुनः जाँच तथा अभिलेख-अद्यतन।
  • मान्यता-प्राप्त विद्यालय-आधारित संरचनात्मक उपकरण हैं — उपाख्यानिक अभिलेख, विद्यार्थी पोर्टफोलियो, सरल जाँच-सूचियाँ तथा सहपाठी-व-स्वयं-समीक्षा प्रविष्टियाँ।
  • प्रत्येक नामित कठिनाई के साथ SCERT राजस्थान प्राथमिक हिन्दी हस्तपुस्तिका में एक प्रामाणिक बहु-संवेदी उपचारात्मक गतिविधि जुड़ी है।

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अध्ययन सामग्री

मुख्य बिंदु

प्राथमिक स्तर पर हिन्दी में आकलन, सतत व्यापक मूल्यांकन तथा उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ है — विद्यालय-आधारित, निरंतर, व्यापक चक्र जिसमें शिक्षक सत्रभर सुनना, बोलना, पढ़ना तथा लिखना — चारों कौशलों के साक्ष्य संग्रह करता है, उन विशिष्ट बिंदुओं को पहचानता है जहाँ विद्यार्थी टूटता है, और आगे बढ़ने से पूर्व लघु, केंद्रित उपचारात्मक चक्र चलाता है। यह पद्धति RTE 2009 तथा NCF 2005 पर आधारित है, सरल उपकरणों — उपाख्यानिक अभिलेख,...

कक्षा में उपयोग

  • शिक्षार्थी स्तर: कक्षा 1-5
  • सामान्य भ्रम: अनेक अभ्यर्थी CCE को एकल सत्रांत परीक्षा तथा पोर्टफोलियो के मुख्य पृष्ठ के योग के रूप में देखते हैं, और उसके निरंतर तथा संरचनात्मक स्वरूप को पूरी तरह छूट जाते हैं।
  • शिक्षक कार्य: प्रत्येक विद्यार्थी के लिए साप्ताहिक एक संक्षिप्त, तिथि-अंकित उपाख्यानिक टिप्पणी रखें तथा सोमवार के हिन्दी पाठ के पहले दस मिनट की योजना में पिछले सप्ताह की टिप्पणियों का प्रत्यक्ष प्रयोग करें।
  • अधिगम गतिविधि: कक्षा में एक व्यंजन-सहित-मात्रा शब्द-पट्टी समुच्चय, एक विषय-आधारित चित्र-शब्द कार्ड समुच्चय तथा एक लघु परिचित युग्म-पठन पाठ सदैव तैयार रखें।
  • आकलन जांच: उपचारात्मक चक्र के पश्चात जाँचें कि क्या वही विद्यार्थी अब लघु नवीन कार्य पर पहले टूटा हुआ उप-कौशल कर पा रहा है; परिणाम उपाख्यानिक अभिलेख में अंकित करें।

सामान्य प्रश्न जाल

  • ऐसा प्रश्न-कथन जो CCE को एकल सत्रांत परीक्षा के रूप में परिभाषित कर योगात्मक प्रतिवेदन को सतत दिखाने का प्रयास करता है।
  • वह विकर्षक जो कक्षा 2 में साप्ताहिक सार्वजनिक वाचन-गति-क्रम को CCE अभ्यास बताता है।
  • वह विकर्षक जो कक्षा-आधारित शिक्षक-साक्ष्य के स्थान पर अभिभावकों से घर में हिन्दी-भाषण का प्रमाणन माँगता है।
  • वह विकर्षक जो किसी नैदानिक परीक्षण के प्रयोग से पूर्व ही उपचारात्मक चक्र आरंभ करने की अनुशंसा करता है।
  • वह विकर्षक जो किसी विकासात्मक रूप से अनुपयुक्त कार्य — जैसे कक्षा 2 के विद्यार्थी से लंबी साहित्यिक समीक्षा — को उपचारात्मक गतिविधि के रूप में प्रच्छन्न प्रस्तुत करता है।

यह विषय REET स्तर 1 में क्यों महत्वपूर्ण है

प्राथमिक हिन्दी शिक्षक के दैनिक निर्णय — किस बच्चे को संक्षिप्त वाचन के लिए बुलाना, किस समूह को मात्रा-कार्डों का नया दौर चाहिए, किस विद्यार्थी के लेखन को पाँच अतिरिक्त मिनट का व्यक्तिगत ध्यान चाहिए — ये सभी आकलन-निर्णय हैं। RTE 2009 के अंतर्गत प्रवर्तित CCE ढाँचा इन रोज़मर्रा के शिक्षक-निर्णयों को विद्यार्थी-प्रगति के केंद्र में रखता है, विशेषकर भाषा-कक्षा में, जहाँ प्रगति क्रमिक तथा असमान होती है। REET स्तर 1 अभ्यर्थी से...

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