मुख्य तथ्य

  • बर्नआउट (मास्लाच, 1981) दीर्घकालिक कार्यस्थल तनाव की अवस्था है जिसके तीन आयाम हैं: भावनात्मक थकान, विव्यक्तिकरण (निंदकता, अलगाव) और व्यक्तिगत उपलब्धि…
  • लैज़रस एवं फोकमैन का व्यवहारिक मॉडल (1984) बताता है कि तनाव कोई वस्तुनिष्ठ घटना नहीं बल्कि व्यक्ति के संज्ञानात्मक मूल्यांकन का परिणाम है: प्राथमिक मू…
  • हार्डिनेस (कोबासा, 1979) तनाव-अवरोधक व्यक्तित्व पैटर्न है जिसमें प्रतिबद्धता, नियंत्रण और चुनौती शामिल हैं;

मुख्य बिंदु

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    तनाव किसी भी माँग (स्ट्रेसर) के प्रति शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया है; यूस्ट्रेस (सकारात्मक तनाव) कार्यक्षमता बढ़ाता है जबकि डिस्ट्रेस (नकारात्मक तनाव) स्वास्थ्य को हानि पहुँचाता है।

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    हैंस सेली का सामान्य अनुकूलन सिंड्रोम (GAS) तनाव प्रतिक्रिया के तीन चरण बताता है: सतर्कता (लड़ो-भागो, एड्रेनालाइन) → प्रतिरोध (शरीर अनुकूलन करता है) → थकावट (संसाधन खत्म, बीमारी)।

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    व्यावसायिक तनाव कार्यस्थल की माँगों से उत्पन्न होता है — भूमिका संघर्ष, भूमिका अस्पष्टता, कार्यभार अधिकता, खराब कार्यदशाएँ, नियंत्रण की कमी एवं पारस्परिक विवाद।

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    बर्नआउट (मास्लाच, 1981) दीर्घकालिक कार्यस्थल तनाव की अवस्था है जिसके तीन आयाम हैं: भावनात्मक थकान, विव्यक्तिकरण (निंदकता, अलगाव) और व्यक्तिगत उपलब्धि में कमी

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    टाइप-A व्यक्तित्व के लोग प्रतिस्पर्धी, समय-चिंतित, शत्रुतापूर्ण और उपलब्धि-उन्मुख होते हैं — इन्हें व्यावसायिक तनाव एवं हृदय रोग का खतरा अधिक होता है। टाइप-B शांत, धैर्यवान एवं कम प्रतिस्पर्धी होते हैं।

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    बिग फाइव व्यक्तित्व लक्षण (OCEAN) तनाव संवेदनशीलता को प्रभावित करते हैं; उच्च न्यूरोटिसिज्म तनाव एवं बर्नआउट से दृढ़ता से जुड़ा है जबकि उच्च कर्तव्यनिष्ठा सुरक्षात्मक है।

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    लैज़रस एवं फोकमैन का व्यवहारिक मॉडल (1984) बताता है कि तनाव कोई वस्तुनिष्ठ घटना नहीं बल्कि व्यक्ति के संज्ञानात्मक मूल्यांकन का परिणाम है: प्राथमिक मूल्यांकन (क्या यह खतरनाक है?) और द्वितीयक मूल्यांकन (क्या मैं सामना कर सकता/सकती हूँ?)।

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    समस्या-केंद्रित सामना तनाव के स्रोत को सीधे लक्ष्य करता है (समय-प्रबंधन, कौशल विकास); भावना-केंद्रित सामना भावनात्मक प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है (विश्राम, सामाजिक समर्थन)।

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    लिंग एवं तनाव: महिलाओं को दोहरे बोझ (काम + घरेलू/देखभाल कार्य), भेदभाव एवं उत्पीड़न से अतिरिक्त तनाव होता है; पुरुषों पर भावनात्मक अभिव्यक्ति न करने के सामाजिक दबाव के कारण बाह्यीकृत सामना (मादक द्रव्य) का जोखिम बढ़ता है।

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    मास्लाच बर्नआउट इन्वेंटरी (MBI) तीन उपमापदंडों पर बर्नआउट मापने का मानक उपकरण है; परसीव्ड स्ट्रेस स्केल (PSS) और व्यावसायिक तनाव सूचकांक (OSI) भारत में व्यापक रूप से उपयोग होते हैं।

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    संगठनात्मक हस्तक्षेप में शामिल हैं: कर्मचारी सहायता कार्यक्रम (EAP), लचीली कार्य व्यवस्था, परामर्श, स्पष्ट भूमिका परिभाषा एवं मनोवैज्ञानिक सुरक्षा को बढ़ावा — ये तनाव को व्यक्तिगत नहीं बल्कि प्रणालीगत स्तर पर हल करते हैं।

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    हार्डिनेस (कोबासा, 1979) तनाव-अवरोधक व्यक्तित्व पैटर्न है जिसमें प्रतिबद्धता, नियंत्रण और चुनौती शामिल हैं; हार्डी व्यक्ति भारी व्यावसायिक माँगों के बावजूद कम बर्नआउट दिखाते हैं।

परिचय

तनाव और बर्नआउट को समझना आरएएस अभ्यर्थी के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि ये मनोविज्ञान की अवधारणाएँ होने के साथ-साथ प्रशासनिक सेवा के वास्तविक कामकाजी जीवन से भी जुड़ी हैं। तनाव मनोविज्ञान और व्यावसायिक स्वास्थ्य में सर्वाधिक अध्ययन की गई घटनाओं में से एक है। आरएएस परीक्षा के संदर्भ में, तनाव को समझना महत्वपूर्ण है — दोनों एक व्यवहार विज्ञान अवधारणा के रूप में और एक व्यावहारिक वास्तविकता के रूप में, क्योंकि लोक सेवकों को महत्वपूर्ण भूमिका मांगों, संसाधन बाधाओं, और सार्वजनिक जवाबदेही का सामना करना पड़ता है।

"तनाव" शब्द भौतिकी से लिया गया था, जहाँ इसका अर्थ प्रति इकाई क्षेत्र लागू बल है, और १९३० के दशक में हांस सेल्ये द्वारा जैविक संदर्भ में लोकप्रिय बनाया गया। सेल्ये ने तनाव को "उस पर की गई किसी भी मांग के प्रति शरीर की गैर-विशिष्ट प्रतिक्रिया" के रूप में परिभाषित किया। यह परिभाषा दो प्रमुख विचारों पर जोर देती है: पहला, प्रतिक्रिया शारीरिक है, केवल मनोवैज्ञानिक नहीं; दूसरा, तनावकारक लगभग कुछ भी हो सकता है — शारीरिक खतरा, भावनात्मक चुनौती, संज्ञानात्मक अधिभार, या पदोन्नति जैसी सकारात्मक घटनाएँ भी।

बर्नआउट — एक संबंधित लेकिन अलग अवधारणा — १९७० के दशक में सामने आई जब मनोवैज्ञानिक हर्बर्ट फ्रॉयडेनबर्गर (१९७४) ने एक निःशुल्क चिकित्सालय में स्वयंसेवी कर्मचारियों में काम करते-करते भीतर से चुक जाने की घटना का वर्णन किया। क्रिस्टीना माश्लाच के बाद के शोध ने बर्नआउट को एक मापने योग्य मनोवैज्ञानिक निर्माण के रूप में औपचारिक रूप दिया, जो सरल थकान या अवसाद से अलग है।

आरएएस अभ्यर्थियों के लिए, इन विषयों के मुख्य परीक्षा संदर्भ हैं:

  • तनाव क्या है, और इसके चरण क्या हैं?
  • व्यक्तित्व यानी टाइप ए/बी, बिग फाइव और हार्डीनेस का तनाव संवेदनशीलता से क्या संबंध है?
  • सामना करने की रणनीतियाँ क्या हैं, और वे कैसे भिन्न होती हैं?
  • पेशेवर वातावरण में महिलाओं को किन अद्वितीय तनावकारकों का सामना करना पड़ता है?

संभावित RAS प्रश्न

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1 5M तनाव और बर्नआउट में क्या अंतर है? 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

तनाव में अति-संलग्नता होती है — माँगों के जवाब में अत्यधिक शारीरिक एवं भावनात्मक उत्तेजना। बर्नआउट (मास्लाच, 1981) दीर्घकालिक कार्यस्थल सिंड्रोम है जिसकी पहचान भावनात्मक थकान, विव्यक्तिकरण एवं व्यक्तिगत उपलब्धि में कमी से होती है — यह अलगाव की अवस्था है। तनाव तीव्र होता है और आराम से ठीक हो जाता है; बर्नआउट क्रमिक होता है और संरचनात्मक कार्यस्थल बदलाव माँगता है।

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