मुख्य तथ्य

  • सार्वजनिक लेखा समिति (PAC) — 22 सदस्य (15 LS + 7 RS); CAG रिपोर्ट की जाँच; 1967 से विपक्षी MP की अध्यक्षता; लेखानुदान कम/बढ़ा नहीं सकती
  • प्राक्कलन समिति — 30 LS सदस्य; व्यय से पहले बजट अनुमान जाँच; दक्षता सुझाव; पूर्व-लेखापरीक्षा; नीति परिवर्तन नहीं; शासक दल सदस्य की अध्यक्षता।
  • लेखानुदान — अनुच्छेद 116; बजट पारित होने से पहले अग्रिम अनुदान; कुल व्यय का 1/6वाँ; आम चुनाव वर्ष में महत्त्वपूर्ण।
  • न्यायिक नियंत्रण — (i) रिट (अनुच्छेद 32 और 226); (ii) सामान्य वाद (CPC); (iii) PIL; (iv) न्यायाधिकरण (अनुच्छेद 323A — CAT); (v) न्यायिक पुनरावलोकन
  • केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) — CVC अधिनियम 2003; CBI से स्वतंत्र; केंद्र सरकार में सतर्कता प्रशासन; राजपत्रित अधिकारियों के अनुशासन में सलाह;

मुख्य बिंदु

  1. 1

    विधायी नियंत्रण — (i) प्रश्नकाल; (ii) शून्यकाल (भारतीय नवाचार); (iii) कटौती प्रस्ताव; (iv) बजट अनुमोदन; (v) समितियाँ: PAC, प्राक्कलन समिति, लोक उपक्रम समिति।

  2. 2

    सार्वजनिक लेखा समिति (PAC) — 22 सदस्य (15 LS + 7 RS); CAG रिपोर्ट की जाँच; 1967 से विपक्षी MP की अध्यक्षता; लेखानुदान कम/बढ़ा नहीं सकती — उत्तर-लेखापरीक्षा निकाय।

  3. 3

    प्राक्कलन समिति — 30 LS सदस्य; व्यय से पहले बजट अनुमान जाँच; दक्षता सुझाव; पूर्व-लेखापरीक्षा; नीति परिवर्तन नहीं; शासक दल सदस्य की अध्यक्षता।

  4. 4

    लेखानुदान — अनुच्छेद 116; बजट पारित होने से पहले अग्रिम अनुदान; कुल व्यय का 1/6वाँ; आम चुनाव वर्ष में महत्त्वपूर्ण।

  5. 5

    न्यायिक नियंत्रण — (i) रिट (अनुच्छेद 32 और 226); (ii) सामान्य वाद (CPC); (iii) PIL; (iv) न्यायाधिकरण (अनुच्छेद 323A — CAT); (v) न्यायिक पुनरावलोकन — प्रत्यायोजित विधान की वैधता।

  6. 6

    पाँच संवैधानिक रिट — बंदी प्रत्यक्षीकरण (अवैध हिरासत से मुक्ति); परमादेश (सार्वजनिक निकाय को कर्तव्य पालन); प्रतिषेध (अधिकारातीत आदेश रोकना); उत्प्रेषण (अवर न्यायाधिकरण का आदेश रद्द); अधिकार पृच्छा (पद की वैधता)।

  7. 7

    कार्यपालिका नियंत्रण — (i) राष्ट्रपति/राज्यपाल; (ii) मंत्रिमंडल; (iii) DOPT; (iv) वित्त मंत्रालय; (v) सतर्कता तंत्र — CVC, विभागीय सतर्कता।

  8. 8

    केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) — CVC अधिनियम 2003; CBI से स्वतंत्र; केंद्र सरकार में सतर्कता प्रशासन; राजपत्रित अधिकारियों के अनुशासन में सलाह; हवाला काण्ड (1997) के बाद सांविधिक दर्जा।

  9. 9

    केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण — अनुच्छेद 323ए; प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम 1985 के अंतर्गत स्थापित; केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के सेवा मामलों का निर्णय करता है; एल. चंद्र कुमार (1997) के अनुसार इसके निर्णयों को संबंधित उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।

  10. 10

    जनहित याचिका (PIL) — भारतीय न्यायिक नवाचार; कोई भी नागरिक अनुच्छेद 32/226 के तहत याचिका; न्यायमूर्ति P.N. भगवती व V.R. कृष्ण अय्यर (1980 का दशक); उदार वादी-हक। मूल अधिकार उल्लंघन या सार्वजनिक कर्तव्य की उपेक्षा।

इस विषय को आरएएस मुख्य परीक्षा में कैसे पढ़ना चाहिए?

इस विषय को आरएएस मुख्य परीक्षा में विधायी, कार्यपालिका और न्यायिक नियंत्रण के त्रिस्तरीय ढाँचे के रूप में पढ़ना चाहिए, क्योंकि उत्तर में परिभाषा, साधन, प्रभावशीलता और सीमाएँ साफ दिखानी पड़ती हैं।

लोक प्रशासन का नियंत्रण प्रश्नपत्र ३ इकाई २ में सर्वाधिक अंक देने वाला विषय है — ५ में से ४ वर्षों में, कुल ३४ अंक, औसत ६.८। यह दूसरे स्तर की प्राथमिकता है और इसे व्यापक रूप से पढ़ा जाना चाहिए। आरपीएससी मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र ३ कुल २०० अंक का होता है और समय ३ घंटे है।

२०२१ के पिछले वर्ष के प्रश्नपत्र में "लेखानुदान" (२ अंक) और "न्यायिक नियंत्रण के स्वरूप" (५ अंक) शामिल थे। २०२३ के पिछले वर्ष के प्रश्नपत्र में "न्यायिक नियंत्रण के स्वरूप और विधियाँ" (१० अंक) और "संसद प्रश्न उत्तर के लिए वेब पोर्टल" (२ अंक) शामिल थे। २०२६ के लिए कम से कम एक १० अंक का प्रश्न अपेक्षित है — संभवतः विधायी नियंत्रण समितियों अथवा न्यायिक रिट पर।

परीक्षा रणनीति: नियंत्रण तंत्रों के लिए, त्रिस्तरीय ढाँचा (विधायी, कार्यपालिका, न्यायिक) एक संगठनात्मक आधार है। १५० शब्दों के प्रश्नों के लिए: प्रकार को परिभाषित करें → प्रमुख साधन सूचीबद्ध करें → प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें → सीमाएँ बताएँ। उत्तर में जहाँ संभव हो, लोक लेखा समिति, लेखानुदान, पाँच रिट, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण और जनहित याचिका जैसे उदाहरण जोड़ें, क्योंकि यही हिस्से छोटे और बड़े दोनों प्रश्नों में बार-बार काम आते हैं।


संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M पाँच संवैधानिक रिट कौन सी हैं? प्रत्येक का उद्देश्य बताइए। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

पाँच रिट (अनुच्छेद 32/226): (1) बंदी प्रत्यक्षीकरण — अवैध हिरासत से मुक्ति; (2) परमादेश — सार्वजनिक निकाय को कर्तव्य पालन; (3) प्रतिषेध — अधिकारातीत कार्यवाही रोकना; (4) उत्प्रेषण — अधिकारातीत आदेश रद्द; (5) अधिकार पृच्छा — सार्वजनिक पद-अधिकार की जाँच। SC (अनुच्छेद 32) और HC (अनुच्छेद 226) दोनों से।

~50 शब्द • 5 अंक