लोक प्रशासन के सिद्धांत: वैज्ञानिक प्रबंधन, मानवीय संबंध, व्यावहारिक, संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक, पारिस्थितिकीय
मुख्य तथ्य
- वैज्ञानिक प्रबंधन (टेलर, 1911): कार्य का वैज्ञानिक अध्ययन
- शास्त्रीय संगठन सिद्धांत (फेयोल, 1916): 14 प्रबंधन सिद्धांत
- मानवीय संबंध सिद्धांत (एल्टन मेयो, 1927–32): हॉथोर्न प्रयोग
- व्यावहारिक/निर्णय-निर्माण सिद्धांत (हर्बर्ट साइमन, 1947): प्रशासनिक व्यवहार — निर्णय-निर्माण प्रशासन का केंद्र; परिबद्ध तर्कसंगतता
- पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण (फ्रेड रिग्स, 1961): PA को उसके सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश से अलग नहीं समझा जा सकता।
मुख्य बिंदु
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वैज्ञानिक प्रबंधन (टेलर, 1911): कार्य का वैज्ञानिक अध्ययन — समय एवं गति अध्ययन, मानकीकरण, विभेदक दर भुगतान। वैज्ञानिक प्रबंधन के सिद्धांत (1911): प्रत्येक कार्य का "एक सर्वोत्तम तरीका" एवं योग्यता आधारित चयन।
- 2
शास्त्रीय संगठन सिद्धांत (फेयोल, 1916): 14 प्रबंधन सिद्धांत — श्रम विभाजन, अधिकार, अनुशासन और आदेश की एकता। लिंडल उर्विक: विशेषीकरण, प्राधिकार, नियंत्रण-विस्तार और समन्वय।
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मानवीय संबंध सिद्धांत (एल्टन मेयो, 1927–32): हॉथोर्न प्रयोग — पश्चिमी इलेक्ट्रिक कंपनी में; भौतिक नहीं, सामाजिक-मनोवैज्ञानिक कारक उत्पादकता निर्धारित करते हैं। हॉथोर्न प्रभाव: निगरानी और मूल्य की भावना से प्रदर्शन सुधरता है।
- 4
व्यावहारिक/निर्णय-निर्माण सिद्धांत (हर्बर्ट साइमन, 1947): प्रशासनिक व्यवहार — निर्णय-निर्माण प्रशासन का केंद्र; परिबद्ध तर्कसंगतता — सीमित सूचना; "संतोषजनक" विकल्प, इष्टतम नहीं। साइमन को नोबेल पुरस्कार (अर्थशास्त्र, 1978)।
- 5
संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक सिद्धांत (पारसन्स, मर्टन): संगठन = सामाजिक व्यवस्था; AGIL: अनुकूलन, लक्ष्य प्राप्ति, एकीकरण, गुप्तता। मर्टन: नौकरशाही की दोषक्रियाएँ — लक्ष्य विस्थापन, प्रशिक्षित असमर्थता, अति-अनुपालन।
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पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण (फ्रेड रिग्स, 1961): PA को उसके सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश से अलग नहीं समझा जा सकता। रिग्स के तीन मॉडल: एग्रेरिया (परंपरागत), इंडस्ट्रिया (आधुनिक पश्चिमी), प्रिज्मीय (मध्यवर्ती — भारत जैसे विकासशील देश)।
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प्रिज्मीय (साला) मॉडल (रिग्स, 1964): प्रिज्मीय समाज में आधुनिक एवं परंपरागत व्यवस्थाएँ साथ-साथ — औपचारिकता (नियम-व्यवहार अंतर), विषमता, बहु-मानकता। प्रशासनिक इकाई: साला (कार्यालय)।
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मैकग्रेगर का सिद्धांत X और Y (1960): सिद्धांत X — कर्मचारी आलसी, नियंत्रण-आधारित प्रबंधन; सिद्धांत Y — कर्मचारी स्व-प्रेरित, सहभागी प्रबंधन। सिद्धांत Y लोकतांत्रिक प्रशासन का आधार।
- 9
मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम (1943): शारीरिक → सुरक्षा → सामाजिक → सम्मान → आत्म-साक्षात्कार। जो आवश्यकता अतृप्त हो, वही प्रेरक बनती है।
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लोक प्रशासन में व्यवस्था सिद्धांत (लुडविग वॉन बर्टालान्फी; संगठन अध्ययन में काट्ज़ एवं काह्न द्वारा 1966 में लागू): संगठन खुली व्यवस्थाएँ हैं — निवेश → रूपांतरण प्रक्रिया → निर्गम → प्रतिपुष्टि। प्रत्येक उप-व्यवस्था परस्पर निर्भर होती है; पर्यावरणीय परिवर्तन पूरे संगठन को प्रभावित करता है। इसने ऐसा समग्र ढाँचा दिया जिसने नियोजन, संगठन, कर्मचारी-व्यवस्था, निर्देशन, समन्वय, प्रतिवेदन और बजट की सीमाओं को पार किया।
लोक प्रशासन के सिद्धांत क्यों पढ़े जाते हैं?
लोक प्रशासन के सिद्धांत इसलिए पढ़े जाते हैं क्योंकि वे बताते हैं कि प्रशासन को कुशलता, मानव-व्यवहार, निर्णय, सामाजिक संरचना और परिवेश के संदर्भ में अलग-अलग विद्वानों ने कैसे समझाया। आरपीएससी २०२१ मुख्य परीक्षा योजना में सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र २०० अंकों का है, इसलिए लोक प्रशासन के ये सिद्धांत अंक-दृष्टि से भी केंद्रीय हैं।
लोक प्रशासन के सिद्धांत उस बौद्धिक आधार का प्रतिनिधित्व करते हैं जिस पर यह अनुशासन खड़ा है। प्रत्येक सिद्धांत अपने पूर्ववर्ती की कमियों की प्रतिक्रिया में उभरा — वैज्ञानिक प्रबंधन, अनुमान-आधारित प्रबंधन की प्रतिक्रिया था; मानवीय संबंध सिद्धांत ने वैज्ञानिक प्रबंधन के यंत्रवादी दृष्टिकोण का विरोध किया; व्यवहारवादी सिद्धांत ने पूर्ण तार्किकता की धारणाओं पर प्रश्न उठाया; संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक और पारिस्थितिकीय सिद्धांतों ने लोक प्रशासन को समाजशास्त्रीय और तुलनात्मक ढाँचे की ओर ले गए।
आरएएस मुख्य परीक्षा के लिए, परीक्षक सामान्यतः पूछते हैं:
- किसी सिद्धांत की प्रमुख विशेषताएँ और उसका मुख्य सिद्धांतकार (२-अंक या ५-अंक प्रश्न)
- सिद्धांत एक्स बनाम सिद्धांत वाई (तुलनात्मक प्रश्न)
- पारिस्थितिकीय उपागम / रिग्स का प्रिज़मैटिक मॉडल (५ या १० अंक)
- नौकरशाही की संरचनात्मक अकार्यात्मकताएँ (मर्टन) — ५ अंक
पिछले वर्षों के प्रश्न-आँकड़े से पता चलता है कि यह विषय २०१३ (५ अंक — सिद्धांत एक्स/वाई), २०१६ (५ अंक — मानवीय संबंध), और २०१८ (५ अंक — पारिस्थितिकीय/तुलनात्मक उपागम) में आया था। इसका अर्थ यह है कि इस अध्याय को सिर्फ सिद्धांतकारों की सूची की तरह नहीं, बल्कि किस सिद्धांत ने किस कमी को सुधारा और भारतीय प्रशासन में उसका उपयोग कहाँ दिखता है — इस उत्तर-रचना के साथ पढ़ना चाहिए।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M हॉथोर्न प्रयोग क्या हैं? इनके प्रमुख निष्कर्ष क्या थे?
आदर्श उत्तर
हॉथोर्न प्रयोग (एल्टन मेयो, 1927–32) पश्चिमी इलेक्ट्रिक, शिकागो में। प्रकाश, विश्राम, समूह गतिशीलता के अध्ययन से निष्कर्ष: (1) सामाजिक-मनोवैज्ञानिक कारक उत्पादकता तय करते हैं; (2) अनौपचारिक समूह उत्पादन मानदंड बनाते हैं; (3) हॉथोर्न प्रभाव — निगरानी और मूल्य की भावना प्रदर्शन सुधारती है; (4) मनोबल, केवल वेतन नहीं, निर्धारक है।
~50 शब्द • 5 अंक
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