मुख्य तथ्य

  • यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान कार्यक्रम 2015 में स्थापित; 2024 तक 48 देशों में 213 भू-उद्यान; भारत का अभी तक कोई स्थल मान्यता प्राप्त नहीं।
  • जैसलमेर का अकाल काष्ठ जीवाश्म उद्यान — 25 जीवाश्म वृक्ष-स्कंध, ~18 करोड़ वर्ष पुराने (जुरासिक); 1974 से GSI राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक।
  • बूंदी की स्ट्रोमेटोलाइट — प्रीकैम्ब्रियन काल की जीवाश्म संरचनाएँ (जीवन का प्राचीनतम साक्ष्य), 160-180 करोड़ वर्ष पुरानी।
  • अरावली पर्वतमाला — बैंडेड नाइसिक कॉम्प्लेक्स (BGC) आधार ~3,500 Ma (आर्कियन), जबकि अरावली सुपरग्रुप वलन घटना ~2,500 Ma (प्रोटेरोज़ोइक)।
  • GSI ने भारत में 34 राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित किए हैं;

मुख्य बिंदु

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    यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान कार्यक्रम 2015 में स्थापित; 2024 तक 48 देशों में 213 भू-उद्यान; भारत का अभी तक कोई स्थल मान्यता प्राप्त नहीं।

  2. 2

    जैसलमेर का अकाल काष्ठ जीवाश्म उद्यान — 25 जीवाश्म वृक्ष-स्कंध, ~18 करोड़ वर्ष पुराने (जुरासिक); 1974 से GSI राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक।

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    बाड़मेर बेसिन — क्रेटेशियस काल के डायनासोर अवशेष और काष्ठ जीवाश्म; पश्चिमी भारत में सर्वाधिक समृद्ध कशेरुकी पुरा-जीव विज्ञान क्षेत्रों में से एक।

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    जैसलमेर बेसिन — एमोनाइट, बेलेम्नाइट, इचिनोइड और पेट्रीकृत लकड़ी सहित जुरासिक समुद्री जीवाश्म।

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    जोधपुर का मंडोर — GSI सर्वेक्षणों द्वारा जुरासिक डायनासोर जीवाश्म स्थलों की पुष्टि।

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    बूंदी की स्ट्रोमेटोलाइट — प्रीकैम्ब्रियन काल की जीवाश्म संरचनाएँ (जीवन का प्राचीनतम साक्ष्य), 160-180 करोड़ वर्ष पुरानी।

  7. 7

    अरावली पर्वतमाला — बैंडेड नाइसिक कॉम्प्लेक्स (BGC) आधार ~3,500 Ma (आर्कियन), जबकि अरावली सुपरग्रुप वलन घटना ~2,500 Ma (प्रोटेरोज़ोइक)।

  8. 8

    GSI ने भारत में 34 राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित किए हैं; इनमें से कुछ सबसे महत्त्वपूर्ण स्मारक राजस्थान में हैं, जैसे अकाल जीवाश्म उद्यान और बर्र (पाली)।

  9. 9

    थार मरुस्थल — वायु-निर्मित स्थलरूप, अवशिष्ट बालुका स्तूप और जीवाश्म नदी चैनल भू-उद्यान की प्रबल संभावना प्रस्तुत करते हैं।

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    चंबल खड्ड — विंध्यन बलुआ पत्थरों के त्वरित अपरदन से निर्मित बीहड़ भू-आकृति; भू-विरासत क्षेत्र के रूप में संभावना।

  11. 11

    भारत का पहला यूनेस्को भू-उद्यान प्रस्ताव लमहेटा घाट (मध्य प्रदेश) — अभी मूल्यांकन के अधीन (2024)।

  12. 12

    2024 तक राजस्थान में समर्पित भू-विरासत संरक्षण अधिनियम नहीं; GSI का राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक ढाँचा ही प्राथमिक कानूनी सुरक्षा तंत्र।

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    RPSC 2021 ने इस विषय पर 10 अंकों का प्रश्न पूछा था — एकमात्र PYQ उपस्थिति।

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    भू-पर्यटन — भूवैज्ञानिक स्थलों पर केंद्रित पर्यटन — थार और चंबल क्षेत्रों में वैकल्पिक आजीविका सृजित कर सकता है।

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    पाली जिले का बर्र — प्रीकैम्ब्रियन आधार शैलों का अनूठा भूवैज्ञानिक उद्भेदन; GSI राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक।

इस विषय का पाठ्यक्रम और परीक्षा-क्षेत्र क्या है?

इस विषय का परीक्षा-क्षेत्र राजस्थान की भूवैज्ञानिक धरोहर को यूनेस्को भू-उद्यान ढाँचे, संरक्षण नीति और भू-पर्यटन से जोड़कर समझना है। आरपीएससी के आधिकारिक सिलेबस पेज पर २०१२ की भूगोल और पृथ्वी-विज्ञान प्रविष्टियाँ दिखाती हैं कि भूविज्ञान, भू-आकृति और पर्यावरणीय आयाम परीक्षा-संरचना में अलग से दर्ज हैं।

आरपीएससी २०२६ पेपर द्वितीय, इकाई ३ का पाठ्यक्रम पृथ्वी विज्ञान के अंतर्गत भू-धरोहर को एक उप-विषय के रूप में शामिल करता है। विषय ९० भूविज्ञान, संरक्षण नीति और पर्यटन के संगम पर स्थित है। आरपीएससी अपेक्षा करता है कि विद्यार्थी राजस्थान के विशिष्ट भूवैज्ञानिक स्थलों को यूनेस्को ढाँचे से जोड़ें, व्यक्तिगत जीवाश्म स्थलों के महत्व को स्पष्ट करें, और भू-धरोहर संरक्षण में नीति-अंतराल पर चर्चा करें।

इस विषय का पीवाईक्यू टियर ४ वर्गीकरण, पाँच परीक्षाओं में एक बार और २०२१ में एकमात्र १० अंकों की उपस्थिति, संकेत देता है कि यद्यपि यह हर चक्र में नहीं पूछा जाता, जब भी आता है तो प्रश्न महत्वपूर्ण होता है। २०२१ के प्रश्न में उन विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया जो विशिष्ट स्थलों, जैसे अकाल, बाड़मेर जीवाश्म और बूँदी स्ट्रोमेटोलाइट, का नाम लेने के साथ यूनेस्को मानदंडों की वैचारिक रूपरेखा भी प्रस्तुत कर सके। “राजस्थान की समृद्ध भूवैज्ञानिक धरोहर” जैसे अस्पष्ट उत्तरों को कम अंक मिले।

क्षेत्र-सीमाएँ: विषय ८३ राजस्थान की व्यापक भौतिक संरचना और भूवैज्ञानिक बनावट, जैसे अरावली, विंध्यान और दक्कन ट्रैप संबंध, को कवर करता है; उसे यहाँ दोहराने की आवश्यकता नहीं है। यह अध्याय उन स्थलों पर केंद्रित है जिनका असाधारण सार्वभौमिक भूवैज्ञानिक मूल्य है और जो धरोहर संरक्षण एवं भू-उद्यान नामांकन के योग्य हैं। विषय ९ धरोहर और पर्यटन को व्यापक रूप से कवर करता है; यहाँ पर्यटन पक्ष विशेष रूप से भू-पर्यटन और राजस्थान के खनिज-दुर्लभ जिलों के लिए इसकी आर्थिक क्षमता तक सीमित है।

आरपीएससी के २०२६ के संशोधित पाठ्यक्रम में पेपर द्वितीय में पर्यावरणीय और अंतर्राष्ट्रीय आयामों को जोड़ा गया है, जिससे यूनेस्को से जुड़े विषय पुराने २०१३ के पाठ्यक्रम की तुलना में अधिक परीक्षणीय हो गए हैं। यह २०२६ के लिए एक उभरता हुआ विषय है। उत्तर लिखते समय शुरुआत में परिभाषा, फिर राजस्थान-विशिष्ट स्थल, फिर नीति-अंतराल और अंत में व्यवहार्य नामांकन-रोडमैप देना चाहिए।


संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान क्या है? भारत को अभी तक यह मान्यता क्यों नहीं मिली? 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान एक संरक्षित क्षेत्र है जिसमें अंतरराष्ट्रीय महत्व के भूवैज्ञानिक स्थल होते हैं और जिसका प्रबंधन संरक्षण, शिक्षा और सतत भू-पर्यटन के लिए किया जाता है। 2015 में स्थापित यह कार्यक्रम 48 देशों में 213 भू-उद्यानों को कवर करता है। भारत में समर्पित भू-विरासत कानून की अनुपस्थिति, अवसंरचना की कमी और अंतर-मंत्रालयी अधिकार क्षेत्र की अस्पष्टता के कारण मान्यता नहीं मिली है।

~50 शब्द • 5 अंक