भूकंप एवं ज्वालामुखी: प्रकार, वितरण, प्रभाव
मुख्य तथ्य
- - रिक्टर स्केल (लघुगणकीय, 1935) — प्रत्येक इकाई = 10× जमीनी गति, ~32× ऊर्जा — मोमेंट मैग्निट्यूड स्केल (Mw) — वैज्ञानिक मानक — मेर्कल्ली स्केल (I–XII)
- - परिप्रशांत पेटी ("अग्नि वलय") — प्रशांत महासागर को 40,000 किमी में घेरती है — विश्व के 80% भूकंप और 75% सक्रिय ज्वालामुखी
- - उथले (0–70 किमी) — सर्वाधिक विनाशकारी — मध्यवर्ती (70–300 किमी) — मध्यम सतह प्रभाव — गहरे (300–700 किमी)
- - विवर्तनिक भूकंप — सबसे सामान्य (~90%); प्लेट संचलन — ज्वालामुखी भूकंप — मैग्मा संचलन से — पतन भूकंप — गुफा/खनन क्षेत्रों में — जलाशय-जनित भूकंप
- - सुनामी — पनडुब्बी भूकंप, भूस्खलन या ज्वालामुखी से उत्पन्न — गति: खुले महासागर में 700–900 किमी/घं; तट के पास ऊँचाई बढ़ती है
मुख्य बिंदु
- 1
भूकंप — परिभाषा और संरचना
- पृथ्वी की भूपर्पटी या मेंटल में भ्रंश के साथ गति होने पर ऊर्जा अचानक मुक्त होती है
- इससे भूकंपीय तरंगें बनती हैं: पी-तरंग, एस-तरंग और सतही तरंगें
- अवकेंद्र — ऊर्जा-मुक्ति का भूमिगत बिंदु
- अधिकेंद्र — अवकेंद्र के ठीक ऊपर सतह पर स्थित बिंदु
- 2
- रिक्टर स्केल (लघुगणकीय, 1935) — प्रत्येक इकाई = 10× जमीनी गति, ~32× ऊर्जा
- मोमेंट मैग्निट्यूड स्केल (Mw) — वैज्ञानिक मानक
- मेर्कल्ली स्केल (I–XII) — अनुभूत कंपन तीव्रता मापता है
- 3
- परिप्रशांत पेटी ("अग्नि वलय") — प्रशांत महासागर को 40,000 किमी में घेरती है
- विश्व के 80% भूकंप और 75% सक्रिय ज्वालामुखी
- न्यूजीलैंड → जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया → अलास्का → अमेरिकी प्रशांत तट
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- उथले (0–70 किमी) — सर्वाधिक विनाशकारी
- मध्यवर्ती (70–300 किमी) — मध्यम सतह प्रभाव
- गहरे (300–700 किमी) — प्रशांत क्षेपण क्षेत्रों में; व्यापक क्षेत्र में अनुभव, सतह पर कम विनाश
- 5
- सक्रिय — हाल में उद्गार (एटना, स्ट्रोम्बोली, किलाऊआ)
- प्रसुप्त — हाल में नहीं (माउंट रेनियर, वेसुवियस)
- मृत — पुनः उद्गार संभावना नहीं
- भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी: बैरन द्वीप (अंडमान सागर)
- 6
- विवर्तनिक भूकंप — सबसे सामान्य (~90%); प्लेट संचलन
- ज्वालामुखी भूकंप — मैग्मा संचलन से
- पतन भूकंप — गुफा/खनन क्षेत्रों में
- जलाशय-जनित भूकंप — कोयना (1967, 6.5 रिक्टर) — भारत का सबसे बड़ा
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- सुनामी — पनडुब्बी भूकंप, भूस्खलन या ज्वालामुखी से उत्पन्न
- गति: खुले महासागर में 700–900 किमी/घं; तट के पास ऊँचाई बढ़ती है
- 2004 हिंद महासागर सुनामी (Mw 9.1–9.3, सुमात्रा): 14 देशों में 2.27 लाख मृत
- बांदा आचे में 30 मी ऊँची लहरें
- 8
- भारत: जोन II से V (BIS IS-1893)
- जोन V (अति उच्च): पूर्वोत्तर, J&K, हिमाचल, उत्तराखंड, उत्तरी बिहार, अंडमान
- राजस्थान: जोन II–III (जैसलमेर — जोन II, सबसे कम)
- 9
- नेपाल (अप्रैल 2015, Mw 7.8, ~9,000 मृत)
- तुर्किए-सीरिया (फरवरी 2023, Mw 7.8, ~58,000 मृत)
- जापान 2011 (Mw 9.0, 15,000+ मृत, फुकुशिमा)
- भुज 2001 (Mw 7.7, ~20,000 मृत)
- 10
- लावा — सतह पर पिघली चट्टान (700–1,200°C)
- मैग्मा — भूमिगत पिघली चट्टान
- पायरोक्लास्टिक सामग्री — राख, बम, लैपिली
- ज्वालामुखी गैसें — SO₂, CO₂; लाहर — ज्वालामुखी कीचड़ प्रवाह
- 11
- भूमध्यसागरीय-हिमालयी पेटी (एल्पाइड पेटी) — विश्व के 15% भूकंप
- अटलांटिक → भूमध्यसागर → मध्यपूर्व → हिमालय होते हुए
- अफ्रीका-यूरेशिया और भारत-यूरेशिया प्लेट टकराव से निर्मित
- 12
- उपजाऊ मिट्टी — जावा में 1,000/किमी² ग्रामीण घनत्व, सर्वोच्च चावल उत्पादन
- भूतापीय ऊर्जा — आइसलैंड: 66% बिजली, 90% घरेलू ताप
- खनिज भंडार — ताँबा, सोना, गंधक
- नई भूमि — हवाई द्वीप ज्वालामुखी गतिविधि से निर्मित
परिचय एवं पाठ्यक्रम
अवलोकन
यह टॉपिक भूकंप और ज्वालामुखी जैसी दो नाटकीय भूवैज्ञानिक घटनाओं को इस नज़र से पढ़ाता है कि वे पृथ्वी के आंतरिक भाग की ऊर्जा, प्लेट विवर्तनिकी और सतही प्रभावों से कैसे जुड़ती हैं। आरपीएससी मुख्य परीक्षा के आधिकारिक सिलेबस में पेपर-दो के भाग-क में “भूकंप और ज्वालामुखी: प्रकार, वितरण और प्रभाव” स्पष्ट रूप से दर्ज है, इसलिए तैयारी में परिभाषा भर नहीं, प्रकार, वितरण और असर तीनों साथ पढ़ने होंगे।
यह टॉपिक दो सबसे नाटकीय भूवैज्ञानिक घटनाओं — भूकंप और ज्वालामुखी — की तैयारी कराता है, जो एक समान उद्गम से जुड़ी हैं: पृथ्वी के आंतरिक भाग की ऊर्जा का दृढ़ स्थलमंडल से होकर बाहर निकलना।
६ वर्षीय पीवाईक्यू रिकॉर्ड में इस विषय से २.० औसत/वर्ष की दर से १० अंक आए, जो २०१८ और २०२१ में पूछे गए। पीवाईक्यू में सीधे परि-प्रशांत पेटी (अग्नि वलय) पूछी गई — यह उप-क्षेत्र २०२६ में दोबारा आने की सबसे अधिक संभावना रखता है।
परीक्षा दृष्टिकोण
आरपीएससी दो चीज़ें परखता है — तथ्यात्मक सटीकता (परिमाण के पैमाने, हर पेटी में भूकंपों का प्रतिशत) और व्यावहारिक समझ (प्लेट सीमाओं पर भूकंप और ज्वालामुखी क्यों आते हैं, मानव बस्तियों पर इनका असर)।
- ५ अंक के उत्तर: ठीक ५० शब्द
- १० अंक के उत्तर: ठीक १५० शब्द
- वितरण से जुड़े प्रश्नों पर ध्यान दें — भूकंप/ज्वालामुखी कहाँ केंद्रित हैं?
विषय-क्षेत्र की बात
यह विश्व स्तर का विषय है — वैश्विक वितरण के प्रतिरूप, अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण और प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ। इसे राजस्थान से जुड़े आपदा प्रबंधन के विषयों से न मिलाएँ। आरपीएससी उत्तर में राजस्थान का संदर्भ तभी जोड़ें जब प्रश्न भारत/राजस्थान की भूकंपीयता या आपदा-प्रबंधन से जुड़ रहा हो; अन्यथा अग्नि वलय, अल्पाइड पेटी, सुनामी और ज्वालामुखी प्रकारों का वैश्विक ढाँचा ही मुख्य उत्तर बनेगा।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M ज्वालामुखियों की परिप्रशांत पट्टी का वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर
परिप्रशांत पेटी ("अग्नि वलय") प्रशांत महासागर को 40,000 किमी में घेरती है — विश्व के 80% भूकंप और 75% सक्रिय ज्वालामुखी। न्यूजीलैंड से इंडोनेशिया, फिलीपींस, जापान, कमचटका, अलास्का होते हुए चिली तक। प्रशांत प्लेट का आसपास की प्लेटों के नीचे क्षेपण — विस्फोटक संयुक्त ज्वालामुखी निर्मित: फुजियामा, पिनातुबो, क्राकातोआ।
~50 शब्द • 5 अंक
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