पृथ्वी का आंतरिक भाग एवं भूवैज्ञानिक काल-मापक्रम
मुख्य तथ्य
- पृथ्वी की भूपर्पटी — दो प्रकार — सबसे बाहरी ठोस परत; पृथ्वी के आयतन का 1% से कम
- तीन प्रमुख भूकंपीय असंबद्धताएँ — मोहोरोविचिक (मोहो) ~35 किमी गहराई — भूपर्पटी को मेंटल से अलग करती है; 1909 में खोजी गई
- मेंटल — पृथ्वी की सबसे बड़ी परत — 35 किमी से 2,900 किमी गहराई तक; पृथ्वी के आयतन का 84%
- पृथ्वी का क्रोड — बाह्य और आंतरिक — बाह्य क्रोड (2,900–5,100 किमी): तरल लोहा-निकल, 3,700–4,300°C; परिसंचरण से भू-चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न
- भूवैज्ञानिक काल-मापक्रम — पदानुक्रम — पृथ्वी के 4.6 अरब वर्ष के इतिहास को ईऑन → महाकल्प → कल्प → युग में विभाजित करता है
मुख्य बिंदु
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पृथ्वी की भूपर्पटी — दो प्रकार
- सबसे बाहरी ठोस परत; पृथ्वी के आयतन का 1% से कम
- महाद्वीपीय भूपर्पटी: 30–70 किमी मोटी (औसत 35 किमी), सियाल (सिलिका + एल्युमिनियम) से बनी, घनत्व 2.7 ग्रा/सेमी³
- महासागरीय भूपर्पटी: 5–10 किमी मोटी, सीमा (सिलिका + मैग्नीशियम) से बनी, घनत्व 3.0 ग्रा/सेमी³
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तीन प्रमुख भूकंपीय असंबद्धताएँ
- मोहोरोविचिक (मोहो) ~35 किमी गहराई — भूपर्पटी को मेंटल से अलग करती है; 1909 में खोजी गई
- गुटेनबर्ग असंबद्धता 2,900 किमी — मेंटल को बाह्य कोर से अलग करती है; 1914 में खोजी गई
- लेहमान असंबद्धता 5,100 किमी — बाह्य कोर को आंतरिक कोर से अलग करती है; 1936 में खोजी गई
- 3
मेंटल — पृथ्वी की सबसे बड़ी परत
- 35 किमी से 2,900 किमी गहराई तक; पृथ्वी के आयतन का 84%
- मुख्यतः ओलिवाइन और पाइरोक्सीन (सीमा संरचना) से बना; तापमान 1,000–3,700°C
- एस्थेनोस्फीयर (100–350 किमी): आंशिक रूप से पिघला क्षेत्र जो प्लेट विवर्तनिकी संचलन सक्षम करता है
- 4
पृथ्वी का क्रोड — बाह्य और आंतरिक
- बाह्य क्रोड (2,900–5,100 किमी): तरल लोहा-निकल, 3,700–4,300°C; परिसंचरण से भू-चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न
- आंतरिक क्रोड (5,100–6,371 किमी): अत्यधिक दबाव के कारण ~5,500°C पर भी ठोस; घनत्व ~13 ग्रा/सेमी³
- बाह्य क्रोड में S-तरंगों की अनुपस्थिति — इसके तरल होने का प्रमाण
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भूवैज्ञानिक काल-मापक्रम — पदानुक्रम
- पृथ्वी के 4.6 अरब वर्ष के इतिहास को ईऑन → महाकल्प → कल्प → युग में विभाजित करता है
- चार ईऑन: हेडियन (4,600–4,000 Ma), आर्कियन (4,000–2,500 Ma), प्रोटेरोज़ोइक (2,500–541 Ma), फ़ैनरोज़ोइक (541 Ma–वर्तमान)
- प्रथम तीन ईऑन मिलकर = प्रीकैम्ब्रियन (पृथ्वी के इतिहास का 88%)
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पुराजीवी महाकल्प (541–252 Ma) — छह कल्प
- छह कल्प: कैम्ब्रियन, ऑर्डोविशियन, सिलुरियन, डेवोनियन, कार्बोनिफेरस, पर्मियन
- कैम्ब्रियन विस्फोट (~541 Ma): तीव्र विविधता; अधिकांश प्रमुख जंतु संघ प्रकट
- कार्बोनिफेरस (359–299 Ma): कोयला-निर्माण दलदली वन; पहले सरीसृप; वायुमंडलीय O₂ = 35% — PYQ 2023
- महाकल्प पर्मियन-ट्राइएसिक विलोपन (252 Ma) से समाप्त — 96% समुद्री प्रजातियाँ नष्ट
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मध्यजीवी महाकल्प (252–66 Ma) — सरीसृपों का युग — PYQ 2021
- तीन कल्प: ट्राइएसिक (252–201 Ma), जुरासिक (201–145 Ma), क्रेटेशियस (145–66 Ma)
- पहले डायनासोर (~230 Ma); पहले पक्षी — आर्कियोप्टेरिक्स (150 Ma); पुष्पी पौधे (~130 Ma)
- K-Pg महाविलोपन (~66 Ma): चिक्सुलब क्षुद्रग्रह प्रभाव; 75% प्रजातियाँ नष्ट; डायनासोर समाप्त
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नूतनजीवी महाकल्प (66 Ma–वर्तमान) — स्तनधारियों का युग
- तीन कल्प: पेलियोजीन (66–23 Ma), नियोजीन (23–2.58 Ma), क्वाटरनरी (2.58 Ma–वर्तमान)
- भारत-एशिया टक्कर (~50 Ma) → हिमालय निर्माण प्रारंभ
- प्लाइस्टोसीन (2.58–0.012 Ma): ~20 हिमाच्छादन चक्र; समुद्र स्तर आज से 120 मीटर नीचे
- होमो सेपियन्स ~300,000 वर्ष पूर्व विकसित; होलोसीन में मानव सभ्यता का उदय
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भूकंपीय तरंग विश्लेषण — पृथ्वी के आंतरिक भाग को पढ़ना
- P-तरंगें (प्राथमिक/संपीडनात्मक): सभी माध्यमों (ठोस, तरल, गैस) से गुजरती हैं
- S-तरंगें (द्वितीयक/अपरूपण): केवल ठोस माध्यम से; बाह्य क्रोड में अनुपस्थित → तरल होने का प्रमाण
- P-तरंगों का छाया क्षेत्र (भूकंप केंद्र से 103°–143°): तरल बाह्य क्रोड की पुष्टि
- 10
समस्थितिकता — तैरती भूपर्पटी
- गुरुत्वीय संतुलन की अवधारणा, जिसमें भूपर्पटी घने मेंटल पर "तैरती" मानी जाती है
- एयरी मॉडल: पर्वत श्रेणियों की गहरी "जड़ें" होती हैं, जो उनकी ऊँचाई की क्षतिपूर्ति करती हैं
- प्रैट मॉडल: पर्वतों के नीचे अपेक्षाकृत कम घनत्व वाली चट्टानें मानी जाती हैं
- हिमानी-पश्चात उत्थान की व्याख्या करता है — हिमनदों के पिघलने के बाद पर्वतीय भूभाग ऊपर उठता है
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प्लेट विवर्तनिकी — एकीकृत सिद्धांत
- वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन (1912) और हेस के सागर-तल प्रसार (1960) को एकीकृत किया
- पृथ्वी का स्थलमंडल 7 प्रमुख प्लेटों में विभाजित: प्रशांत, उत्तर अमेरिकी, यूरेशियाई, अफ्रीकी, अंटार्कटिक, इंडो-ऑस्ट्रेलियाई, दक्षिण अमेरिकी
- मेंटल में संवहन धाराएँ (आद्य ताप + रेडियोधर्मी क्षय से प्रेरित) प्लेट संचलन चलाती हैं
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शैल चक्र — तीन प्रकार की शैलें
- आग्नेय शैल: मैग्मा/लावा से क्रिस्टलीकृत — ग्रेनाइट (अंतर्भेदी), बेसाल्ट (बहिर्भेदी)
- अवसादी शैल: निक्षेपित और संघनित परतें — बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, कोयला, पेट्रोलियम
- कायांतरित शैल: ताप/दबाव से रूपांतरित — संगमरमर (चूना पत्थर से), क्वार्टजाइट (बलुआ पत्थर से), स्लेट (शेल से)
- सभी जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) केवल अवसादी अनुक्रमों में बनते हैं
यह विषय आरपीएससी मुख्य परीक्षा में क्यों महत्त्वपूर्ण है?
आरपीएससी मुख्य परीक्षा में पृथ्वी का आंतरिक भाग और भूवैज्ञानिक काल-मापक्रम इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे विश्व भौतिक भूगोल, आरेख, समय-सीमाओं और अवधारणात्मक उत्तरों को एक ही विषय में जोड़ते हैं। आरपीएससी के आधिकारिक पाठ्यक्रम २०१८ के अनुसार मुख्य परीक्षा में ४ वर्णनात्मक/विश्लेषणात्मक प्रश्नपत्र होते हैं और प्रत्येक प्रश्नपत्र २०० अंक का है।
यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है
विषय ७३ आरपीएससी मुख्य परीक्षा में सबसे अधिक परीक्षित भूगोल विषयों में से एक है। ६-वर्षीय पूर्ववर्ती प्रश्न अभिलेख (२०१३–२०२३) में इसने औसतन ५.८ अंक प्रति वर्ष के साथ २९ अंक प्रदान किए हैं — प्रश्नपत्र द्वितीय के पाँच विश्व भूगोल विषयों (७३–७७) में सर्वाधिक। २०१६, २०१८, २०२१ और २०२३ में प्रश्न पूछे गए हैं, जो इसे २०२६ के लिए सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक बनाता है।
दो परस्पर संबद्ध विषय-वस्तुएँ
यह विषय निम्नलिखित को समेटता है:
- (क) पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचनात्मक परतें — संरचना, मोटाई, तापमान, तथा उनके बीच विच्छेदिकाएँ
- (ख) भूवैज्ञानिक कालमान — पृथ्वी का ४.६ अरब वर्षों का इतिहास महाकल्पों, कल्पों, कालखंडों और युगों में विभाजित, जिसमें प्रत्येक विभाजन को चिह्नित करने वाली प्रमुख जैविक और भौतिक घटनाएँ
परीक्षा रणनीति
५-अंकीय उत्तरों के लिए सटीक आँकड़े — गहराई, तापमान, लाखों वर्षों में समय सीमाएँ — अनिवार्य हैं। १०-अंकीय उत्तरों के लिए आंतरिक संरचना को प्लेट विवर्तनिकी से जोड़ें, या भूवैज्ञानिक कालमान में जीवन के विकास का वर्णन करें।
आरपीएससी ने "तथ्य पुनर्प्राप्ति" प्रश्न (मेसोजोइक कल्प की समय सीमा, सियाल की संरचना, कार्बोनिफेरस की विशेषताएँ) और वैचारिक प्रश्न (प्लेट विवर्तनिकी, चट्टान प्रकार) दोनों पूछे हैं।
विषय-क्षेत्र नोट
यह विषय विश्व-स्तर (वैश्विक भौतिक भूगोल) का है। इसे विषय ७८ (भारत की भू-आकृति) या विषय ८३ (राजस्थान की भू-आकृति) से न मिलाएँ। भूवैज्ञानिक कालमान सार्वभौमिक है; भारतीय भूविज्ञान के संदर्भ (गोंडवाना कोयला क्षेत्र, दक्कन ट्रैप) वैध सहायक साक्ष्य हैं किंतु मुख्य केंद्र नहीं।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M मोहोरोविचिक असंबद्धता क्या है? इसका महत्त्व बताइए।
आदर्श उत्तर
मोहोरोविचिक असंबद्धता (मोहो), 1909 में खोजी गई, पृथ्वी की भूपर्पटी और मेंटल के बीच सीमा है — महाद्वीपों के नीचे ~35 किमी गहराई पर। यहाँ P-तरंगों की गति ~6 किमी/से से ~8 किमी/से हो जाती है, जो सियाल/सीमा भूपर्पटी से घने ओलिवाइन-पाइरोक्सीन मेंटल में संरचना परिवर्तन का सूचक है।
~50 शब्द • 5 अंक
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