राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 के अंतर्गत नगरीय संपत्ति, विकास और नगर नियोजन
मुख्य तथ्य
- 11 सितंबर 2009 को राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 को राज्यपाल की स्वीकृति मिली;
- 2009 का अधिनियम नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका को नगरीय क्षेत्र की संपत्ति, नागरिक सेवाओं, विकास योजना और नगर नियोजन से जोड़ता है।
- 1956 का राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम नगरपालिका को सौंपी गई कुछ भूमियों के आवंटन और नियमितीकरण से जुड़ता है;
- 1959 का राजस्थान नगर सुधार अधिनियम नगर सुधार न्यास की पृष्ठभूमि देता है;
- 1964 का राजस्थान लोक परिसर अधिनियम अनधिकृत कब्जे की बेदखली से जुड़ता है; नगरपालिका भूमि के गलत पट्टे या हस्तांतरण में इसका महत्व दिखता है।
मुख्य बिंदु
- 1
11 सितंबर 2009 को राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 को राज्यपाल की स्वीकृति मिली; इसी अधिनियम ने राजस्थान की नगरपालिकाओं के लिए एकीकृत वैधानिक ढांचा दिया।
- 2
2009 का अधिनियम नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका को नगरीय क्षेत्र की संपत्ति, नागरिक सेवाओं, विकास योजना और नगर नियोजन से जोड़ता है।
- 3
1956 का राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम नगरपालिका को सौंपी गई कुछ भूमियों के आवंटन और नियमितीकरण से जुड़ता है; यह भूमि-प्रबंधन वाले प्रश्नों में महत्वपूर्ण संदर्भ है।
- 4
1959 का राजस्थान नगर सुधार अधिनियम नगर सुधार न्यास की पृष्ठभूमि देता है; नगरपालिका और नगर सुधार न्यास के अधिकार-क्षेत्र का विवाद राज्य सरकार के स्तर पर सुलझता है।
- 5
1964 का राजस्थान लोक परिसर अधिनियम अनधिकृत कब्जे की बेदखली से जुड़ता है; नगरपालिका भूमि के गलत पट्टे या हस्तांतरण में इसका महत्व दिखता है।
- 6
1992 के 74वें संविधान संशोधन ने शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक आधार दिया; विकास योजना, जिला योजना और महानगर योजना इसी ढांचे से जुड़ते हैं।
- 7
2009 का अधिनियम भवन निर्माण को भवन उपविधि, अनुमति, स्वीकृत मानचित्र, भूमि-उपयोग और अतिक्रमण नियंत्रण से जोड़ता है; यही वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का मुख्य क्षेत्र है।
आगे पढ़ें
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम में नगरीय संपत्ति का वैधानिक अर्थ क्या है?
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम में नगरीय संपत्ति का वैधानिक अर्थ उन सार्वजनिक उपयोग वाली संपत्तियों से है जो नगरपालिका में निहित होकर उसके निर्देशन, प्रबंधन और नियंत्रण में सार्वजनिक न्यास की तरह रखी जाती हैं। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 के आधिकारिक पाठ में धारा 68 नगरपालिका में निहित होने वाली संपत्ति की 13 श्रेणियां गिनाती है। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 में नगरीय संपत्ति केवल भवन या खाली भूखंड तक सीमित नहीं है। नगरपालिका के अधीन आने वाली संपत्ति में सार्वजनिक सड़कें, फुटपाथ, सार्वजनिक बाजार, सार्वजनिक भवन, पार्क, उद्यान, घाट, सार्वजनिक दीपक, नालियां, सीवर, पुल, जल-स्रोतों से जुड़ी संरचनाएं, मृत पशु सहित सार्वजनिक स्थानों से उठाया गया ठोस कचरा और ऐसी सरकारी भूमि भी आ सकती है जिसे राज्य सरकार नगरपालिका में निहित करे। इसका उद्देश्य यह है कि नागरिक उपयोग की चीजों का प्रबंधन किसी निजी स्वामित्व की तरह नहीं, बल्कि सार्वजनिक न्यास की तरह हो।
निहित संपत्ति पर नगरपालिका का निर्देशन, प्रबंधन और नियंत्रण रहता है, पर इसका अर्थ असीमित स्वामित्व नहीं है। अधिनियम की भाषा नगरपालिका को इन संपत्तियों का ट्रस्टी मानती है, यानी संपत्ति का उपयोग अधिनियम के उद्देश्यों और नगरहित में होना चाहिए। राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से आरक्षित संपत्ति, या किसी दूसरे कानून के अधीन आने वाली संपत्ति, स्वतः नगरपालिका की संपत्ति नहीं बन जाती।
याद रखें: नगरीय संपत्ति का मुख्य सूत्र है सार्वजनिक उपयोग, नगरपालिका नियंत्रण और अधिनियम के उद्देश्य के लिए न्यासी प्रबंधन।
पूरा नोट खोलें
यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।
8 और खंड पूरे नोट में हैं
स्टडी पैक खोलें