मुख्य तथ्य

  • राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009, अधिनियम संख्या 18, 2009 है और राजस्थान राजपत्र में 11 सितंबर 2009 को प्रकाशित हुआ।
  • अध्याय 2 में नगर पालिकाओं के गठन, संरचना, वार्ड, चुनाव और नगरपालिका शासन के मूल प्रावधान दिए गए हैं।
  • राजस्थान में नगर निगम बड़े नगरीय क्षेत्र, नगर परिषद छोटे नगरीय क्षेत्र और नगर पालिका संक्रमणशील क्षेत्र से जुड़ी संस्था मानी जाती है;
  • धारा 6 के अनुसार नगर पालिका की सभी निर्वाचित सीटें वार्डों से प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाती हैं और कुल निर्वाचित सीटें 13 से कम नहीं हो सकतीं।
  • धारा 43 के अनुसार नगर निगम में महापौर और उपमहापौर, नगर परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा नगर पालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने जाते हैं।

मुख्य बिंदु

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    राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009, अधिनियम संख्या 18, 2009 है और राजस्थान राजपत्र में 11 सितंबर 2009 को प्रकाशित हुआ।

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    अधिनियम पूरे राजस्थान पर लागू है, लेकिन छावनी क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

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    अध्याय 2 में नगर पालिकाओं के गठन, संरचना, वार्ड, चुनाव और नगरपालिका शासन के मूल प्रावधान दिए गए हैं।

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    राजस्थान में नगर निगम बड़े नगरीय क्षेत्र, नगर परिषद छोटे नगरीय क्षेत्र और नगर पालिका संक्रमणशील क्षेत्र से जुड़ी संस्था मानी जाती है; क्षेत्र का वर्गीकरण अनुच्छेद 243-क्यू के अनुसार राज्य सरकार की अधिसूचना से तय होता है।

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    धारा 6 के अनुसार नगर पालिका की सभी निर्वाचित सीटें वार्डों से प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाती हैं और कुल निर्वाचित सीटें 13 से कम नहीं हो सकतीं।

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    अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आरक्षण जनसंख्या अनुपात और अधिनियम में दी गई सीमा के आधार पर होता है; कुल सीटों में से आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहती हैं।

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    धारा 43 के अनुसार नगर निगम में महापौर और उपमहापौर, नगर परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा नगर पालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने जाते हैं।

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    अध्याय 15 नगरपालिका स्टाफ से संबंधित है; नगर निगम में आयुक्त, नगर परिषद में आयुक्त और नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी की भूमिका निभाते हैं।

राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की संवैधानिक पृष्ठभूमि क्या है?

राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009, 74वें संविधान संशोधन और संविधान के भाग 9-क की नगर-निकाय व्यवस्था को राजस्थान में लागू करने वाला मुख्य राज्य कानून है। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 राजस्थान की नगरीय स्थानीय स्वशासन व्यवस्था का मुख्य वैधानिक ढाँचा है। यह अधिनियम 74वें संविधान संशोधन के बाद बने संवैधानिक मॉडल के अनुरूप नगर निकायों को संगठित करता है। संविधान के भाग 9-क में नगर निकायों को संवैधानिक मान्यता मिली, और अनुच्छेद 243-क्यू संक्रमणशील क्षेत्र, छोटे नगरीय क्षेत्र और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए अलग-अलग नगरपालिका संस्थाओं की बात करता है। राजस्थान का अधिनियम इसी संवैधानिक भाषा को राज्य-स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलता है। भारत कोड पर प्रकाशित अधिनियम-पाठ के अनुसार राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 अधिनियम संख्या 18, वर्ष 2009 के रूप में राजपत्र असाधारण में प्रकाशित हुआ।

अधिनियम का आरंभिक भाग परिभाषाएँ देता है और फिर अध्याय 2 सीधे नगर पालिकाओं के गठन और सरकार पर आता है। परीक्षा में यह समझना जरूरी है कि “नगर पालिका” शब्द कई बार व्यापक अर्थ में सभी नगरीय निकायों के लिए आता है, जबकि संस्था-विशेष के रूप में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका अलग-अलग स्तर हैं। अधिनियम छावनी क्षेत्रों पर लागू नहीं होता, क्योंकि छावनियों की व्यवस्था अलग केंद्रीय कानून से चलती है।

याद रखने योग्य बात: अधिनियम 2009 को नगरीय निकायों की प्रशासनिक किताब मानें, जिसका आरंभ गठन, सीमा, वार्ड और पदाधिकारियों से होता है।

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