RAS प्रश्न
उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम और भारतीय मानसून के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
सही उत्तर: (B) गर्मियों में जेट स्ट्रीम हिमालय के उत्तर में चली जाती है, जिससे मानसून आगे बढ़ पाता है।
गर्मियों में उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट हिमालय के उत्तर खिसकती है, जिससे भारतीय मानसून के आगे बढ़ने की ऊपरी वायुमंडलीय बाधा हटती है।
व्याख्या
शीत ऋतु में उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट हिमालय के दक्षिण में, उत्तरी भारत के ऊपर बहती है। जून में तिब्बती पठार के गर्म होने से यह जेट हिमालय के उत्तर चली जाती है। इससे ऊपरी वायुमंडल में पश्चिमी हवाओं की बाधा हटती है और भारत में मानसून के तीव्र आगमन का रास्ता खुलता है। IMD के अनुसार भारतीय क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट, उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट के हिमालय के उत्तर खिसकने के बाद प्रकट होती है और दक्षिण-पश्चिम मानसून काल में रहती है। इसलिए प्रश्न का सही बिंदु यह है कि पश्चिमी जेट का उत्तर की ओर हटना मानसून की प्रगति से जुड़ा निर्णायक बदलाव है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) मानसून मौसम में उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट मजबूत होकर भारत पर नहीं रहती; वह उत्तर की ओर हटती है और उसके बाद उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट मानसून परिसंचरण में प्रमुख होती है।
- (C) जेट स्ट्रीम का मानसून से संबंध है, क्योंकि पश्चिमी जेट के हिमालय के उत्तर हटने से ऊपरी वायुमंडल की पश्चिमी बाधा हटती है और मानसून के आरंभ का रास्ता बनता है।
- (D) उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट पूरे वर्ष दक्षिणी भारत के ऊपर स्थिर नहीं रहती; शीत ऋतु में वह हिमालय के दक्षिण, उत्तरी भारत के ऊपर रहती है और गर्मियों में उत्तर की ओर खिसकती है।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय मानसून की ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण व्यवस्था को परखता है। RAS में यह विषय इसलिए बार-बार आता है क्योंकि मानसून के आगमन, तिब्बती पठार के तापीय प्रभाव और जेट धाराओं का संबंध भारत की जलवायु-भूगोल की मूल अवधारणा है।
