RAS प्रश्न
क्योटो प्रोटोकॉल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन गलत है/हैं? 1. इसे 1997 में सीओपी3 में अपनाया गया और 2005 में लागू किया गया। 2. संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्योटो प्रोटोकॉल की पुष्टि की और बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती के लिए प्रतिबद्ध हुआ। 3. इसने बाध्यकारी लक्ष्यों के साथ अनुलग्नक-1 विकसित देशों और गैर-अनुलग्नक-1 विकासशील देशों, दोनों को शामिल किया। 4. दोहा संशोधन (2012) ने क्योटो प्रतिबद्धताओं को दूसरी प्रतिबद्धता अवधि (2013-2020) तक बढ़ाया।
सही उत्तर: (A) केवल 2 और 3।
क्योटो प्रोटोकॉल पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उसकी पुष्टि नहीं की, और बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्य केवल अनुलग्नक-1 विकसित देशों पर लागू थे, गैर-अनुलग्नक-1 विकासशील देशों पर नहीं।
व्याख्या
कथन 2 और 3 गलत हैं। क्योटो प्रोटोकॉल 11 दिसंबर 1997 को सीओपी3 में अपनाया गया और 16 फरवरी 2005 को लागू हुआ, इसलिए कथन 1 सही है। संयुक्त राष्ट्र संधि-संग्रह में अमेरिका के सामने 12 नवंबर 1998 की हस्ताक्षर तिथि दर्ज है, पर पुष्टि की तिथि नहीं है; अमेरिका ने 2001 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के समय इससे हाथ खींच लिया। UNFCCC स्पष्ट करता है कि क्योटो प्रोटोकॉल अनुलग्नक-आधारित ढांचे पर चलता है और केवल विकसित देशों को बाध्य करता है। इसलिए चीन और भारत जैसे विकासशील देशों पर बाध्यकारी लक्ष्य नहीं थे। दोहा संशोधन 2012 में अपनाया गया और 2013 से 2020 तक दूसरी प्रतिबद्धता अवधि लेकर आया, इसलिए कथन 4 भी सही है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (B) कथन 1 और 4 दोनों सही हैं, क्योंकि क्योटो 1997 में अपनाया गया, 2005 में लागू हुआ और दोहा संशोधन ने 2013-2020 की दूसरी प्रतिबद्धता अवधि जोड़ी।
- (C) कथन 3 के साथ कथन 2 भी गलत है, क्योंकि अमेरिका ने क्योटो प्रोटोकॉल की पुष्टि नहीं की थी।
- (D) कथन 1 सही है, क्योंकि क्योटो प्रोटोकॉल 11 दिसंबर 1997 को अपनाया गया और 16 फरवरी 2005 को लागू हुआ।
अवधारणा
क्योटो प्रोटोकॉल जैसे जलवायु परिवर्तन समझौतों में अनुलग्नक-आधारित जिम्मेदारियां और विकसित-विकासशील देशों का फर्क महत्वपूर्ण है। RAS में यह बार-बार इसलिए आता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौतों में वर्ष, लागू होने की तिथि और बाध्यकारी लक्ष्यों का दायरा अक्सर कथन-आधारित MCQ में आता है।
