RAS प्रश्न
दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार करके किस बल के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों में बदल जाती हैं?
सही उत्तर: (A) कोरिओलिस बल।
दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार करने के बाद पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न कोरिओलिस बल के कारण दाईं ओर मुड़कर दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें बनती हैं।
व्याख्या
इस प्रश्न का केंद्र पवनों की दिशा बदलने का कारण है। कोरिओलिस बल पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न होता है और उत्तरी गोलार्ध में पवनों को दाईं ओर मोड़ता है। पत्र सूचना कार्यालय के भारतीय मानसून संबंधी दस्तावेज में भी यही प्रक्रिया बताई गई है कि दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार करती हैं, फिर पृथ्वी के घूर्णन के कारण मुड़ती हैं और भारत में दक्षिण-पश्चिम दिशा से पहुंचती हैं। इसी कारण दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें उत्तरी गोलार्ध में आकर दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों का रूप लेती हैं और भारत में वर्षा लाती हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) गुरुत्वाकर्षण बल यहां गलत है, क्योंकि प्रश्न पवनों के दाईं ओर मुड़ने की बात पूछता है और यह मोड़ पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न कोरिओलिस बल से जुड़ा है।
- (C) अपकेंद्रीय बल सही विकल्प नहीं है, क्योंकि दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनों के भूमध्य रेखा पार करने के बाद दिशा बदलने का आधार पृथ्वी का घूर्णन और कोरिओलिस प्रभाव है।
- (D) घर्षण बल इस परिवर्तन की कुंजी नहीं है, क्योंकि प्रश्न में पूछा गया दक्षिण-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम में मुड़ना उत्तरी गोलार्ध में कोरिओलिस बल द्वारा दाईं ओर विक्षेपण से समझाया गया है।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय मानसून की उत्पत्ति और पवन-तंत्र में कोरिओलिस प्रभाव की भूमिका जांचता है। आरएएस में यह बार-बार आता है क्योंकि मानसून की दिशा, आगमन और वर्षा-व्यवस्था भारत के भौतिक भूगोल का मूल हिस्सा हैं।
