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RAS प्रश्न

शिवालिक श्रेणी (बाह्य हिमालय) मुख्य रूप से किस प्रकार के निक्षेपों से बनी है?

सही उत्तर: (D) असंगठित अवसाद (रेत, बजरी, संगुटिकाश्म)।

शिवालिक श्रेणी मुख्य रूप से असंगठित नदी-जनित अवसादों, जैसे रेत, बजरी और संगुटिकाश्म, से बनी है।

  1. (A)

    आग्नेय और ज्वालामुखी चट्टानें

  2. (B)

    प्राचीन क्रिस्टलीय ग्रेनाइट

  3. (C)

    कायांतरित चट्टानें (नाइस और शिस्ट)

  4. (D)

    असंगठित अवसाद (रेत, बजरी, संगुटिकाश्म)

व्याख्या

शिवालिक श्रेणी हिमालय की सबसे बाहरी और सबसे नई श्रेणी मानी जाती है, इसलिए इसकी बनावट कठोर प्राचीन चट्टानों से नहीं, बल्कि नदियों द्वारा लाए और जमाए गए अवसादों से जुड़ी है। शिवालिक के जलोढ़ निक्षेपों में रेत, गाद, चिकनी मिट्टी, शिलाखंड और संगुटिकाश्म मिलते हैं। इसी कारण विकल्प D सही है: यहां मुख्य संकेत “असंगठित अवसाद” है, न कि आग्नेय, ग्रेनाइट या कायांतरित चट्टानें। शिवालिक और मध्य हिमालय के बीच पाई जाने वाली घाटियों को दून कहा जाता है, जैसे देहरादून; यह क्षेत्र हिमालयी निक्षेपों और घाटी-निर्माण से जुड़ा है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) आग्नेय और ज्वालामुखी चट्टानें शिवालिक की मुख्य बनावट नहीं हैं, क्योंकि शिवालिक नदी-जनित जलोढ़ अवसादों से जुड़ी श्रेणी है।
  • (B) प्राचीन क्रिस्टलीय ग्रेनाइट शिवालिक की पहचान से मेल नहीं खाते, क्योंकि शिवालिक सबसे नई बाहरी हिमालयी श्रेणी है और अवसादी निक्षेपों से बनी है।
  • (C) नाइस और शिस्ट जैसी कायांतरित चट्टानें कठोर रूपांतरित चट्टानें हैं, जबकि शिवालिक में रेत, गाद, शिलाखंड और संगुटिकाश्म जैसे निक्षेप मिलते हैं।

अवधारणा

भारतीय भू-आकृति विज्ञान में हिमालय की उप-श्रेणियों और उनकी चट्टानी बनावट की समझ जरूरी है। RAS में हिमालय, नदी-निक्षेप और दून घाटियां भारत के भौतिक भूगोल के मूल तथ्य होने के कारण बार-बार पूछे जाते हैं।

स्रोत

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