RAS प्रश्न
भारत में 'प्रदूषक भुगतान' सिद्धांत को सर्वोच्च न्यायालय ने किस ऐतिहासिक मामले में बरकरार रखा?
सही उत्तर: (D) एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ।
भारत में प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को सर्वोच्च न्यायालय ने एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ मामले में बरकरार रखा।
व्याख्या
एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ सही मामला है, क्योंकि 1987 में दिल्ली की श्रीराम इंडस्ट्रीज के ओलियम गैस रिसाव से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने खतरनाक उद्योगों के लिए पूर्ण दायित्व का सिद्धांत स्थापित किया और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को स्वीकार किया। एम.सी. मेहता से जुड़े पर्यावरणीय मामले में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर जुर्माना, क्षतिपूर्ति और पर्यावरणीय पुनर्स्थापन का भार डालने की बात आती है। इसलिए प्रश्न का केंद्र केवल स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार नहीं है, बल्कि यह है कि प्रदूषण से हुई क्षति की कीमत प्रदूषक ही चुकाए।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा मामला था, इसलिए यह प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को बरकरार रखने वाला ऐतिहासिक मामला नहीं है।
- (B) टी.एन. गोदावर्मन बनाम भारत संघ का मुख्य संबंध वन संरक्षण से था, जबकि यह प्रश्न प्रदूषण से हुई क्षति की लागत प्रदूषक पर डालने वाले सिद्धांत पर है।
- (C) नर्मदा बचाओ बनाम भारत संघ बांध निर्माण से संबंधित मामला था, इसलिए यह ओलियम गैस रिसाव और खतरनाक उद्योगों की देयता वाले प्रसंग से मेल नहीं खाता।
अवधारणा
यह प्रश्न पर्यावरण विधि में न्यायपालिका द्वारा विकसित सिद्धांतों, खासकर प्रदूषक भुगतान और पूर्ण दायित्व, की समझ जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि पर्यावरण, मौलिक अधिकार और सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक मामले साथ-साथ पूछे जाते हैं।
