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RAS प्रश्न

कोपेन जलवायु वर्गीकरण प्रणाली भारत की जलवायु को मुख्य रूप से किस प्रकार वर्गीकृत करती है?

सही उत्तर: (B) अधिकांश प्रायद्वीपीय भारत के लिए 'Aw' (उष्णकटिबंधीय आर्द्र और शुष्क या सवाना)।

कोपेन जलवायु वर्गीकरण में अधिकांश प्रायद्वीपीय भारत को Aw, यानी उष्णकटिबंधीय सवाना या गीला-शुष्क जलवायु, में रखा जाता है।

  1. (A)

    अधिकांश भारत के लिए 'BWh' (गर्म मरुस्थल)

  2. (B)

    अधिकांश प्रायद्वीपीय भारत के लिए 'Aw' (उष्णकटिबंधीय आर्द्र और शुष्क या सवाना)

  3. (C)

    पूरे देश के लिए 'Af' (उष्णकटिबंधीय वर्षावन)

  4. (D)

    हिमालय के लिए 'Dfc' (उपआर्कटिक)

व्याख्या

कोपेन वर्गीकरण तापमान और वर्षा के आधार पर जलवायु प्रकार तय करता है। भारत संबंधी तालिका में Aw को उष्णकटिबंधीय सवाना बताया गया है और इसका क्षेत्र कर्क रेखा के दक्षिण में अधिकांश प्रायद्वीपीय पठार दिया गया है। इसलिए भारत की जलवायु के लिए यहां सबसे ठीक विकल्प B है। बाकी भारत एक जैसा नहीं है: पश्चिमी तट और पूर्वोत्तर में Am, पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों में Af, राजस्थान-गुजरात के भीतरी भागों में BSh, थार में BWh, सिंधु-गंगा मैदान में Cwa और ऊंचे हिमालय में E जैसे प्रकार मिलते हैं। इसी विविधता के कारण “पूरे देश” या “अधिकांश भारत” को किसी एक मरुस्थलीय या वर्षावन प्रकार में रखना गलत होगा।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) BWh गर्म मरुस्थलीय जलवायु मुख्य रूप से थार या अत्यंत पश्चिमी राजस्थान से जुड़ी है, इसलिए इसे अधिकांश भारत पर लागू नहीं किया जा सकता।
  • (C) Af उष्णकटिबंधीय वर्षावन जलवायु केवल पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर जैसे अधिक आर्द्र हिस्सों तक सीमित है, पूरे देश के लिए नहीं।
  • (D) Dfc हिमालय के सीमित क्षेत्रों से जुड़ सकता है, लेकिन पूरे हिमालय या भारत की मुख्य जलवायु को यह नहीं बताता; ऊंचे हिमालय के लिए E प्रकार रखा गया है।

अवधारणा

यह प्रश्न भारतीय जलवायु के क्षेत्रीय वर्गीकरण और कोपेन पद्धति की समझ जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि भारत की मानसूनी प्रकृति के भीतर क्षेत्रीय अंतर, राजस्थान के शुष्क क्षेत्र और प्रायद्वीपीय भारत की जलवायु को अलग-अलग पहचानना पड़ता है।

स्रोत

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